क्या पुलिस आपको प्रदर्शन करने से रोक सकती है, जानिए क्या कहता है संविधान?
Jinesh Jain | Jul 21, 2026, 19:51 IST
क्या पुलिस प्रदर्शन रोक सकती है?
क्या भारत में प्रदर्शन या विरोध प्रकट करना कानूनी है? प्रदर्शन के किन रूपों की अनुमति है और किन पर रोक है? क्या संसद के बाहर या वहां प्रदर्शन करने की अनुमति है? आइए यहां कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के जरिए इसे समझते हैं:
New Delhi: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हजारों कार्यकर्ताओं ने सोमवार को संसद मार्च करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने उन पर सख्त कार्रवाई की। संसद के दरवाजे बंद कर दिए गए।
सरकार ने भी प्रदर्शनकारियों से संपर्क साधा है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि उनकी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का पत्र सौंप दिया है।
भारत में किस कानून के तहत
संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और (b) के तहत भारत के हर नागरिक को बोलने, अपनी बात रखने और बिना हथियारों के शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का मौलिक अधिकार है।
उचित पाबंदियां (Restrictions): यह अधिकार पूरी तरह छूट नहीं देता। देश की सुरक्षा, अखंडता, शांति-व्यवस्था और अदालती आदेशों को ध्यान में रखते हुए सरकार इस पर नियम/पाबंदियां लगा सकती है।
नियंत्रण के तरीके: आमतौर पर विरोध प्रदर्शन के लिए स्थान तय किए जाते हैं। पुलिस की इजाजत जरूरी होती है। जरूरत पड़ने पर बीएनएस (BNS) की धारा 163 (जो पहले CrPC की धारा 144 थी) के तहत रोक लगाई जाती है।
![क्या पुलिस आपको प्रदर्शन करने से रोक सकती है,]()
2021 में जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने कहा था कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन और मार्च भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और आजादी की लड़ाई का अहम हिस्सा रहे हैं।
सरकार नागरिकों के अधिकारों और जन-सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करती है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के एकत्र होने और संघ या संगठन बनाने के अधिकार की गारंटी देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी यह फैसला दिया है कि संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की गारंटी देता है।
![भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और आजादी की लड़ाई]()
सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न फैसलों में प्रदर्शन करने के अधिकार और उस अधिकार पर लगने वाले प्रतिबंधों दोनों को बरकरार रखा है। इसके कुछ उदाहरण यहां दिए गए हैं:
अदालत ने माना कि सभा की स्वतंत्रता भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक आवश्यक तत्व है।
लोकतंत्र में लोगों का आपस में मिलकर विचारों पर चर्चा करना जरूरी है।
सरकार व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियम बना सकती है, लेकिन बेवजह पूरी तरह रोक नहीं लगा सकती।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर CrPC की धारा 144 को बार-बार लागू करने को चुनौती दी गई थी।
इसके तहत दिल्ली में संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, सेंट्रल विस्टा लॉन और इसके आसपास के क्षेत्रों में बिना लिखित अनुमति के एकत्र होने और धरने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
तब अदालत ने दिशानिर्देश तय किए। जैसे कि प्रदर्शनकारियों की संख्या को सीमित करना, संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, सुप्रीम कोर्ट और गणमान्य व्यक्तियों के आवासों से न्यूनतम दूरी तय करना। अदालत ने प्रदर्शनकारियों द्वारा हथियार, लाठी, भाले, तलवार आदि ले जाने पर भी रोक लगा दी।
इस फैसले ने प्रभावी रूप से जंतर-मंतर को दिल्ली के तय प्रदर्शन स्थल के रूप में फिर से पुष्टि की। साथ ही यह स्पष्ट किया कि नियमन (नियंत्रण) का मतलब पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना नहीं होना चाहिए।
यह शाहीन बाग प्रदर्शन का मामला था। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने माना कि प्रदर्शन चिह्नित/तय क्षेत्रों में ही किए जाने चाहिए।
प्रदर्शनकारी सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध नहीं कर सकते और दूसरों के लिए असुविधा पैदा नहीं कर सकते।
अदालत ने कहा, आप सार्वजनिक सड़कों को बंद नहीं कर सकते। ऐसे क्षेत्र में अनिश्चित काल तक प्रदर्शन नहीं हो सकता।
यदि आप विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो यह प्रदर्शन के लिए चिह्नित क्षेत्र में ही होना चाहिए। आप आम लोगों के लिए परेशानी खड़ी नहीं कर सकते।
![शाहीन बाग प्रदर्शन]()
भारत में विरोध करने का अधिकार आपको संविधान से मिला है, लेकिन दूसरों का रास्ता रोकने या व्यवस्था बिगाड़ने का अधिकार नहीं है।
सरकार का काम नागरिकों के अधिकार और जनता की सुरक्षा/सुविधा के बीच संतुलन बनाना है। इसीलिए तय जगह पर पुलिस की अनुमति से और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन ही कानूनी माना जाता है।
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सरकार ने भी प्रदर्शनकारियों से संपर्क साधा है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि उनकी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का पत्र सौंप दिया है।
भारत में किस कानून के तहत प्रदर्शन करने की अनुमति है?
उचित पाबंदियां (Restrictions): यह अधिकार पूरी तरह छूट नहीं देता। देश की सुरक्षा, अखंडता, शांति-व्यवस्था और अदालती आदेशों को ध्यान में रखते हुए सरकार इस पर नियम/पाबंदियां लगा सकती है।
नियंत्रण के तरीके: आमतौर पर विरोध प्रदर्शन के लिए स्थान तय किए जाते हैं। पुलिस की इजाजत जरूरी होती है। जरूरत पड़ने पर बीएनएस (BNS) की धारा 163 (जो पहले CrPC की धारा 144 थी) के तहत रोक लगाई जाती है।
क्या पुलिस आपको प्रदर्शन करने से रोक सकती है,
वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष
सरकार नागरिकों के अधिकारों और जन-सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करती है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के एकत्र होने और संघ या संगठन बनाने के अधिकार की गारंटी देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी यह फैसला दिया है कि संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की गारंटी देता है।
भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और आजादी की लड़ाई
प्रदर्शनों और उनकी सीमाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
हिम्मत लाल के शाह बनाम पुलिस आयुक्त (1973):
लोकतंत्र में लोगों का आपस में मिलकर विचारों पर चर्चा करना जरूरी है।
सरकार व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियम बना सकती है, लेकिन बेवजह पूरी तरह रोक नहीं लगा सकती।
मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018):
इसके तहत दिल्ली में संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, सेंट्रल विस्टा लॉन और इसके आसपास के क्षेत्रों में बिना लिखित अनुमति के एकत्र होने और धरने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
तब अदालत ने दिशानिर्देश तय किए। जैसे कि प्रदर्शनकारियों की संख्या को सीमित करना, संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, सुप्रीम कोर्ट और गणमान्य व्यक्तियों के आवासों से न्यूनतम दूरी तय करना। अदालत ने प्रदर्शनकारियों द्वारा हथियार, लाठी, भाले, तलवार आदि ले जाने पर भी रोक लगा दी।
इस फैसले ने प्रभावी रूप से जंतर-मंतर को दिल्ली के तय प्रदर्शन स्थल के रूप में फिर से पुष्टि की। साथ ही यह स्पष्ट किया कि नियमन (नियंत्रण) का मतलब पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना नहीं होना चाहिए।
अमित साहनी बनाम पुलिस आयुक्त (2020):
प्रदर्शनकारी सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध नहीं कर सकते और दूसरों के लिए असुविधा पैदा नहीं कर सकते।
अदालत ने कहा, आप सार्वजनिक सड़कों को बंद नहीं कर सकते। ऐसे क्षेत्र में अनिश्चित काल तक प्रदर्शन नहीं हो सकता।
यदि आप विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो यह प्रदर्शन के लिए चिह्नित क्षेत्र में ही होना चाहिए। आप आम लोगों के लिए परेशानी खड़ी नहीं कर सकते।
शाहीन बाग प्रदर्शन
निष्कर्ष
सरकार का काम नागरिकों के अधिकार और जनता की सुरक्षा/सुविधा के बीच संतुलन बनाना है। इसीलिए तय जगह पर पुलिस की अनुमति से और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन ही कानूनी माना जाता है।
FAQ
- क्या भारतीय संविधान शांतिपूर्ण आंदोलन का अधिकार देता है?
संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत भारत के नागरिकों को शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का मौलिक अधिकार है। वर्ष 2021 में संयुक्त राष्ट्र में भारत कह चुका है कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन और मार्च भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और आजादी की लड़ाई का अहम हिस्सा रहे हैं। - प्रदर्शनों और उनकी सीमाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न फैसलों में प्रदर्शन करने के अधिकार और उस अधिकार पर लगने वाले प्रतिबंधों दोनों को बरकरार रखा है।
ये भी पढ़ें:-
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