अमेरिका का ग्रीन कार्ड अब क्यों हो रहा महंगा, EB-5 वीजा के लिए लगेंगे 12 करोड़
CHAKRESH | Jul 03, 2026, 12:33 IST
ग्रीन कार्ड की फीस उड़ाएगी धुआं
अमेरिका के DHS ने EB-5 निवेशक वीजा की सीमा 33% बढ़ाकर 14 लाख डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है। जानिए भारतीय H-1B धारकों पर क्या असर होगा और सितंबर 2026 की डेडलाइन क्यों जरूरी है।
समझें क्या है मामला
गरीब और ग्रामीण इलाकों वाली TEA श्रेणी में सीमा आठ लाख डॉलर पर ही टिकी रहेगी। 30 सितंबर 2026 से पहले जो निवेशक आवेदन कर देंगे, उन पर पुरानी शर्तें ही लागू होंगी।
अमेरिका का ग्रीन कार्ड हो रहा है महंगा
अमेरिका में ग्रीन कार्ड होगा महंगा
यह मामला आपसे क्यों जुड़ा है
पहले क्या था
रीजनल सेंटर प्रोग्राम की कानूनी मंजूरी सितंबर 2027 तक है। लेकिन उसके आगे प्रोग्राम चलेगा या नहीं, यह अमेरिकी कांग्रेस के अगले फैसले पर टिका है। यहीं से मामला पलटता है, क्योंकि इसी अनिश्चितता ने ग्रैंडफादरिंग डेडलाइन को इतना अहम बना दिया है।
क्या हुआ और क्यों
यह वैसा ही है जैसे कोई टोल प्लाजा अपनी दरें तो बढ़ाए ही, साथ में हर गाड़ी की जांच भी सख्त कर दे। DHS के मुताबिक यह नई 14 लाख डॉलर की सीमा उन प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी जो किसी ऐसे महानगरीय इलाके में आते हैं जिसे हाई एम्प्लॉयमेंट एरिया माना जाता है।
गोल्डन गेट ग्लोबल की क्रिस्टीना तबाको का कहना है कि यह प्रस्ताव लंबे समय से अटका हुआ कदम है। उनके मुताबिक इसमें भले ही कुछ खास चौंकाने वाला न हो, लेकिन अगर यह लागू हुआ तो रीजनल सेंटर किस तरह के निवेश ऑफर करते हैं, यह बदल सकता है।
कौन-कौन शामिल है
दोनों तरफ की बात
आगे क्या होगा
एक बात जो आप नहीं जानते थे
अब आप क्या करें
- अब आप क्या करें: अगर परिवार में कोई EB-5 पर विचार कर रहा है, तो पहले TEA श्रेणी की योग्यता जरूर चेक करें।
- क्यों अभी: 30 सितंबर 2026 की ग्रैंडफादरिंग डेडलाइन नजदीक आ रही है।
- आगे देखें: 31 अगस्त 2026 को पब्लिक कमेंट पीरियड खत्म होगा, उसके बाद फाइनल नियम आएगा।
FAQ
- EB-5 निवेश सीमा में कितनी बढ़ोतरी प्रस्तावित है?
गैर टारगेटेड इलाकों में निवेश सीमा 10.5 लाख डॉलर से बढ़ाकर 14 लाख डॉलर करने का प्रस्ताव है। यह करीब 33 फीसदी बढ़ोतरी है। TEA और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सीमा 8 लाख डॉलर पर ही रहेगी। - क्या यह नियम सभी भारतीय निवेशकों पर लागू होगा?
नहीं। ज्यादातर भारतीय निवेशक कम सीमा वाली TEA श्रेणी चुनते हैं, इसलिए वे सीधे प्रभावित नहीं होंगे। असर मुख्य रूप से गैर टारगेटेड शहरी प्रोजेक्ट्स चुनने वालों पर पड़ेगा।
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