भारत ही नहीं, एशिया के इन देशों में भी होती है विघ्नहर्ता गणेश की विशेष पूजा
भगवान गणेश को हम विघ्नहर्ता और बुद्धिदाता के रूप में पूजते हैं। भारत में गणेश उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बप्पा की महिमा केवल हमारे देश तक सीमित नहीं है? दुनिया के कई अन्य देशों में भी भगवान गणेश की बहुत गहरी मान्यता है। एशिया के कई देशों में सदियों से गणपति की पूजा की जा रही है।
प्राचीन इतिहास में भारतीय व्यापारी और बौद्ध भिक्षु विदेशों में गए। वे अपने साथ भगवान गणेश की भक्ति और संस्कृति भी ले गए। धीरे-धीरे उन देशों ने बप्पा को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। आज इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में बप्पा पूजे जाते हैं। वहां की कला, करेंसी और मंदिरों में गणेश जी की झलक साफ दिखाई देती है।
हर देश में गणेश जी का रूप और नाम थोड़ा अलग जरूर है। कहीं गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है, तो कहीं वे कला और बुद्धि के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। इन देशों में बप्पा की पूजा की परंपरा सदियों पुरानी है। आइए जानें कि भारत से बाहर किन देशों में बप्पा की पूजा किस रूप में की जाती है।
इंडोनेशिया में बप्पा का सम्मान
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है। इसके बावजूद वहां भगवान गणेश की बहुत गहरी सांस्कृतिक मान्यता है। इंडोनेशिया की मुद्रा 20 हजार के नोट पर गणेश जी की तस्वीर छापी गई थी।
वहां बप्पा को ज्ञान और बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना जाता है। वहां के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान के लोगो में भी गणेश जी विराजमान हैं। इंडोनेशिया के लोग बप्पा को हर बाधा दूर करने वाला देवता मानते हैं।
थाईलैंड में फरा फिकानेत रूप
थाईलैंड में भगवान गणेश को फरा फिकानेत के नाम से जाना जाता है। वहां के लोग बप्पा को सफलता और कला का देवता मानते हैं। थाईलैंड में कलाकारों और व्यापारियों के बीच बप्पा बहुत प्रिय हैं।
वहां नया बिजनेस शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा होती है। बैंकॉक समेत कई शहरों में गणेश जी की विशाल मूर्तियां स्थापित हैं। वहां गणेश चतुर्थी का त्योहार भी बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है।
जापान में कांगितेन नाम से पूजा
जापान में भगवान गणेश को कांगितेन या शोटेन कहा जाता है। जापानी बौद्ध धर्म में कांगितेन की बहुत मान्यता है। वहां बप्पा को भाग्य और समृद्धि देने वाला देव माना जाता है।
जापान के कई प्राचीन मंदिरों में गणेश जी की मूर्तियां मौजूद हैं। जापानी व्यापारी अपने काम में सफलता के लिए इनकी पूजा करते हैं। वहां बप्पा का रूप दो शरीर आपस में जुड़े हुए जैसा दिखता है।
नेपाल में हेरंब और सूर्य रूप
नेपाल में हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराएं बहुत गहराई से जुड़ी हैं। वहां गणेश जी को हेरंब गणपति के नाम से जाना जाता है। काठमांडू घाटी में गणेश जी के कई प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर हैं।
नेपाल में हर शुभ काम से पहले गणेश पूजा का विधान है। वहां बप्पा की मूर्तियां पांच सिरों वाली भी देखने को मिलती हैं। नेपाली संस्कृति में गणेश जी को रक्षक माना जाता है।
श्रीलंका में पिल्लियार नाम से पूजा
श्रीलंका में तमिल और सिंहली दोनों समुदाय गणेश जी को पूजते हैं। वहां बप्पा को पिल्लियार के नाम से जाना जाता है। श्रीलंका के कई प्रसिद्ध मंदिरों में गणेश जी की स्थापना है।
वहां के लोग खेती और व्यापार शुरू करने से पहले पूजा करते हैं। तमिल समुदाय के लोग गणेश चतुर्थी का पर्व बहुत धूमधाम से मनाते हैं। वहां बप्पा को कष्ट हरने वाला देवता माना जाता है।
चीन में कांगशी तिएन से पूजा
चीन में भगवान गणेश का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, जहां चीनी बौद्ध परंपरा में उन्हें कांगशी तिएन के नाम से जाना और पूजा जाता है। छठी शताब्दी की प्राचीन चीनी गुफाओं और मंदिरों में पत्थर की नक्काशीदार गणेश प्रतिमाएं आज भी मौजूद हैं, जो उस दौर के सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रमाण हैं।
भारतीय संस्कृति और बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ बप्पा की महिमा चीन तक पहुंची, जहां लोगों ने उन्हें अत्यंत पवित्र देव का स्थान दिया। चीन में बप्पा को सभी विघ्नों को दूर करने वाला और जीवन में खुशहाली लाने वाला माना गया है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
ये खबरें भी पढ़ें...
14 सितंबर को बन रहा महासंयोग, एक ही दिन तीज, गणेश उत्सव और सोमवार का संगम
18 सितंबर को कर्क में मंगल-गुरु की युति से बनेगा राजयोग, इन राशि वालों की लॉटरी तय
शिवाजी महाराज से तिलक तक, घरों से निकलकर चौराहों तक कैसे पहुंचा गणेशोत्सव
17 सितंबर को दीयों से जगमगाएगी महाकाल की नगरी, 25 लाख दीपों से सजेगा शहर