आजादी के 250 साल पर अमेरिका ने दफनाया टाइम कैप्सूल, 2276 में खुलेगा राज

Manya Jain | Jul 04, 2026, 17:24 IST
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अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने पर 408 किलो का टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया गया है। यह कैप्सूल अब 250 साल बाद यानी साल 2276 में भविष्य की पीढ़ी द्वारा खोला जाएगा।

अमेरिका ने अपनी आजादी के 250 साल पूरे होने पर एक खास कदम उठाया है। 4 जुलाई को 408 किलो का एक टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया गया। इसे फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में दफनाया गया है।



यह कैप्सूल 250 साल बाद, यानी 2276 में खोला जाएगा। इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के रिकॉर्ड में भी दर्ज कर दी गई है। इससे आने वाली पीढ़ियां इसे आसानी से ढूंढ सकेंगी।



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क्यों चुना गया फिलाडेल्फिया

फिलाडेल्फिया को अमेरिका की आजादी का जन्मस्थान माना जाता है। 4 जुलाई 1776 को यहीं स्वतंत्रता घोषणा पत्र को मंजूरी मिली थी। यही वजह है कि टाइम कैप्सूल दफनाने के लिए इसी शहर को चुना गया। यह शहर अमेरिका के इतिहास से गहराई से जुड़ा है।



कैप्सूल में क्या-क्या रखा गया

इस कैप्सूल में 50 राज्यों की ओर से चुनी गई खास चीजें रखी गई हैं। इनमें व्हेल की हड्डी और जिप्सम रेगिस्तान की रेत शामिल है।



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राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा भी इसमें रखा गया है। साथ ही एआई (AI – Artificial Intelligence) की भविष्यवाणियां और कई ऐतिहासिक दस्तावेज भी शामिल किए गए हैं।



250 साल तक सुरक्षित रहने की तकनीक

कैप्सूल बनाना आसान था, लेकिन उसे 250 साल तक सुरक्षित रखना मुश्किल चुनौती थी। वैज्ञानिकों ने कई साल रिसर्च करके खास डिजाइन तैयार किया।



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यह कैप्सूल चौकोर नहीं, बल्कि सिलेंडर के आकार का है। वैज्ञानिकों के अनुसार चौकोर डिब्बों के कोने समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं। सिलेंडर प्रिसिजन-माइल्ड स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है। इसी धातु का इस्तेमाल जंग रोकने वाले वैज्ञानिक उपकरणों में भी होता है।



सील करने का खास तरीका

कैप्सूल को 4 जुलाई को सील नहीं किया गया। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका था। सील करने के लिए इंडियम नाम की खास धातु इस्तेमाल हुई है। यह नरम धातु ढक्कन की छोटी-सी दरार भी भर देती है।



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कैप्सूल के अंदर 35 प्रतिशत नमी रखी गई है। ज्यादा नमी से कागज खराब हो सकते थे, बिल्कुल सूखी हवा से चीजें टूट सकती थीं। इसे करीब 10 फीट गहराई में दफनाया गया है। इस गहराई पर तापमान में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आता।



पानी से बचाने का इंतजाम

वैज्ञानिकों के मुताबिक टाइम कैप्सूल का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है। इसलिए मुख्य कैप्सूल के ऊपर एक और स्टील का सिलेंडर लगाया गया है। दोनों सिलेंडरों के बीच हवा की एक परत रहती है।



यह परत बाहर से आने वाले पानी को रोकने में मदद करेगी। यह वैसे ही काम करता है, जैसे पानी में उल्टी बाल्टी डुबोने पर उसमें हवा फंसी रहती है। अगर भविष्य में भूजल बढ़े, तब भी यह हवा कैप्सूल को बचाएगी।



अमेरिका ऐसा क्यों कर रहा है

संग्रहालय की चीजों का रूप समय के साथ बदल सकता है। लेकिन सील किया गया टाइम कैप्सूल तय समय तक नहीं खुलता। इसलिए 250 साल बाद लोग 2026 के अमेरिका को वैसे ही देख पाएंगे। इसका मकसद सिर्फ इतिहास बचाना नहीं, बल्कि उस दौर की पहचान सहेजना भी है।



भारत में भी दबा था कैप्सूल

1973 में इंदिरा गांधी ने दिल्ली के लाल किले के पास भारत का पहला टाइम कैप्सूल दफनाया था। इसका नाम 'कालपात्र' रखा गया था। इसे 1000 साल बाद खोलने की योजना थी।



इसमें संविधान की प्रति और आजादी के आंदोलन से जुड़े दस्तावेज रखे गए थे। लेकिन 1977 में सरकार बदलने के बाद इसे जमीन से निकाल लिया गया। नई सरकार ने इस पर एकतरफा नजरिए का आरोप लगाया था।



क्या है टाइम कैप्सूल

टाइम कैप्सूल एक बंद बॉक्स या कंटेनर होता है। इसमें किसी समय की खास चीजें रखी जाती हैं। इनमें अखबार फोटो दस्तावेज सिक्के या संदेश शामिल हो सकते हैं। इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जाता है।



कई बार इसे जमीन में दबाया जाता है। कई बार किसी इमारत की नींव में रखा जाता है। इसका मकसद आने वाली पीढ़ियों को उस समय की संस्कृति समाज और जीवनशैली समझाना होता है।



दुनिया के कुछ मशहूर टाइम कैप्सूल

अमेरिका का 220 साल पुराना टाइम कैप्सूल 1795 में मैसाचुसेट्स में रखा गया था। इसे 2015 में खोला गया, जिसमें सिक्के और पुराने अखबार मिले। बोस्टन में एक तांबे के शेर की मूर्ति के अंदर भी कैप्सूल छिपा मिला था। इसे 2014 में निकाला गया, जिसमें 1901 के अखबार और तस्वीरें थीं।



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कुछ कैप्सूल अभी तक नहीं खुले हैं। अमेरिका का क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन कैप्सूल सन 8113 में खुलेगा, यानी करीब 6,173 साल बाद।



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