एक करोड़ फॉलोअर्स वाली लूला आर्मी ने कैसे पलटी बाजी? क्या भारत में भी चलेगा व्हाट्सएप आर्मी मॉडल?

CHAKRESH | Oct 28, 2026, 15:37 IST
अदालत, सेंसरशिप विवाद और चौथी बार राष्ट्रपति बने लूला, जानें ब्राजील चुनाव 2026 की पूरी इनसाइड स्टोरी
81 साल के लूला डी सिल्वा ने ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव 2026 में हारी बाजी पलट दी। पहले दौर में वे 23 लाख वोट से पीछे थे। दूसरे दौर में 44 लाख वोट से जीते। इस वापसी के पीछे एक व्हाट्सएप चैनल भी था, नाम था लूला आर्मी। तीन हफ्ते में इसके फॉलोअर्स 53 हजार से 1.08 करोड़ हो गए। आखिर यह हुआ कैसे?

पहले दौर की रात, जब पिछड़ गए लूला

4 अक्टूबर की रात नतीजे आए तो लूला के समर्थक मायूस थे। प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.1% यानी 5.61 करोड़ वोट मिले। लूला 45.2% यानी 5.38 करोड़ वोट पर अटक गए। फ्लावियो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। मगर इसके बाद चुनावी राजनीति का पूरा खेल ही पलट गया।



ब्राजील चुनाव 2026

लूला ने हार के बाद क्या कहा

आंद्रे जानोनेस ने खड़ी की डिजिटल फौज

लूला के समर्थक सांसद आंद्रे जानोनेस ने लूला व्हाट्सएप चैनल को चुनावी हथियार बनाया। जानोनेस की मां दूसरों के घरों में बर्तन साफ करती थीं। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए वे खुद बस में कंडक्टरी करते थे। अब यही नेता करोड़ों लोगों की डिजिटल फौज चला रहा था।



जानोनेस चैनल के फॉलोअर्स को "सैनिक" कहते थे। पहला मिशन था कि हर सदस्य चार नए लोग जोड़े। दूसरा काम था चैनल का कंटेंट दूसरे ग्रुप और सोशल मीडिया पर फैलाना।



ब्राजील चुनाव 2026

ऐसे दिए जाते थे सैनिकों को मिशन

जानोनेस ने वीडियो बनाकर सिखाया कि कंटेंट कैसे फैलाना है। 20 अक्टूबर को उन्होंने नई पोस्ट रोक दीं। शर्त रखी कि पहले 60 लाख फॉलोअर्स पूरे हों। युवा वोटर्स को जोड़ने के लिए गायक जाओ जैसे कलाकार लाइव में आए। यह WhatsApp election campaign का बिल्कुल नया मॉडल था।



मोबाइल से दूरी रखने वाले लूला भी इस मुहिम में उतरे। 21 अक्टूबर को उन्होंने जानोनेस से फोन तोहफे में लिया। फिर समर्थकों से चैनल से जुड़ने की अपील की। 23 अक्टूबर को चैनल एक करोड़ पार कर गया। यह नेटफ्लिक्स ब्राजील के चैनल से भी बड़ा हो गया।



अदालत तक पहुंचा लूला चैनल

फ्लावियो की शिकायत पर 11 अक्टूबर को चैनल बंद करने का आदेश आया। यह आदेश टीएसई (TSE - Tribunal Superior Eleitoral) के अध्यक्ष नूनेस मार्केस ने दिया। उनके मुताबिक चैनल लाखों लोगों तक भ्रामक कंटेंट भेज रहा था। उसी दिन दूसरे जज ने चैनल बहाल कर दिया। फिर कैंपेन ने इसे आधिकारिक माध्यम के रूप में रजिस्टर कराया।



आंद्रे जानोनेस बोले, सेंसरशिप हुई

लूला का ब्राजील: प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन

लूला चौथी बार राष्ट्रपति बने

25 अक्टूबर को दूसरे दौर की वोटिंग हुई। इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई। लूला को 51.8% यानी 6.42 करोड़ वोट मिले। उनके 1.04 करोड़ वोट बढ़े। फ्लावियो 48.2% यानी 5.98 करोड़ पर रुक गए। उनके सिर्फ 37 लाख वोट बढ़े। यही Brazil election 2026 result की असली कहानी है।



पहले दौर में छोटे उम्मीदवारों को 93 लाख वोट मिले थे। दूसरे दौर में इनका बड़ा हिस्सा लूला के पास चला गया। वोट न डालने वालों का हिस्सा 21.1% से घटकर 19.2% रह गया। यानी करीब 30 लाख ज्यादा लोग वोट देने निकले।



मिनास जेराइस ने तय की लूला की जीत

मिनास जेराइस में पहले दौर में बोल्सोनारो आगे थे। दूसरे दौर में लूला ने यहां 50.4% वोट लिए। इस राज्य के 76 नगर पलट गए। ब्राजील में माना जाता है कि यहां जीतने वाला ही राष्ट्रपति बनता है। पूरे देश में 18 राज्यों के 213 नगर लूला के पाले में आए।



यही Lula wins Brazil election की सबसे बड़ी खबर बनी। लूला 2002, 2006 और 2022 में भी जीत चुके हैं। इस तरह Lula fourth term पक्का हुआ।



भारत में डिजिटल प्रचार का भविष्य

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में भी व्हाट्सएप चुनाव प्रचार ऐसा असर दिखा सकता है? जमीन तो पूरी तैयार है। 2021 के सरकारी आंकड़ों में देश में व्हाट्सएप के 53 करोड़ यूजर थे। चुनावी मैसेज यहां पहले से ग्रुप के जरिए फैलते रहे हैं।



अगला कदम लूला आर्मी जैसा संगठित चैनल हो सकता है। ऐसा मॉडल युवा और पहली बार के वोटर्स को सबसे तेजी से जोड़ता है। लेकिन भारत में नियम भी सख्त हैं। सोशल मीडिया के राजनीतिक विज्ञापन को पहले मंजूरी लेनी होती है। यह मंजूरी चुनाव आयोग की कमेटी देती है। उम्मीदवार को सोशल मीडिया खर्च भी अपने चुनावी खर्च में दिखाना होता है।



लोकसभा चुनाव 2014 (भाजपा, नरेंद्र मोदी)



भारत का पहला बड़ा "डिजिटल चुनाव" माना जाता है। अप्रैल-मई 2014 में मोदी की 3D होलोग्राम रैलियां एक साथ कई जगह हुईं। Mission272.com और India272.com से लोगों के सुझाव लेकर भाषणों में जोड़े गए। #AbkiBaarModiSarkaar जैसे हैशटैग चले। भाजपा का डिजिटल प्रचार कांग्रेस से काफी आगे था।



लोकसभा चुनाव 2019 (व्हाट्सएप चुनाव)



इसे "व्हाट्सएप चुनाव" कहा गया। तब देश में व्हाट्सएप के 20 करोड़ से ज्यादा यूजर थे। भाजपा के 9 लाख से ज्यादा "सेल फोन प्रमुख" मोहल्ला स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप चला रहे थे। कांग्रेस ने "डिजिटल साथी" ऐप उतारा। ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट की स्टडी में 116 पब्लिक व्हाट्सएप ग्रुप की 32,292 इमेज जांची गईं। इनमें बड़ी हिस्सेदारी बांटने वाले और साजिश वाले कंटेंट की मिली।



दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 (आम आदमी पार्टी)



आप ने जमीन और सोशल मीडिया, दोनों मोर्चों पर युवा वोटर्स को टारगेट किया। व्हाट्सएप, टिकटॉक, शेयरचैट और ट्विटर पर व्यंग्य वाले वीडियो चलाए गए। आप ने 70 में से 62 सीटें जीतीं। ध्यान रहे, इसका आकलन मुख्य रूप से कैंपेन एजेंसी के अपने दावे पर आधारित है।



बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (कोविड काल, वर्चुअल रैली)



7 जून 2020 को अमित शाह ने "बिहार जन संवाद" वर्चुअल रैली की, जिसे उन्होंने देश की पहली वर्चुअल रैली बताया। कारवां पत्रिका के मुताबिक करीब 10 हजार LED स्क्रीन और 50 हजार से ज्यादा स्मार्ट टीवी लगाए गए। भाजपा ने एक लाख से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का दावा किया। उस वक्त कांग्रेस के करीब 3,800 ग्रुप थे।



राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 (व्हाट्सएप नेटवर्क)



न्यूजलॉन्ड्री के मुताबिक राजस्थान भाजपा ने 38 हजार व्हाट्सएप ग्रुप चलाने का दावा किया। जयपुर में एक "व्हाट्सएप चैंबर" से 44 संगठनात्मक जिलों में कंटेंट भेजा जाता था। 30 दिनों में भाजपा ने फेसबुक-इंस्टाग्राम विज्ञापन पर 45 लाख रुपए खर्च किए। ये आंकड़े पार्टी के दावे हैं, स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।



लोकसभा चुनाव 2024 (डिजिटल विज्ञापन और AI)



बूम के मुताबिक मई 2024 में भाजपा ने मेटा पर 17 करोड़ और गूगल पर 56 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए। यह करीब 73 करोड़ रुपए बनता है। कांग्रेस ने गूगल पर 18 करोड़ और मेटा पर 4.2 करोड़ रुपए खर्च किए। इसी चुनाव में AI और डीपफेक कंटेंट भी बड़े पैमाने पर दिखा।



तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 (TVK, विजय, इंस्टाग्राम)



TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतीं और विजय मुख्यमंत्री बने। 18 मई 2026 को एमके स्टालिन ने खुद माना कि सोशल मीडिया और बच्चों ने TVK की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। उनके मुताबिक इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों के कैंपेन का माताओं और दादी-नानी पर गहरा असर पड़ा। डीएमके इसका अंदाजा नहीं लगा पाई।



ब्राजीली फुटबॉलर आंद्रे के फैक्ट्स

डीपफेक और फर्जी खबर बड़ी चुनौती

2024 में चुनाव आयोग ने डीपफेक पर पार्टियों को सख्त निर्देश दिए। ऐसा कंटेंट तीन घंटे में हटाने को कहा गया। एक क्लिक में करोड़ों तक पहुंचने वाला चैनल फायदा भी है, खतरा भी। ब्राजील का केस दिखाता है कि ऐसे चैनल अदालत तक पहुंच सकते हैं। भारत में भविष्य उसी का होगा, जो रफ्तार के साथ पारदर्शिता भी रखेगा।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर बताती है कि चुनाव अब सिर्फ रैलियों से नहीं, मोबाइल से भी जीते जा रहे हैं। एक चैनल ने तीन हफ्ते में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को जोड़ा। भारत में व्हाट्सएप करोड़ों लोगों का रोज का माध्यम है। इसलिए यहां भी ऐसा मॉडल आना तय माना जा सकता है। लेकिन स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद है। वोटर का सूचित फैसला ही असली ताकत है। इसलिए हर मैसेज को परखकर ही आगे बढ़ाना नागरिक की जिम्मेदारी है।



FAQs:



  1. ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव 2026 में लूला कितने वोट से जीते?
    लूला करीब 44 लाख वोट से जीते। उन्हें 51.8% यानी 6.42 करोड़ वोट मिले। फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.2% वोट मिले।
  2. लूला आर्मी चैनल कितना बड़ा हुआ?
    यह चैनल 53 हजार से 1.08 करोड़ फॉलोअर्स तक पहुंचा। इसे सांसद आंद्रे जानोनेस चलाते हैं। यह नेटफ्लिक्स ब्राजील के चैनल से भी बड़ा हो गया।
  3. क्या भारत में व्हाट्सएप चुनाव प्रचार पर नियम हैं?
    हां, भारत में सोशल मीडिया प्रचार पर चुनाव आयोग के नियम लागू होते हैं। इसके लिए राजनीतिक विज्ञापन को पहले मंजूरी लेनी होती है। उम्मीदवार को सोशल मीडिया खर्च का हिसाब भी देना होता है।
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