RTI में खुलासा: 24 अकबर रोड पर कांग्रेस का कब्जा, 13 साल से किराया नहीं चुकाया

Pawan Modiya | Jul 07, 2026, 19:39 IST
कांग्रेस का किराया बकाया
दिल्ली के 24 अकबर रोड बंगले पर कांग्रेस ने 13 साल से कोई किराया नहीं दिया है। RTI में यह बड़ा खुलासा हुआ है। 2013 में आवंटन रद्द होने के बाद भी पार्टी ने बंगला खाली नहीं किया। सरकार का कहना है कि बकाया अभी समीक्षा में है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 24 अकबर रोड बंगला कांग्रेस का पुराना दफ्तर रहा है।
  • कांग्रेस ने अब कोटला रोड पर नया मुख्यालय बना लिया है।
  • फिर भी पार्टी ने पुराना बंगला खाली नहीं किया है।
  • RTI में पता चला कि 13 साल से किराया नहीं आया।
  • सरकार का कहना है कि बकाया रकम अभी तय होनी बाकी है।

दिल्ली के अकबर रोड पर बंगला नंबर 24 कांग्रेस पार्टी का पुराना दफ्तर है। कांग्रेस ने कोटला रोड पर नया मुख्यालय बना लिया है। इसे इंदिरा गांधी भवन नाम दिया गया है। लेकिन कांग्रेस ने पुराने दफ्तर पर कब्जा नहीं छोड़ा है। अब एक RTI (Right to Information) से बड़ा खुलासा हुआ है। इस बंगले का किराया 13 साल से नहीं दिया गया है।



13 साल से नहीं दिया किराया

RTI के जरिए यह जानकारी मिली है। कांग्रेस ने 2013 से बंगले का किराया नहीं भरा है। सरकार को इतने साल में इस बंगले से कोई कमाई नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने कहा है कि पार्टी का बकाया अभी समीक्षा में है। यह तय होना अभी बाकी है कि कितनी रकम बनती है।



क्या कहता है सरकारी रिकॉर्ड

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स आता है। यह विभाग सरकारी बंगलों का आवंटन देखता है। डायरेक्टरेट ने RTI जवाब में साफ जानकारी दी है। बंगला नंबर 24 को 7 अगस्त 1992 को कांग्रेस को दिया गया था। लेकिन 26 जून 2013 को यह आवंटन रद्द कर दिया गया। इसके बाद भी कांग्रेस ने बंगला खाली नहीं किया। पार्टी बिना इजाजत के इस पर कब्जा जमाए हुए है। यह टाइप आठ श्रेणी का बंगला बताया गया है।



बकाये का हिसाब अभी अटका

डायरेक्टरेट के जवाब से एक बात साफ हो गई है। सरकार ने अभी तक बकाया रकम तय नहीं की है। इसलिए वसूली की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है। यह मामला कई साल से इसी तरह लटका हुआ है। पार्टी की तरफ से भी कोई भुगतान नहीं आया है।



खाली कराने के नोटिस पर जानकारी नहीं

RTI में यह भी पूछा गया था कि क्या पार्टी को नोटिस भेजे गए। यानी क्या कांग्रेस को बंगला खाली करने के लिए कहा गया था। डायरेक्टरेट ने इस बारे में जानकारी देने से मना कर दिया। विभाग ने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड एक जगह जमा नहीं रहते हैं। इन्हें इकट्ठा करने में सरकारी संसाधनों का बहुत इस्तेमाल होगा। यह इनकार RTI कानून की धारा 7(9) के तहत किया गया है।



2018 की RTI में भी हुआ था खुलासा

यह पहली बार नहीं है जब यह मामला सामने आया है। 2018 में भी बंगले की लाइसेंस फीस बढ़ाई गई थी। 1 जुलाई 2017 से यह फीस 3,920 रुपए प्रतिमाह कर दी गई थी। उस जवाब में 2015 का एक कैंसिलेशन लेटर भी शामिल था। उस समय पार्टी ने बंगला अपने पास रखने की अपील की थी। पार्टी चाहती थी कि उससे सामान्य लाइसेंस फीस ली जाए। उस अपील पर तब विचार चल रहा था।



बीजेपी दफ्तर पर भी वैसी ही स्थिति

यही सवाल बीजेपी (Bharatiya Janata Party) के पुराने दफ्तर पर भी पूछा गया। बीजेपी ने भी दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर नया मुख्यालय बनाया है। लेकिन पार्टी ने 11 अशोक रोड वाला दफ्तर नहीं छोड़ा है। डायरेक्टरेट के मुताबिक यह बंगला 21 मार्च 1985 को बीजेपी को मिला था। अब यह बंगला लोकसभा सदस्यों के पूल का हिस्सा बन चुका है। इसलिए किराए से जुड़ी जानकारी लोकसभा सचिवालय के पास है। बीजेपी पर बकाया है या नहीं, यह भी अभी साफ नहीं है। सरकार इस मामले की भी समीक्षा कर रही है।



पुरानी RTI में क्या पता चला था

2019 में मिली एक RTI से भी जानकारी सामने आई थी। उस समय भी 11 अशोक रोड बीजेपी के कब्जे में ही था। पार्टी उस बंगले को अपने दफ्तर के तौर पर इस्तेमाल कर रही थी। 2018 की RTI में यह भी बताया गया था। इस बंगले की फीस भी 1 जुलाई 2017 से 3,920 रुपए तय हुई थी। यानी दोनों बड़ी पार्टियों के पुराने दफ्तरों की कहानी एक जैसी है।



दोनों पार्टियों का रुख साफ नहीं

कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने पुराने दफ्तर खाली नहीं किए हैं। दोनों दलों ने नए और आलीशान मुख्यालय जरूर बना लिए हैं। लेकिन पुरानी सरकारी संपत्ति पर कब्जा अब भी बना हुआ है। सरकार की तरफ से भी अभी तक सख्त कार्रवाई नहीं दिखी है। बकाया तय करने और वसूली में लगातार देरी हो रही है। इससे सरकारी खजाने को भी नुकसान होने की आशंका है। आम जनता के मन में इससे कई सवाल भी उठते हैं। पारदर्शी जवाबदेही के लिए यह मुद्दा अहम माना जा रहा है। दिल्ली में सरकारी बंगलों को लेकर ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं। कई नेता और पार्टियां पद छोड़ने के बाद भी बंगला खाली नहीं करतीं। इससे कोर्ट और सरकार दोनों पर दबाव बढ़ जाता है। नागरिकों का मानना है कि नियम सभी दलों पर बराबर लागू होने चाहिए। यह RTI खुलासा इसी बहस को फिर से हवा दे सकता है।



जरूरी FAQ

24 अकबर रोड बंगले का किराया कितने साल से बकाया है?


RTI में मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस ने 2013 से इस बंगले का किराया नहीं दिया है। यानी यह बकाया करीब 13 साल से चला आ रहा है। सरकार का कहना है कि सही रकम अभी तय होनी बाकी है।



24 अकबर रोड बंगले का आवंटन कब रद्द हुआ था?


यह बंगला 7 अगस्त 1992 को कांग्रेस को आवंटित हुआ था। इसका आवंटन 26 जून 2013 को रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद पार्टी ने आज तक बंगला खाली नहीं किया है।



क्या बीजेपी के पुराने दफ्तर पर भी ऐसा ही मामला है?


हां, बीजेपी का 11 अशोक रोड बंगला भी लोकसभा सदस्यों के पूल का हिस्सा बन चुका है। बीजेपी पर बकाया है या नहीं, इसकी भी समीक्षा चल रही है। पार्टी अब भी इस बंगले का दफ्तर के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।



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