CJI सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं को बताया कॉकरोच, कहा, सिस्टम पर हमला करने वाले परजीवी

Jitendra Shrivastava | May 15, 2026, 22:54 IST
Photograph: (THESOOTR)
NEW DELHI. CJI सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच कहा। सीनियर एडवोकेट याचिका पर वकील को फटकार मिली। वकीलों की डिग्री CBI जाँच का संकेत दिया।

समझें पूरा मामला...

  • CJI ने बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच कहा।
  • सीनियर एडवोकेट याचिका पर वकील फटकारा।
  • RTI एक्टिविस्ट को परजीवी बताया गया।
  • वकीलों की डिग्री CBI जांच का संकेत दिया।
  • याचिकाकर्ता ने माफी मांगकर याचिका वापस ली।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में शुक्रवार को एक विवादित टिप्पणी सामने आई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने एक वकील की सीनियर एडवोकेट (Senior Advocate) बनने की याचिका पर सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं (unemployed youth) को कॉकरोच कहा। उन्होंने RTI एक्टिविस्ट और सोशल मीडिया (social media) को भी निशाने पर लिया। यह टिप्पणी चारों तरफ चर्चा का विषय बन गई।



CJI ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में शुक्रवार को एक बड़ा विवाद हुआ। चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने एक सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं।



ये युवा बाद में मीडिया, सोशल मीडिया (social media) या RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं। फिर वे सिस्टम पर हमला करने लगते हैं। यह टिप्पणी उन्होंने एक वकील की याचिका की सुनवाई के दौरान की। इस बयान ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है।



किस मामले में हुई सुनवाई

यह सुनवाई एक वकील की याचिका पर हो रही थी। उस वकील ने सीनियर एडवोकेट (Senior Advocate) का दर्जा पाने की मांग की थी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस याचिका को सुना।



बेंच ने याचिकाकर्ता वकील को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि समाज में पहले से ही परजीवी (parasite) मौजूद हैं। ये परजीवी सिस्टम पर हमला करते हैं। कोर्ट ने इसी संदर्भ में बेरोजगार युवाओं की कड़ी आलोचना की।



वकील को क्यों मिली फटकार

बेंच ने साफ कहा कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया जाता है। इसे खुद से मांगकर हासिल नहीं किया जाता। कोर्ट ने कहा कि दुनिया में हर कोई सीनियर बनने के योग्य हो सकता है। लेकिन यह वकील इसके हकदार नहीं हैं।



बेंच ने यह भी कहा कि अगर दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें सीनियर एडवोकेट बना भी दिया। तो सुप्रीम कोर्ट उनके व्यवहार को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर देगा। कोर्ट ने पूछा कि क्या यह सही व्यवहार है।



CBI जांच का संकेत

कोर्ट ने एक और बड़ी बात कही। बेंच ने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट CBI (Central Bureau of Investigation) से कई वकीलों की डिग्री की जांच करा सकता है। उनकी डिग्री की सत्यता पर गंभीर सवाल हैं।



कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council of India) पर भी निशाना साधा। कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल इस पर कुछ नहीं करेगा। क्योंकि उन्हें वकीलों के वोट चाहिए। यह टिप्पणी कानूनी जगत में हलचल मचाने वाली रही।



वकील ने मांगी माफी

सुनवाई के अंत में याचिकाकर्ता वकील ने कोर्ट से माफी मांगी। उन्होंने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।



इस पूरे प्रकरण ने न्यायपालिका और मीडिया में बड़ी बहस खड़ी कर दी है। बेरोजगार युवाओं के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।



RTI और मीडिया पर निशाना

CJI सूर्यकांत का विवादित बयान केवल युवाओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने RTI एक्टिविस्ट (RTI activists) और मीडिया को भी इसी श्रेणी में रखा। उनका कहना था कि बेरोजगार युवा बाद में इन्हीं माध्यमों से सिस्टम पर हमला करते हैं। इस बयान से RTI कार्यकर्ताओं और पत्रकारों में नाराज़गी देखी जा रही है। कई लोगों ने इस टिप्पणी को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है।



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