नीट पेपर लीक, CJP प्रोटेस्ट से लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक, क्या-क्या हुआ
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET विवाद के बीच इस्तीफा दिया। मई में पेपर लीक की शिकायतों के बाद पूरी परीक्षा रद्द हुई थी। कॉकरोच जनता पार्टी नाम के आंदोलन ने छात्रों के गुस्से को आवाज दी। जंतर मंतर पर हफ्तों धरना चला, सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे। 24 जुलाई को सख्त बिल को मंजूरी मिली, फिर 25 जुलाई को इस्तीफा हुआ।
NEET पेपर लीक विवाद अब सिर्फ परीक्षा की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा था। बीते कुछ महीनों में यह देश की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल बन चुका था। जंतर मंतर पर हफ्तों से चल रहा प्रदर्शन, संसद का लगातार ठप होना और विपक्ष का सड़क पर उतरना, सब कुछ एक साथ हुआ। आखिरकार 25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
इसी दिन केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ एक सख्त ड्राफ्ट बिल को भी मंजूरी दी। इसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है। आइए पूरी टाइमलाइन को विस्तार से समझते हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
यह पूरा मामला मई 2026 में शुरू हुआ था। 3 मई को देशभर में NEET UG परीक्षा हुई, जिसमें करीब 22 से 24 लाख छात्र शामिल हुए। परीक्षा के कुछ दिन बाद शिकायतें आने लगीं। कहा गया कि गेस पेपर के नाम पर असली सवाल पहले ही लीक हो चुके थे।
इन शिकायतों के बाद हड़कंप मच गया। 12 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी। साथ ही CBI ने भी मामले की जांच शुरू कर दी। 15 मई को खुद धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस ब्रीफिंग में पेपर लीक होने की बात मानी। उन्होंने इसे कमांड चेन की एक चूक बताया। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला हुआ।
'कॉकरोच पार्टी' कैसे बनी आंदोलन
15 और 16 मई को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी वायरल हुई थी, जिसमें कॉकरोच शब्द इस्तेमाल हुआ था। इसी से प्रेरित होकर 16 मई को अभिजीत दिपके ने मजाक में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP बनाई। शुरुआत में यह सिर्फ एक ऑनलाइन मजाक जैसा लगा। लेकिन कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। परीक्षा रद्द होने की खबर आते ही यह मंच युवाओं के गुस्से का सबसे बड़ा जरिया बन गया।
6 जून को CJP ने अपना पहला बड़ा प्रदर्शन दिल्ली के जंतर मंतर पर किया। प्रदर्शनकारियों की तीन मांगें थीं। पहली, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। दूसरी, परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार हों। तीसरी, तनाव के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा मिले।
जंतर मंतर पर धरना और भूख हड़ताल
20 जून से प्रदर्शन और गंभीर हो गया। प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़ गए।
उन्होंने भूख हड़ताल शुरू की, जो करीब 26 दिनों तक चली। धीरे-धीरे CJP का प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया। जंतर मंतर पर हजारों छात्र और युवा जमा होने लगे। 21 जून को दोबारा परीक्षा हुई और नतीजे भी जल्दी घोषित हो गए, लेकिन गुस्सा कम नहीं हुआ।
20 जुलाई की झड़प और विपक्ष का प्रदर्शन
जुलाई का महीना इस विवाद का सबसे तनावपूर्ण दौर साबित हुआ। 20 जुलाई को CJP ने चलो संसद नाम से एक बड़े मार्च का ऐलान किया। पुलिस ने इस मार्च की इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी संसद की तरफ बढ़ चले। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े, जिसमें कई लोग घायल हुए।
उसी दिन विपक्ष भी सड़क पर उतर आया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की तरफ मार्च किया। पुलिस ने इन नेताओं को हिरासत में लिया। संसद का मॉनसून सत्र भी इसी मुद्दे पर लगातार ठप रहा। विपक्षी सांसद रोज संसद में नारेबाजी करते रहे, जिससे कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
पीएम मोदी की सख्ती और नया बिल
23 जुलाई की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई का ऐलान किया। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात भी कही। 24 जुलाई को उन्होंने एक और वीडियो संदेश जारी कर युवाओं को भरोसा दिलाया।
इसी दिन केंद्रीय कैबिनेट ने सख्त प्रावधान वाले ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी। CJP के दो प्रतिनिधि केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से दूसरी बार मिले। सरकार ने मुआवजे और केस वापसी की मांगों पर सैद्धांतिक सहमति जताई। लेकिन इस्तीफे पर फैसला 25 जुलाई तक टाल दिया गया।
आखिरकार इस्तीफा और आगे क्या
शुरुआत में सरकारी सूत्रों का कहना था कि इस्तीफा फिलहाल एजेंडे में नहीं है। लेकिन 25 जुलाई यानी शनिवार को दोपहर करीब दो बजे धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया। फिलहाल जंतर मंतर पर धरना जारी है। आने वाले दिनों में सरकार और CJP के बीच बातचीत का अगला दौर भी हो सकता है। संसद में गतिरोध भी अभी तक बना हुआ है।
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