जंतर-मंतर से कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन खत्म, CJP की सभी मांगें मंजूर

Sandeep Kumar | Jul 25, 2026, 19:46 IST
जंतर-मंतर से कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन खत्म
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा CJP का आंदोलन खत्म हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने 34 दिन बाद प्रदर्शन समाप्त करने का ऐलान किया। संगठन ने कहा है कि सरकार ने उनकी सभी मांगें मान ली हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन खत्म हो गया।
  • प्रदर्शन 34 दिनों बाद समाप्त हुआ।
  • CJP ने तीनों मांगें पूरी होने का दावा किया।
  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ऐलान हुआ।
  • संगठन ने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने को कहा।

आंदोलन खत्म करने का ऐलान

कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को अपना आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया। दरअसल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही CJP की तीनों मांगें सरकार ने मान लीं है।



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34 दिन बाद खत्म हुआ आंदोलन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले करीब एक महीने से जारी कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन शनिवार को खत्म हो गया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ मिलकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। सौरभ दास ने सभी प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर छोड़कर घर लौटने की अपील की।



तीनों मांगें मानी गईं

रांका ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में सरकार से तीन बार बातचीत हुई। इसके बाद पार्टी की तीनों मांगें मान ली गईं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। दूसरी मांग प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी केस वापस लेने की थी। तीसरी मांग नीट पीड़ितों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की थी।



इस्तीफे की खबर से जश्न

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न शुरू हो गया। छात्रों ने छात्र एकता जिंदाबाद के नारे लगाए और राष्ट्रगान गाया। इसी दौरान नीट पेपर लीक मामले में जान गंवाने वाले छात्रों के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस्तीफे पर कहा कि लोकतंत्र में डरना नहीं, बोलना जरूरी होता है।



मुआवजे पर सरकार का आश्वासन

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार नीट से जुड़ी आत्महत्याओं के पीड़ित परिवारों को नियमों के तहत आर्थिक मुआवजा देगी। रांका ने भी बताया कि सरकार एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग पर सहमत हो गई है। उन्होंने कहा कि यह मुआवजा नियमों और कानूनों के तहत पीड़ित परिवारों को दिया जाएगा।



भविष्य की मांगों पर अलग बातचीत

आशुतोष रांका ने यह भी बताया कि पार्टी ने सरकार के सामने पांच सूत्रीय मांग पत्र भी रखा है। इसमें शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की बात कही गई है। इस मांग पत्र पर करीब चार हफ्ते बाद सरकार से दोबारा बातचीत होगी। यानी तीन प्रमुख मांगें पूरी होने के बाद भी बड़े सुधारों पर बातचीत जारी रहेगी।



जंतर मंतर पर धरना और भूख हड़ताल

20 जून से प्रदर्शन और गंभीर हो गया। प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़ गए।



उन्होंने भूख हड़ताल शुरू की, जो करीब 26 दिनों तक चली। धीरे-धीरे CJP का प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया। जंतर मंतर पर हजारों छात्र और युवा जमा होने लगे। 21 जून को दोबारा परीक्षा हुई और नतीजे भी जल्दी घोषित हो गए, लेकिन गुस्सा कम नहीं हुआ।



20 जुलाई की झड़प और विपक्ष का प्रदर्शन

जुलाई का महीना इस विवाद का सबसे तनावपूर्ण दौर साबित हुआ। 20 जुलाई को CJP ने चलो संसद नाम से एक बड़े मार्च का ऐलान किया। पुलिस ने इस मार्च की इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी संसद की तरफ बढ़ चले। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े, जिसमें कई लोग घायल हुए।



उसी दिन विपक्ष भी सड़क पर उतर आया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की तरफ मार्च किया। पुलिस ने इन नेताओं को हिरासत में लिया। संसद का मॉनसून सत्र भी इसी मुद्दे पर लगातार ठप रहा। विपक्षी सांसद रोज संसद में नारेबाजी करते रहे, जिससे कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।



पीएम मोदी की सख्ती और नया बिल

23 जुलाई की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई का ऐलान किया। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात भी कही। 24 जुलाई को उन्होंने एक और वीडियो संदेश जारी कर युवाओं को भरोसा दिलाया।



इसी दिन केंद्रीय कैबिनेट ने सख्त प्रावधान वाले ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी। CJP के दो प्रतिनिधि केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से दूसरी बार मिले। सरकार ने मुआवजे और केस वापसी की मांगों पर सैद्धांतिक सहमति जताई। लेकिन इस्तीफे पर फैसला 25 जुलाई तक टाल दिया गया।



आखिरकार इस्तीफा और आगे क्या

शुरुआत में सरकारी सूत्रों का कहना था कि इस्तीफा फिलहाल एजेंडे में नहीं है। लेकिन 25 जुलाई यानी शनिवार को दोपहर करीब दो बजे धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया। फिलहाल जंतर मंतर पर धरना जारी है। आने वाले दिनों में सरकार और CJP के बीच बातचीत का अगला दौर भी हो सकता है। संसद में गतिरोध भी अभी तक बना हुआ है।



FAQ

  1. कॉकरोच जनता पार्टी की तीन मांगें क्या थीं?
    पार्टी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापसी और नीट पीड़ितों को मुआवजे की मांग की थी। तीनों मांगें सरकार ने मान लीं।
  2. आंदोलन कब और क्यों खत्म हुआ?
    शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन खत्म हुआ। यह करीब 34 दिन तक नीट पेपर लीक मामले को लेकर चला था।

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