कौन से वाले पापा पूछना पड़ा भारी, दिल्ली कोर्ट ने महिला से सवाल पर व्यक्ति को सुनाई सजा, जानें मामला
समझें क्या है पूरा मामला
- दिल्ली की एक महिला अपनी बच्ची के साथ रास्ते से जा रही थीं।
- बच्ची रो रही थी, तो मां ने कहा, "देखो पापा आ गए, रो मत।"
- रास्ते के किनारे बैठे प्रेस वाले गिरधारी लाल ने पूछा, "कौन से वाले पापा?"
- कोर्ट ने इस सवाल को महिला के चरित्र पर टिप्पणी माना।
- अदालत ने गिरधारी लाल को दोषी करार दिया।
23 मार्च 2021 को क्या हुआ था?
घटना 23 मार्च 2021 की है। प्रियंका (बदला हुआ नाम) अपनी छोटी बच्ची को लेकर कहीं जा रही थीं। बच्ची रोए जा रही थी।
उसे चुप कराने के लिए प्रियंका ने कहा, देखो पापा आ गए, रो मत। उसी वक्त रास्ते के किनारे प्रेस यानी इस्त्री करने वाला गिरधारी लाल बैठा था।
उसने यह बात सुनी और पूछा, "कौन से वाले पापा?"
बात यहीं खत्म नहीं हुई।
ससुर ने पुलिस को दी जानकारी
प्रियंका ने उस वक्त गिरधारी लाल और उसकी बात, दोनों को नजरअंदाज कर दिया। लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू हुई। बाद में उन्होंने अपने ससुर को पूरी बात बताई।
ससुर ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। घटना के करीब पांच साल बाद अब कोर्ट का फैसला आया है।
गिरधारी लाल ने कोर्ट में क्या माना?
सुनवाई के दौरान गिरधारी लाल ने खुद माना कि उसने यह बात कही थी। उसका कहना था कि उसने यह बात किसी गलत इरादे से नहीं कही थी। लेकिन कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी।
कोर्ट ने क्यों नहीं मानी दलील?
क्या शब्दों का मतलब सिर्फ शब्दों से तय होता है? कोर्ट के मुताबिक नहीं। किसी बात का मतलब उस समय के पूरे हालात से भी समझा जाता है।
दरअसल कोर्ट ने इसे आम सवाल की तरह नहीं देखा। महिला अपनी रोती बच्ची को चुप करा रही थी। उसी बीच यह सवाल आया।
कोर्ट के मुताबिक इसका कोई सामान्य मतलब नहीं निकलता। ऐसा कोई कारण सामने नहीं आया। अदालत ने माना कि सवाल महिला को अपमानित करने के इरादे से किया गया।
कोर्ट के मुताबिक यह कोई नॉर्मल सवाल नहीं था। इससे महिला के चरित्र और बच्चे के पिता को लेकर गलत इशारा हुआ। कोर्ट ने माना कि ऐसी बात किसी महिला को अपमानित कर सकती है।
दूसरा गवाह नहीं, फिर भी भरोसा क्यों?
घटना के वक्त वहां कोई दूसरा गवाह नहीं था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि इससे महिला की बात पर शक नहीं होता। वजह साफ है। महिला खुद उस वक्त मौजूद थीं। उनकी बात में कोई खास बदलाव भी नहीं आया।
आईपीसी धारा 509 में क्या सजा?
कोर्ट ने गिरधारी लाल को IPC Section 509 के तहत दोषी माना। आईपीसी यानी इंडियन पीनल कोड (भारतीय दंड संहिता)। यह धारा महिला का अपमान करने वाले शब्द, इशारे या हरकत पर लागू है।
आईपीसी धारा 509 में तीन साल तक जेल या जुर्माना हो सकता है। यह सजा की अधिकतम सीमा है। कोर्ट इससे कम सजा भी दे सकती है।
सजा अभी तय नहीं हुई है।
दिल्ली कोर्ट की खबर: अब आगे क्या?
दोषी करार का मतलब है कि अदालत ने आरोप को सही माना। फिलहाल कोर्ट ने सिर्फ गिरधारी लाल को दोषी करार दिया है। उसे कितनी सजा मिलेगी, इस पर बाद में सुनवाई होगी। इस मामले में अगला कदम वही सुनवाई है।
फैसले से क्या सीख मिलती है?
यह दिल्ली कोर्ट फैसला एक बात साफ करता है। किसी महिला के बारे में कही बात का मतलब हालात से तय होता है। कोर्ट ने सिर्फ इरादे की दलील पर भरोसा नहीं किया।
सोचिए एक बार। रास्ते में कही गई एक लाइन का फैसला पांच साल बाद आया। इतने समय बाद भी कोर्ट ने महिला की बात पर भरोसा किया।
विवाद हो तो अदालत शब्दों के साथ माहौल भी देखती है। इसलिए बोलने से पहले संदर्भ का ध्यान रखना जरूरी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह फैसला बताता है कि महिला की गरिमा को ठेस एक सवाल से भी लग सकती है। कोर्ट ने इरादे की सफाई से ज्यादा हालात और बात के असर को देखा। रोजमर्रा की बातचीत में ऐसे सवाल हल्के में लिए जा सकते हैं। यह मामला याद दिलाता है कि हर महिला को सम्मान के साथ चलने का हक है। संविधान भी सम्मान और बराबरी की यही भावना सामने रखता है।
FAQ
- गिरधारी लाल को किस मामले में दोषी माना गया है?
गिरधारी लाल को किस मामले में दोषी माना गया है? - आईपीसी धारा 509 में कितनी सजा हो सकती है?
आईपीसी धारा 509 में तीन साल तक जेल या जुर्माना हो सकता है। यह धारा महिला का अपमान करने वाले शब्द, इशारे या हरकत पर लागू होती है। इस मामले में सजा पर सुनवाई बाद में होगी। - कोर्ट ने गिरधारी लाल की दलील क्यों नहीं मानी?
कोर्ट के मुताबिक किसी बात का मतलब पूरे हालात से समझा जाता है। इस मामले में सवाल का कोई सामान्य मतलब नहीं निकल सका। अदालत ने इसे महिला को अपमानित करने के इरादे से किया गया माना।