AI पर CJI सूर्यकांत बोले- फैसले इंसान ही सुनाएं, AI को केवल सहायता करने का काम देना चाहिए।

Jitendra Shrivastava | Mar 22, 2026, 23:17 IST
Photograph: (THESOOTR)
CJI सूर्यकांत ने AI के ज्यूडिशियरी में उपयोग पर अपने विचार साझा किए, कहा कि AI फैसले नहीं करेगा, बल्कि डेटा प्रोसेसिंग और देरी कम करने में मदद करेगा।

सीजेआई सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज्यूडिशियरी में उपयोग को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि AI ज्यूडिशियरी को मजबूत कर सकता है, लेकिन फैसले सुनाने का काम इंसान के हाथों में ही रहना चाहिए।



AI को सिर्फ डेटा प्रोसेसिंग और सिस्टम की देरी को कम करने में मदद करनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए सरकारी वकीलों में 50% महिलाओं को शामिल करने की सिफारिश की।



AI का ज्यूडिशियरी में उपयोग

भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज्यूडिशियरी में उपयोग के बारे में अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि AI का उपयोग न्यायपालिका को मजबूत करने में किया जा सकता है, लेकिन यह न्यायिक निर्णयों को प्रभावित नहीं करेगा। CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि AI को केवल डेटा प्रोसेसिंग और पैटर्न पहचानने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि फैसले सुनाने के लिए।



AI का रोल: केवल सहायता प्रदान करना

CJI सूर्यकांत का मानना है कि AI का रोल ज्यूडिशियरी की प्रक्रियाओं को तेज़ और सुविधाजनक बनाने में होना चाहिए। AI को ज्यूडिशियरी में फैसले लेने की जगह सिर्फ एक टूल के रूप में काम करना चाहिए, जिससे डेटा का प्रबंधन और देरी कम हो सके। फैसले इंसान की बुद्धि और तर्कशक्ति पर आधारित होने चाहिए, और AI को इसमें दखल नहीं देना चाहिए।



कर्नाटक ज्यूडिशियल एकेडमी से CJI का बयान

CJI सूर्यकांत कर्नाटक ज्यूडिशियल एकेडमी में "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - विवादों की रोकथाम और समाधान" विषय पर एक सेमिनार के मुख्य वक्ता थे। इस सेमिनार में उन्होंने AI के ज्यूडिशियरी में योगदान को लेकर अपनी बात रखी। उनका मानना था कि AI का उद्देश्य केवल ज्यूडिशियरी की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना है, न कि फैसले लेने की क्षमता को प्रभावित करना।



लैंगिक समानता पर CJI सूर्यकांत का सुझाव

CJI सूर्यकांत ने कानून और न्यायिक क्षेत्र में लैंगिक समानता पर भी विचार साझा किए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी वकीलों और मुफ्त कानूनी सहायता पैनल में महिलाओं की भागीदारी कम से कम 50% होनी चाहिए। उनका मानना था कि इस कदम से न्यायिक क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।



हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कानून के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद, करियर के अगले फेज में उनकी भागीदारी घट जाती है, और इसके पीछे कई समस्याएं हैं।



AI के टूल के रूप में उपयोग की आवश्यकता

CJI सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि AI का मुख्य काम ज्यूडिशियरी में काम की गति को तेज़ करना और डेटा का सही तरीके से प्रबंधन करना होना चाहिए। फैसले इंसानों के द्वारा ही लिए जाने चाहिए। AI को ज्यूडिशियरी में फैसला लेने की प्रक्रिया में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।



नियुक्ति मामले से खुद को अलग किया

CJI सूर्यकांत ने चुनाव आयोग की नियुक्ति कानून से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनका हितों का टकराव हो सकता है, इसलिए यह उचित है कि वे इस मामले से खुद को अलग करें। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले को ऐसी बेंच को सौंपा जाए जिसमें कोई भी जज भविष्य में चीफ जस्टिस बनने की कतार में न हो।



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