लिव-इन रिलेशनशिप रिश्ता शादी जैसा, माता-पिता या दोस्त नहीं दे सकते दखल-हाईकोर्ट

Aman Vaishnav | Aug 21, 2026, 09:05 IST
Share
लिव-इन रिलेशनशिप पर हाईकोर्ट का फैसला
लिव-इन रिलेशनशिप पर हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि अपनी मर्जी से साथ रहने वाले बालिगों का रिश्ता शादी जैसा ही होता है। कोर्ट के मुताबिक, बालिगों की पसंद में माता-पिता, रिश्तेदार या दोस्त किसी तरह का दखल नहीं दे सकते।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने लिव-इन रिश्ते को लेकर बड़ी टिप्पणी की है।
  • कोर्ट ने कहा कि बालिगों का सहमति से लिव-इन में रहना शादी जैसा ही है।
  • माता-पिता या रिश्तेदार इसमें दखल नहीं दे सकते।
  • जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह आदेश सुनाया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले बालिगों के हक में एक बेहद अहम बात कही है। अदालत का कहना है कि, अगर दो बालिग अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं, तो उनका यह रिश्ता शादी जैसा ही माना जाएगा। ऐसे में उनके परिवार, दोस्तों या रिश्तेदारों को उनकी निजी जिंदगी में दखल देने का कोई हक नहीं है।

क्या रही इस फैसले की वजह

दरअसल धमकी और डर के माहौल में जी रहे एक जोड़े ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दोनों की उम्र 30 साल से ज्यादा है। दोनों ने अपनी मर्जी से साथ रहने का फैसला लिया था लेकिन लड़की के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था।

पिता-भाई पर धमकी का आरोप

याचिका में कपल ने बताया कि लड़की के पिता और भाई इस रिश्ते के सख्त खिलाफ हैं। दोनों बार-बार धमकी दे रहे थे। जोड़े को अपनी जान का डर सताने लगा था।

कपल ने स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। आरोप है कि पुलिस ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की।

इसके बाद जोड़े ने कोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई। उनका कहना था कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से एक साथ रह रहे हैं। किसी को उनकी निजी जिंदगी में दखल देने का हक नहीं है।

कोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस सौरभ बनर्जी ने आदेश में साफ लिखा कि याचिकाकर्ता कानूनी रूप से पति-पत्नी नहीं हैं। लेकिन दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से जिम्मेदारी के साथ साथ रह रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे रिश्तों को भी सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।

कोर्ट ने आगे कहा कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे बालिग के जीवन साथी चुनने के अधिकार में दखल देने या उसे धमकाने का हक नहीं है। यह अधिकार सीधे व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट का हवाला

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार कह चुका है कि शादी न होने पर भी बालिगों को साथ रहने का अधिकार है। यह अधिकार संविधान से मिली स्वतंत्रता का हिस्सा है। परिवार, समाज या कोई और इसमें रोक नहीं लगा सकता।

कानूनी प्रावधान क्या हैं

कोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 का भी जिक्र किया। इस कानून में लिव-इन रिश्तों को भी सुरक्षा से जोड़ा गया है। यानी लिव-इन में रह रही महिला भी घरेलू हिंसा से सुरक्षा की हकदार है।

FAQ

  1. क्या लिव-इन रिलेशनशिप भारत में कानूनी है?
    हां, बालिगों के बीच सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप कानूनी है। सुप्रीम कोर्ट कई बार यह स्पष्ट कर चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इसे दोहराया है।
  2. : क्या परिवार लिव-इन रिश्ते में दखल दे सकता है?
    नहीं, कोर्ट के अनुसार बालिगों की निजी पसंद में परिवार दखल नहीं दे सकता। धमकी देना या रोकना गैरकानूनी माना जाएगा।
  3. लिव-इन जोड़ों को कौन-सा कानून सुरक्षा देता है?
    घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 लिव-इन रिश्तों को भी कवर करता है। इसके अलावा कोर्ट पुलिस सुरक्षा का आदेश भी दे सकता है। यह अधिकार संवैधानिक स्वतंत्रता से भी जुड़ा है।

ये खबरें भी पढ़िए...

एमपी में यूसीसी लागू करना आसान नहीं! बदल सकते हैं लिव-इन रिलेशनशिप के नियम

लिव-इन पार्टनर से पीछा छुड़ाना नहीं होगा आसान, कराना होगा ब्रेकअप रजिस्ट्रेशन

मध्यप्रदेश न्यूज: UCC लागू होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन जरूरी

देश दुनिया न्यूज: लिव-इन जोड़े माने जाएंगे विवाहित, घर बैठे ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा

Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • मध्यप्रदेश न्यूज
  • दिल्ली हाईकोर्ट
  • लिव-इन रिलेशनशिप
  • घरेलू हिंसा
  • देश दुनिया न्यूज
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब

By VINAY VERMA

अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान

By Ashish Bhardwaj

RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान