भारत का रक्षा क्षेत्र मजबूत होगा, 2.38 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मिली मंजूरी
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- 2.38 लाख करोड़ रुपए के रक्षा प्रस्तावों को मिली स्वीकृति मिली।
- धनुष गन, एयर डिफेंस सिस्टम और निगरानी उपकरणों से जमीन पर ताकत बढ़ेगी।
- नए ट्रांसपोर्ट विमान, ड्रोन और S-400 सिस्टम से आसमान में सुरक्षा मजबूत होगी।
- होवरक्राफ्ट से समुद्र में तेज गश्त और रेस्क्यू ऑपरेशन आसान होंगे।
- 2025-26 में 6.73 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव और 2.28 लाख करोड़ के अनुबंध साइन हुए।
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भारत सरकार ने रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में 2.38 लाख करोड़ के सैन्य साजो-सामान की खरीद को मंजूरी दी गई। इस फैसले का मकसद देश की सुरक्षा को और मजबूत करना और आत्मनिर्भर रक्षा को बढ़ावा देना है।
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भारतीय थल सेना: जमीन पर बढ़ेगी ताकत
भारतीय सेना के लिए कई आधुनिक हथियार और सिस्टम मंजूर किए गए हैं। इसमें धनुष गन सिस्टम शामिल है, जो लंबी दूरी तक सटीक हमला कर सकता है। इसके अलावा एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम से दुश्मन के हवाई हमलों को तुरंत रोका जा सकेगा। हाई कैपेसिटी रेडियो रिले से युद्ध के दौरान संचार मजबूत रहेगा। रनवे इंडिपेंडेंट सर्विलांस सिस्टम से दुर्गम इलाकों में निगरानी आसान होगी। नए आर्मर्ड पियर्सिंग गोला-बारूद से दुश्मन के टैंकों को आसानी से नष्ट किया जा सकेगा। इस प्रस्ताव में लगभग 300 धनुष गन का आर्डर जबलपुर की जीसीएफ फैक्ट्री को मिलने का अनुमान है। पहले का कॉन्ट्रैक्ट फैक्ट्री ने लगभग 60% पूरा कर लिया है।
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भारतीय वायुसेना: आसमान में बढ़ेगी ताकत
वायुसेना के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। पुराने AN-32 और IL-76 विमानों की जगह नए एयरक्राफ्ट लाए जाएंगे। S-400 मिसाइल सिस्टम से हवाई सुरक्षा मजबूत होगी। रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट से निगरानी और सर्जिकल स्ट्राइक संभव होंगे। सुखोई-30 विमानों के इंजन अपग्रेड से उनकी क्षमता और उम्र बढ़ेगी।
तटरक्षक बल: समुद्र में तेज निगरानी
भारतीय तटरक्षक बल के लिए हाई-स्पीड होवरक्राफ्ट खरीदने की मंजूरी दी गई है। ये वाहन समुद्री तटों पर तेजी से गश्त, राहत और बचाव कार्यों में बेहद उपयोगी साबित होंगे। इससे समुद्री सुरक्षा और मजबूत होगी।
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रक्षा बजट में बना नया रिकॉर्ड
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 रक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक रहा है। इस साल 55 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल कीमत 6.73 लाख करोड़ है। वहीं 2.28 लाख करोड़ के 503 रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत अपनी सैन्य ताकत को तेजी से मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।