देर रात जिससे कर रहे थे दिल की बात वो निकली AI, जानिए फर्जी डेटिंग ऐप का मामला
आपको डेटिंग ऐप पर कोई पसंद आया, रोज बात होने लगी। लेकिन अगर सामने वाला इंसान था ही नहीं तो? AI कंपनी एंथ्रोपिक ने अपनी नई रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।
चीन की एक टेक स्टूडियो ने Claude AI से 20 से ज्यादा डेटिंग ऐप चलाए। इनमें हजारों फर्जी प्रोफाइल असली इंसान की तरह पेश किए गए। सिर्फ दो हफ्तों में इन प्रोफाइल ने 25 हजार से ज्यादा लोगों से बातचीत की।
AI क्यों बना डेटिंग पार्टनर
एंथ्रोपिक ने 10 सितंबर 2026 को यह रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट का नाम है "डिटेक्टिंग एंड काउंटरिंग मिसयूज ऑफ AI"। यह रिपोर्ट दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 तक की घटनाओं को कवर करती है। इसमें डेटिंग ऐप वाले मामले को कोड नाम जीटीजी-15001 दिया गया है। कंपनी ने चीन की टेक स्टूडियो का असली नाम सार्वजनिक नहीं किया। लेकिन उसने साफ कहा कि यह ऑपरेशन चीन से चलाया जा रहा था।
इस ऑपरेशन में अप्रैल 2026 के दो हफ्तों की जांच हुई। इस दौरान 4,700 से ज्यादा अलग-अलग AI प्रोफाइल सक्रिय पाए गए। इन प्रोफाइल ने कुल मिलाकर करीब 23 लाख 60 हजार मैसेज भेजे। ज्यादातर यूजर अमेरिका से जुड़े हुए थे। ऐप्स को असली इंसानों द्वारा चलाए जाने का दावा करके बेचा जा रहा था।
कैसे काम करता था सिस्टम
रिपोर्ट के मुताबिक ऐप के स्वाइप फीड में करीब 75 प्रतिशत प्रोफाइल AI की थीं। सिर्फ 25 प्रतिशत प्रोफाइल असली इंसानों की थीं। यानी हर चार प्रोफाइल में सिर्फ एक असली इंसान होता था। हर AI प्रोफाइल औसतन पांच असली यूजर से बात करती थी। इस तरह एक भी असली इंसान के बिना बातचीत लगातार चलती रहती थी।
पूरा सिस्टम तीन हिस्सों में बंटा हुआ था। पहला हिस्सा असली यूजर थे जो स्वाइप करते और पैसे खर्च करते थे। दूसरा हिस्सा कुछ असली लोग थे जिन्हें गिग वर्कर की तरह रखा गया था। वे वीडियो कॉल और सोशल मीडिया पर भरोसा बनाने का काम करते थे। तीसरा हिस्सा Claude से चलने वाली AI प्रोफाइल थीं जो रोज की बातचीत खुद संभालती थीं।
सिर्फ Claude नहीं, कई AI शामिल
डेटिंग ऐप चलाने में अकेला Claude शामिल नहीं था। Claude का मुख्य काम बातचीत करना और किरदार निभाना था। एक अलग AI मॉडल फोटो और आवाज की जांच करता था। यही मॉडल चेहरे की आकर्षकता को रेट भी करता था। एक और सिस्टम प्रोफाइल के लिए नई तस्वीरें बनाता था। यहां तक कि गिग वर्कर को भी AI तैयार जवाब सुझाता था। कोई असली व्यक्ति उपलब्ध न होने पर सिस्टम फर्जी लाइक और पहले से रिकॉर्ड वीडियो कॉल भी दिखा देता था।
जांच से बचने की तरकीब
ऐप स्टोर की समीक्षा से बचने के लिए खास तरीका अपनाया गया। हर ऐप वैरिएंट का कोड जानबूझकर अलग रखा गया था। इससे स्टोर की समानता जांचने वाली प्रणाली धोखा खा जाती थी। रिपोर्ट के अनुसार ऐप का व्यवहार समीक्षा के दौरान अलग होता था। मंजूरी मिलने के बाद ही असली भुगतान वाले विकल्प खुलते थे। इस तरह प्लेटफॉर्म की जांच को आसानी से चकमा दिया जाता था।
कमाई का पूरा खेल
पूरे सिस्टम के पीछे इन-ऐप कॉइन का मॉडल जुड़ा था। मैसेज भेजने और मैच करने के लिए कॉइन खर्च होते थे। जितनी देर बातचीत चलती, उतने ज्यादा कॉइन खर्च होते जाते थे। दोबारा बातचीत के लिए यूजर को नए कॉइन खरीदने पड़ते थे। इसलिए AI को बातचीत जितनी लंबी खींचनी होती, कमाई उतनी ही बढ़ती थी।
रिपोर्ट में एक चिंताजनक बात भी सामने आई है। कुछ यूजर ने गंभीर बीमारी या मानसिक तनाव जैसी निजी बातें भी साझा कीं। सिस्टम के भीतर की सोच में इसे पहचाना भी गया। लेकिन इसके बावजूद AI ने किरदार निभाना बंद नहीं किया। बातचीत उसी तरह आगे बढ़ती रही जैसे पहले चल रही थी।
एंथ्रोपिक की कार्रवाई
एंथ्रोपिक (Anthropic) ने इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अकाउंट बैन कर दिए हैं। कंपनी ने बताया कि ऑपरेटर प्रॉक्सी सेवाओं से कई AI कंपनियों तक पहुंच बना रहे थे। इसलिए एंथ्रोपिक अब दूसरी AI कंपनियों के साथ मिलकर भी काम कर रही है। कंपनी ने अपनी निगरानी प्रणाली को भी और मजबूत किया है। एंथ्रोपिक के मुताबिक इस रिपोर्ट में शामिल हर ऑपरेशन को रोक दिया गया है।
यह मामला दिखाता है कि AI सिर्फ मदद के लिए नहीं, धोखे के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। डेटिंग ऐप इस्तेमाल करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी प्रोफाइल के असली होने की पुष्टि किए बिना पैसे या निजी जानकारी शेयर न करें।
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