दूल्हे के पिता ने छपवाया अनोखा शादी कार्ड: शराब पीकर न आएं बराती; सोशल मीडिया पर वायरल हुआ

Pawan Modiya | May 12, 2026, 18:56 IST
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बाराबंकी के राजेश रावत ने बेटे सौरभ की शादी के कार्ड पर लिखवाया कि बराती शराब पीकर न आएं। 14 मई को होने वाली इस शादी का संदेश है- बरात में प्रेम लाना, नशा नहीं। यह कदम सोशल मीडिया पर खूब सराहा जा रहा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बाराबंकी के राजेश रावत ने बेटे के शादी कार्ड पर संदेश छपवाया।
  • कार्ड पर लिखा है: शराब पीकर बरात में न आएं।
  • बेटे सौरभ की शादी 14 मई को बस्ती गांव में होनी है।
  • राजेश पहले बेटियों की शादी में भी यही नियम अपना चुके हैं।
  • लोग इस कदम को सामाजिक बदलाव की मिसाल बता रहे हैं।

शादी का कार्ड बना सामाजिक संदेश

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक पिता ने ऐसा काम किया जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है। भेड़हापुर निवासी राजेश रावत ने अपने बेटे सौरभ की शादी के निमंत्रण पत्र (विवाह निमंत्रण पत्र) पर एक खास संदेश छपवाया है। उस संदेश में साफ लिखा है कि यह विवाह सनातन धर्म के पवित्र संस्कारों के अनुसार संपन्न होगा और कोई भी बराती शराब पीकर विवाह समारोह में न जाएं।



यह कोई सरकारी आदेश नहीं है। यह एक पिता की दिल से निकली अपील है। और यही वजह है कि यह संदेश लोगों के दिल को छू रहा है।



Barabnki


क्यों उठाया यह कदम?

राजेश रावत बताते हैं कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कई शादियां देखी हैं। उनमें एक बात बार-बार देखी कि थोड़ी सी शराब कैसे खुशियों को झगड़े में बदल देती है। कहीं रिश्तेदार आपस में उलझ जाते हैं, तो कहीं दोनों परिवारों के बीच कड़वाहट पैदा हो जाती है।



राजेश के अपने शब्दों में कहें तो उनकी चाहत है कि बेटे की बरात में लोग आशीर्वाद लेकर आएं, नशा नहीं। कई बार तो हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि रिश्ते टूटने तक की नौबत आ जाती है। यह सोचकर ही उन्होंने तय किया कि बेटे की शादी में केवल प्रेम, सम्मान और संस्कार शामिल होंगे।



14 मई को है सौरभ की शादी

राजेश के बेटे सौरभ की शादी 14 मई को है। बरात जिले के ही बस्ती गांव जाएगी। पूरा आयोजन सनातन परंपरा के मुताबिक होगा। राजेश का मानना है कि सनातन संस्कृति में नशे को कभी भी अच्छा नहीं माना गया। जब विवाह जैसा पवित्र संस्कार हो, तो नशे की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।



पहले भी अपना चुके हैं यह नियम

राजेश रावत का यह पहला प्रयोग नहीं है। वे बताते हैं कि बेटियों की शादी में भी उन्होंने यही नियम लागू किया था। उस वक्त भी उनकी यह बात खूब सराही गई थी। इस बार फिर उन्होंने वही राह चुनी। उनका कहना है कि अगर एक परिवार यह नियम बना ले तो धीरे-धीरे पूरे समाज में यह संदेश फैल सकता है।



परिवार की इस सोच के पीछे साफ दिखता है कि वे चाहते हैं शादी की यादें खूबसूरत रहें, किसी झगड़े या शर्मिंदगी से धुंधली न पड़ें।



समाज में गूंज रही सराहना

राजेश के इस कदम की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। पड़ोसी हों या रिश्तेदार, सभी इस फैसले को साहसी और जरूरी बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि ऐसे कदम समाज में असली बदलाव लाते हैं। जब बड़े-बड़े सरकारी अभियान भी जागरूकता लाने में जूझते हैं, तब एक सामान्य परिवार का यह निर्णय अलग ही असर छोड़ता है।



शादी का कार्ड सिर्फ तारीख और वेन्यू बताने का जरिया नहीं होता। कभी-कभी वह पूरे परिवार की सोच और संस्कारों की तस्वीर भी होता है। राजेश रावत का यह कार्ड ऐसी ही एक तस्वीर है जो अब सबकी नजरों में है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की कहानी है। शादियों में शराब की वजह से झगड़े और दुर्घटनाएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में एक आम नागरिक का यह कदम सामाजिक जागरूकता की मिसाल है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51-क के तहत प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह सामाजिक बुराइयों को दूर करने का प्रयास करे। राजेश रावत का यह निर्णय उसी भावना को दर्शाता है। डिजिटल दौर में यह खबर इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि ऐसे सकारात्मक संदेश तेजी से वायरल होते हैं और दूसरों को प्रेरित करते हैं। नशामुक्ति के लिए सरकारें करोड़ों रुपए खर्च करती हैं, लेकिन एक व्यक्ति का व्यक्तिगत संकल्प कई बार ज्यादा असरदार साबित होता है।



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