CDSCO के क्वालिटी टेस्ट में 168 दवाएं फेल, खांसी-बुखार और हार्ट की मेडिसिन भी शामिल

Aman Vaishnav | Apr 22, 2026, 11:51 IST
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CDSCO ने मार्च 2026 में 168 दवाओं को घटिया क्वालिटी वाला पाया है। इस जांच में एक दवा नकली भी निकली है। ये जांच केंद्रीय और राज्य लैब्स में जांच हुई है।

News In Short

  • CDSCO ने मार्च 2026 में 168 दवाओं की जांच की है।
  • इन दवाओं को NSQ (Not of Standard Quality) यानी घटिया गुणवत्ता वाला पाया गया है।
  • बिहार में बनी एक दवा पूरी तरह नकली निकली है जो किसी और कंपनी के नाम पर बनाई गई थी।
  • हार्ट, अस्थमा, बीपी, शुगर और सांस जैसी आम बीमारियों की दवाएं भी फेल हुई हैं।
  • संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी हुए और बाजार से स्टॉक वापस मंगाने के आदेश दिए गए हैं।

मार्च में 168 दवाएं फेल

देश में दवाओं की क्वालिटी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO ने मार्च 2026 की अपनी नियमित जांच में 168 दवाओं को घटिया पाया है। हैरानी की बात है कि इनमें से एक दवा को पूरी तरह नकली भी घोषित किया गया है।



यह जांच हर महीने होती है। इसका मकसद बाजार में बिक रही दवाओं की क्वालिटी और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। CDSCO ने जो ड्रग अलर्ट जारी किया है उसमें इन सभी दवाओं की जानकारी दी गई है।



केंद्रीय और राज्य लैब्स में फेल हुए सैंपल

CDSCO (Central Drugs Standard Control Organisation) के जारी आंकड़ों के अनुसार केंद्रीय लैब्स में 48 दवा सैंपल क्वालिटी मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। वहीं राज्य स्तरीय ड्रग टेस्टिंग लैब्स में 120 और सैंपल फेल पाए गए हैं।



बिहार का एक मामला खासतौर पर गंभीर है। वहां मिली एक दवा बिल्कुल नकली पाई गई है। उसे किसी दूसरी कंपनी के ब्रांड नाम का इस्तेमाल करके एक अनधिकृत इकाई ने बनाया गया था।



ड्रग कंट्रोलर ने मंगलवार 21 अप्रैल को बताया कि मामले की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत जरूरी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। साथ ही बाजार से स्टॉक वापस मंगाने के आदेश दिए गए हैं।



क्या होता है NSQ?

NSQ यानी Not of Standard Quality का मतलब है कि दवा जो मानक तय किए गए हैं, उन पर पूरी नहीं उतर पाई है। इसका मतलब है कि दवा की गुणवत्ता में कुछ कमी है। जैसे उसकी घुलनशीलता, सही मात्रा या समानता ठीक से नहीं है।



यह जरूरी नहीं कि उस कंपनी की सभी दवाएं खराब हों। कई बार यह समस्या किसी एक खास बैच तक सीमित होती है, लेकिन ऐसी दवाएं मरीज को सही फायदा नहीं दे पाती हैं। इससे इलाज प्रभावित हो सकता है।



हिमाचल प्रदेश की 46 दवाएं भी लिस्ट में

फेल हुई दवाओं में 46 दवाएं हिमाचल प्रदेश में बनी हैं। ये दवाएं बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, कालाअंब, ऊना और सोलन जैसे फार्मा हब में तैयार की गई थीं। यह इलाके देश के सबसे बड़े दवा उत्पादन केंद्रों में से एक हैं।



तीन महीने में 576 दवाएं फेल

साल 2026 की पहली तिमाही के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जनवरी में 214 दवाएं फेल हुईं। फरवरी में यह संख्या 194 रही। मार्च में 168 दवाएं घटिया पाई गईं।



इस तरह तीन महीनों में कुल 576 दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल हो चुकी हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि नियामक संस्था निगरानी को लगातार और सख्त बना रही है।



आम बीमारियों की दवाएं भी शामिल

इस बार फेल हुई दवाओं की सूची में वे दवाएं भी हैं जो रोजमर्रा के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं।



Clopidogrel टैबलेट हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे वाले मरीजों को दी जाती है। यह खून के थक्के बनने से रोकती है। इसका घटिया निकलना सीधे मरीज की जान के लिए खतरनाक हो सकता है।



Terbutaline अस्थमा और COPD यानी सांस की पुरानी बीमारी में दी जाती है। यह दवा एयरवे की मांसपेशियों को आराम देती है। यह सही तरह काम न करे तो मरीज को सांस लेने में तकलीफ बढ़ सकती है।



Ambroxol और Bromhexine बलगम को पतला करने में मदद करती हैं। इन्हें मौसमी बुखार, सर्दी-जुकाम और सांस की पुरानी बीमारियों में खूब दिया जाता है। इन दवाओं का भी कई सैंपल फेल पाया गया है।



इलाज पर क्या असर पड़ता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक घटिया क्वालिटी की दवाएं इलाज के असर को कमजोर कर देती हैं। मरीज दवा लेता रहता है, लेकिन फायदा नहीं होता है। कुछ मामलों में स्थिति और बिगड़ सकती है।



खासतौर पर हार्ट और सांस के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक है। ऐसे मरीजों को सही दवा सही मात्रा में मिलना बेहद जरूरी होता है। दवा का सबस्टैंडर्ड होना उनके लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।



क्या करें आम मरीज?

अगर आप भी ऊपर बताई दवाओं में से कोई दवा ले रहे हैं तो घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क जरूर रहें। दवा का बैच नंबर जांचें और अपने डॉक्टर से बात करें। किसी भरोसेमंद मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें। CDSCO की वेबसाइट पर फेल दवाओं की पूरी सूची देखी जा सकती है।



CDSCO की यह सख्ती जरूरी है। इससे नकली और घटिया दवा बनाने वालों पर लगाम लगेगी। साथ ही आम मरीज को भरोसेमंद और असरदार दवा मिल सकेगी।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सीधे आम नागरिक की सेहत और जान से जुड़ी है। जब बाजार में घटिया या नकली दवाएं बिकती हैं, तो मरीज को सही इलाज नहीं मिलता। खासतौर पर हार्ट, अस्थमा और सांस के मरीजों के लिए यह खतरा बहुत ज्यादा है।



ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत घटिया और नकली दवाएं बनाना और बेचना कानूनी अपराध है। डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के नजरिए से यह जरूरी है कि लोग ऐसी जानकारी तक पहुंच सकें।



CDSCO की यह पारदर्शी कार्रवाई नागरिकों का भरोसा बनाती है और फार्मा कंपनियों को जवाबदेह बनाती है।



FAQ

  1. CDSCO की घटिया दवाओं की लिस्ट में आई दवा खाना बंद करें या नहीं?
    अगर आप कोई ऐसी दवा ले रहे हैं जो CDSCO की NSQ लिस्ट में है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। खुद से दवा बंद न करें, खासतौर पर हार्ट या सांस की दवाएं। डॉक्टर आपको उसी काम की कोई दूसरी सुरक्षित दवा दे सकते हैं। CDSCO की वेबसाइट पर जाकर फेल दवाओं की पूरी सूची, उनके बैच नंबर और कंपनी का नाम चेक करें।
  2. NSQ दवा और नकली दवा में क्या फर्क होता है?
    NSQ यानी Not of Standard Quality दवा वह होती है जो किसी मान्यता प्राप्त कंपनी ने बनाई हो लेकिन गुणवत्ता मानकों पर खरी न उतरी हो। जैसे दवा में सक्रिय तत्व की मात्रा कम हो या वह सही तरह घुलती न हो। नकली दवा वह होती है जो किसी अनधिकृत जगह पर बनाई गई हो और किसी दूसरी कंपनी का नाम या लेबल चुराकर बेची जाए। दोनों ही मरीज के लिए खतरनाक हैं, लेकिन नकली दवा कानूनी रूप से ज्यादा गंभीर अपराध है।
  3. मार्च 2026 में कौन सी आम दवाएं CDSCO की फेल लिस्ट में आई हैं?
    मार्च 2026 में CDSCO की जांच में फेल हुई दवाओं में Clopidogrel (हार्ट के मरीजों के लिए), Terbutaline (अस्थमा और COPD के लिए), Ambroxol और Bromhexine (बलगम की दवा) शामिल हैं। इसके अलावा बीपी, शुगर, अल्सर, संक्रामक बीमारियों, कैंसर और हार्ट रोग जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं भी इस सूची में हैं। पूरी सूची CDSCO की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

सोर्स: CDSCO Drug Alert March 2026: cdsco.gov.in



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