ATM Cash Shortage: बाजार में बढ़ा कैश, फिर भी क्यों खाली हो रहे हैं एटीएम? जानें वजह
समझें क्या है पूरा मामला
- 29 मई 2026 तक देश में कुल 42.56 लाख करोड़ रुपए का कैश चलन में था।
- यह पिछले साल के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत की एक बड़ी बढ़ोतरी को दर्शाता है।
- इसके बावजूद देश के कई राज्यों में एटीएम मशीनों के खाली होने की खबरें आ रही हैं।
- एटीएम ऑपरेटरों को उनकी जरूरत के हिसाब से सिर्फ 57 प्रतिशत कैश ही मिल पा रहा है।
- आरबीआई गवर्नर ने भरोसा दिया है कि नकदी की किल्लत को जल्द दूर किया जाएगा।
बाजार में रिकॉर्ड नकदी, फिर भी एटीएम क्यों खाली?
पिछले कुछ सालों में हमारे देश में ऑनलाइन पेमेंट का चलन बहुत ज्यादा बढ़ गया है। हर छोटी-बड़ी दुकान पर अब लोग यूपीआई (UPI) के जरिए ही भुगतान करना पसंद करते हैं। इसके बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है।
आरबीआई के अनुसार 29 मई 2026 तक देश के बाजार में 42.56 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कैश मौजूद था। यह नकदी पिछले साल की तुलना में पूरे 12 फीसदी ज्यादा है। इसके बाद भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एटीएम में कैश की कमी क्यों हो रही है?
एटीएम ऑपरेटरों ने बैंकों को लिखी चिट्ठी
एटीएम मशीनों को संभालने वाले ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था कैटमी (CATMi) ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने भारतीय बैंक संघ (IBA) को एक आधिकारिक पत्र लिखकर कड़ी चेतावनी दी है।
चिट्ठी में साफ कहा गया है कि एटीएम में डालने के लिए उपलब्ध कैश में भारी गिरावट आई है। नवंबर 2025 में कैश की आपूर्ति करीब 80 प्रतिशत थी। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि उस समय भी बाजार में 20 फीसदी की कमी चल रही थी।
अप्रैल में केवल 57 फीसदी ही मिल पाया कैश
कैश सप्लाई की यह समस्या समय के साथ और ज्यादा गंभीर होती जा रही है। मार्च 2026 में यह कमी बढ़कर 36 फीसदी तक पहुंच गई थी। इसके बाद अप्रैल के महीने में यह आंकड़ा 43 फीसदी पर आ गया।
आसान शब्दों में समझें तो एटीएम ऑपरेटरों को अप्रैल में उनकी कुल जरूरत का केवल 57 फीसदी कैश मिला। दिसंबर 2025 के बाद से कई राज्यों में बैंकों और करेंसी चेस्ट से कैश मिलने में दिक्कत आ रही है।
एटीएम से कैश गायब होने की वजह?
विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल पेमेंट और यूपीआई का बढ़ना इसका सबसे बड़ा कारण है। लोग अब जेब में कैश रखने के बजाय मोबाइल से पेमेंट करना ज्यादा पसंद करते हैं। इस वजह से एटीएम से पैसे निकालने की आदत कम हुई है।
आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2023 में महीने भर में करीब 57 करोड़ बार एटीएम से पैसे निकाले गए थे। सितंबर 2025 तक यह संख्या घटकर सिर्फ 44 करोड़ रह गई। फ्री लिमिट खत्म होने के बाद लगने वाले अतिरिक्त शुल्क ने भी लोगों को डिजिटल की तरफ मोड़ा है।
एटीएम चलाने का खर्च बढ़ा
बाजार में ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ने से एटीएम को ऑपरेट करने का खर्च काफी बढ़ गया है। इसके अलावा सुरक्षा गार्डों और कर्मचारियों को दी जाने वाली सैलरी में भी इजाफा हुआ है।
जब आप दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालते हैं, तो वह बैंक दूसरे बैंक को इंटरचेंज फीस देता है। इस फीस को 19 रुपए से बढ़ाकर 21 रुपए किया गया था। हालांकि, ऑपरेटरों का कहना है कि बढ़ती लागत के सामने यह 2 रुपए की बढ़ोतरी बहुत कम है।
कैश संकट पर आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा?
इस नकदी संकट के बारे में पूछे जाने पर रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश को भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई हर साल देश की जरूरत के हिसाब से करेंसी का एक पूरा प्लान तैयार करता है।
गवर्नर ने कहा कि बैंकों को उनकी आवश्यकता के अनुसार ही कैश उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने साफ किया कि अगर कहीं भी कैश की कमी पाई जाती है। तो वे तुरंत वहां तेजी से नकदी पहुंचाने का पूरा प्रयास करेंगे।
छोटे व्यापारियों और बुजुर्गों पर पड़ रहा असर
बड़े शहरों में रहने वाले लोग एटीएम खाली होने पर शायद ज्यादा परेशान न हों। उनके पास ऑनलाइन पेमेंट के कई विकल्प मौजूद रहते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में इसका असर काफी गहरा है।
सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ (DBT) पाने वाले लोगों को नकद पैसों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसके अलावा हमारे देश के वरिष्ठ नागरिक और छोटे व्यापारी आज भी अपने दैनिक काम के लिए पूरी तरह कैश पर ही निर्भर हैं।
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