सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग, दिल्ली में होगी मोदी से मुलाकात

Manya Jain | Sept 11, 2026, 15:38 IST
brics summit 2026 delhi explained
दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां ब्रिक्स सम्मेलन शुरू हुआ है। 7 साल बाद आए जिनपिंग की मौजूदगी खास है। इससे व्यापार, पेट्रोल दाम और भारत-चीन रिश्तों पर असर पड़ेगा।

समझें क्या है मामला

  • आज से भारत मंडपम में दुनिया की नजरें टिकी हैं।
  • BRICS का 18वां शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में हो रहा है।
  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी इसे खास बना रही है।
  • सात साल में यह उनकी पहली भारत यात्रा है।
  • भारत चौथी बार इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है।

यह आपसे क्यों जुड़ा है

सोचिए एक बार, दुनिया की करीब आधी आबादी एक मंच पर बैठकर व्यापार और मुद्रा की दिशा तय कर रही है। इसका सीधा असर पेट्रोल के दाम, रुपए की कीमत और भारत में आने वाले निवेश पर पड़ता है। भारत और चीन के रिश्ते सुधरते हैं तो सीमा पर तनाव कम होता है। यह बात हर उस भारतीय से जुड़ी है जो सीमा पर शांति चाहता है।



पहले क्या था

BRICS शब्द सबसे पहले 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने गढ़ा था। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को मिलाकर यह नाम दिया था। रूस ने 2009 में पहला औपचारिक सम्मेलन बुलाया। अगले साल दक्षिण अफ्रीका भी इसमें जुड़ गया।



तब से यह गुट लगातार बढ़ता रहा है। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई को न्योता मिला। अर्जेंटीना ने जुड़ने से मना कर दिया था। 2025 में इंडोनेशिया भी इसका हिस्सा बना। आज BRICS 11 पूर्ण सदस्यों का समूह है।



क्या हुआ और क्यों

BRICS की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसका कोई चार्टर नहीं है। कोई संधि नहीं। कोई स्थायी दफ्तर तक नहीं। यह सिर्फ सहमति पर चलने वाला एक क्लब है, जिसमें हर साल एक देश अध्यक्षता संभालता है। लेकिन सवाल यह है, इतना ढीला-ढाला ढांचा होकर भी यह इतना ताकतवर कैसे बन गया?



जवाब है संख्या में। सरकारी आंकड़ों के अनुसार BRICS देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में यह हिस्सेदारी 45% से 49% के बीच बताई जाती है, क्योंकि गणना में साझेदार देशों को शामिल करने या न करने से फर्क पड़ता है (यह अंतर अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है)। परचेजिंग पावर पैरिटी के आधार पर वैश्विक जीडीपी में BRICS की हिस्सेदारी करीब 40% आंकी जाती है।



यह समझने के लिए एक उदाहरण लीजिए। अगर दुनिया एक क्लासरूम होती, तो हर दूसरा बच्चा BRICS देश का निवासी होता। इतनी बड़ी ताकत को नजरअंदाज करना पश्चिमी देशों के लिए अब मुश्किल हो गया है।



BRICS का असली मकसद शुरू से साफ रहा है। विश्व बैंक और IMF जैसी पश्चिमी संस्थाओं का विकल्प खड़ा करना। इसीलिए न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी NDB बनाया गया। इस बैंक ने अब तक करीब 139 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिनकी कुल राशि लगभग 42.9 अरब डॉलर है। फिर भी यह विश्व बैंक के मुकाबले काफी छोटा खिलाड़ी है।



और यही वो जगह है जहां चीजें इंटरेस्टिंग होती हैं। BRICS देश आपसी व्यापार में डॉलर पर निर्भरता घटाना चाहते हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला एक साझा करेंसी की वकालत करते आए हैं। लेकिन जानकार कहते हैं यह फिलहाल दूर की कौड़ी है। डॉलर अब भी वैश्विक व्यापार के 80% से ज्यादा हिस्से में इस्तेमाल होता है।



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस विचार से सबसे ज्यादा नाराज हैं। उन्होंने धमकी दी है कि अगर BRICS देशों ने डॉलर को कमजोर करने की कोशिश की, तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा।



लेकिन गुट के भीतर भी सब ठीक नहीं है। भारत-चीन सीमा विवाद और ग्लोबल साउथ के नेतृत्व की होड़ लंबे समय से तनाव की वजह रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी दरार गहरी की। पुतिन पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का गिरफ्तारी वारंट है, जिसकी वजह से वे 2023 के दक्षिण अफ्रीका समिट में शारीरिक रूप से शामिल नहीं हो पाए थे।



कौन कौन शामिल है

आज BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। भारत हमेशा इस समूह के भीतर सबसे सतर्क आवाज रहा है। चीन और रूस विस्तार के पक्षधर रहे हैं, जबकि भारत को डर रहा है कि ज्यादा सदस्य जोड़ने से बीजिंग का प्रभाव और बढ़ेगा। अमेरिका इस पूरे गुट को शक की नजर से देखता है।



दोनों साइड की बात

BRICS समर्थक इसे ग्लोबल साउथ की आवाज मानते हैं, जो पश्चिमी संस्थाओं में लंबे समय से नजरअंदाज होती रही है। उनका तर्क है कि जब आधी दुनिया की आबादी और चालीस फीसदी अर्थव्यवस्था एक साथ खड़ी हो, तो उसे मंच मिलना ही चाहिए।



दूसरी तरफ आलोचक कहते हैं कि यह सिर्फ एक ढीला-ढाला फोटो-ऑप गुट है। उनका कहना है कि जब तक सदस्य देशों के बीच सीमा विवाद, धार्मिक टकराव और आर्थिक असमानता बनी रहेगी, तब तक कोई ठोस साझा नीति बनना मुश्किल है। यूरोप के कुछ नीति-निर्माताओं ने भी चेतावनी दी है कि पश्चिम-विरोधी भावना अब पहले से तीखी हो रही है।



आगे क्या होगा

दिल्ली समिट की थीम है बिल्डिंग फॉर रेजिलियंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान 25 से ज्यादा शहरों में करीब 350 बैठकें पहले ही करवाईं। समिट का सबसे बड़ा सवाल है, क्या मोदी और शी की द्विपक्षीय मुलाकात होगी।



चीन के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि कर दी है कि शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में मौजूद रहेंगे। यह उनकी सात साल में पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे 2019 में मामल्लपुरम आए थे। रिपोर्टों के मुताबिक शी के साथ करीब 400 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल आ रहा है, जो 2019 के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।



और यही वो पल है जब भारत-चीन रिश्तों में एक नया अध्याय खुल सकता है।



एक बात जो आप नहीं जानते थे

बहुत कम लोग जानते हैं कि चीन तकनीकी रूप से एक विकसित अर्थव्यवस्था मानी जाती है, फिर भी वह इस विकासशील देशों के समूह का सबसे बड़ा सदस्य है। ऐसा इसलिए क्योंकि BRICS की सदस्यता किसी आर्थिक वर्गीकरण पर नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी और पश्चिमी संस्थाओं के विकल्प खड़ा करने की सोच पर टिकी है।



अब आप क्या करें

अब आप क्या करें: दिल्ली समिट की आधिकारिक घोषणाओं और न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन पर नजर रखें



क्यों अभी: मोदी-शी मुलाकात होती है तो सीमा नीति में बदलाव की शुरुआत हो सकती है।



आगे देखें: 13 सितंबर को समिट के समापन पर जारी होने वाली संयुक्त घोषणा।



यह खबर क्यों जरूरी है

BRICS जैसे वैश्विक मंच पर भारत की भागीदारी सीधे उसकी विदेश नीति, सीमा सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ी है। संविधान के तहत विदेश नीति केंद्र सरकार का विषय है, इसलिए नागरिकों को इसकी पारदर्शी जानकारी पाने का अधिकार है।



डिजिटल युग में गलत आंकड़े तेजी से फैलते हैं, इसलिए तथ्यों की सटीक और संतुलित प्रस्तुति सामाजिक नैतिकता की दृष्टि से भी जरूरी हो जाती है।



FAQ

  1. BRICS में कौन कौन देश शामिल हैं
    BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। यह 11 पूर्ण सदस्यों का समूह है।
  2. BRICS समिट 2026 दिल्ली में कब हो रहा है
    18वां BRICS समिट 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है। भारत इस बार चौथी बार अध्यक्षता कर रहा है।
  3. क्या शी जिनपिंग BRICS समिट में दिल्ली आएंगे
    हां, चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को दिल्ली आएंगे। यह सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी।

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