E85 फ्लेक्स फ्यूल लॉन्च: पेट्रोल से 20 रुपए सस्ता मिलेगा, कीमत, कौन सी गाड़ियां चलेंगी?

Jitendra Shrivastava | Jun 06, 2026, 23:00 IST
Photograph: (thesootr)
NEW DELHI. दिल्ली में E85 फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) लॉन्च हो गया है। पूसा रोड पर देश का पहला पंप खुला। कीमत 82.12 रुपए प्रति लीटर-पेट्रोल से 20 रुपए सस्ता। 2027 तक देशभर में 5000 पंप खोलने का लक्ष्य।

समझें पूरा मामला...

  • E85 फ्यूल की कीमत 82.12 रुपए प्रति लीटर तय।
  • पेट्रोल से पूरे 20 रुपए प्रति लीटर सस्ता।
  • देश का पहला पंप दिल्ली के पूसा रोड पर।
  • 2027 तक 5000 E85 पंप खोलने का टारगेट।
  • केवल फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में उपयोग।

भारत में वैकल्पिक ईंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली के पूसा रोड पर देश का पहला E85 फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) पंप खुल गया है।



केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसका उद्घाटन किया। यह फ्यूल पेट्रोल से 20 रुपए सस्ता है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक 5000 पंप खोलना है।



E85 फ्यूल: दिल्ली में नई शुरुआत

भारत में ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल (IOC) आउटलेट पर देश के पहले E85 फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) डिस्पेंसिंग स्टेशन का उद्घाटन किया।



यह कदम भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक पल है। E85 फ्यूल में 85% एथेनॉल (Ethanol) और 15% पेट्रोल का मिश्रण होता है। यह फ्यूल न केवल सस्ता है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी काफी बेहतर है। आम लोगों के लिए यह एक बड़ी राहत है।



82.12 रुपए प्रति लीटर: किफायती दाम

दिल्ली में E85 फ्लेक्स फ्यूल की कीमत 82.12 रुपए प्रति लीटर तय की गई है। यह दिल्ली में बिकने वाले रेगुलर E20 पेट्रोल से पूरे 20 रुपए सस्ता है। यानी हर लीटर पर ग्राहक को 20 रुपए की बचत होगी।



यदि कोई व्यक्ति महीने में 50 लीटर फ्यूल इस्तेमाल करता है, तो उसे हर महीने 1000 रुपए की बचत होगी। यह बचत आम आदमी की जेब पर बड़ा फर्क डाल सकती है।



सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पंप पर E85 डिस्पेंसर (Dispenser) पर खास ब्रांडिंग और स्पष्ट लेबल लगाए जाएंगे। इससे ग्राहकों को किसी प्रकार का भ्रम नहीं होगा।



500 पंप इस साल, 5000 का टारगेट

दिल्ली के पूसा रोड पर खुला यह स्टेशन देश का पहला E85 पंप है। लेकिन सरकार का इरादा इसे देशव्यापी नेटवर्क बनाने का है। शुरुआती चरण में दिल्ली-NCR और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50 से 100 ऐसे स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस साल के अंत तक देश में करीब 500 E85 पंप खोले जाने की योजना है।



वहीं, साल 2027 के अंत तक देश के सभी प्रमुख शहरों में लगभग 5000 आउटलेट्स शुरू करने का लक्ष्य है। सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे हाई-एथेनॉल फ्यूल स्टैंडर्ड्स को भी हाल ही में अधिसूचित किया है। यह सब मिलकर भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जाएगा।



E85 और E20 में अंतर क्या है

अभी देशभर के पेट्रोल पंपों पर E20 फ्यूल उपलब्ध है। इसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है। इसके विपरीत, नए E85 फ्यूल में 85% एथेनॉल और केवल 15% पेट्रोल होता है।



यह फ्यूल ज्यादा स्वच्छ और ज्यादा किफायती है। सरकार E100 यानी 100% एथेनॉल आधारित फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) की ओर बढ़ना चाहती है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना है।



28 फरवरी को मध्य-पूर्व में शुरू हुए युद्ध के बाद कच्चा तेल (Crude Oil) की कीमत 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है। इससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है।



e85 flex fuel (2)


एथेनॉल क्या होता है

एथेनॉल (Ethanol) एक प्रकार का अल्कोहल है। इसे स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन (Fermentation) से तैयार किया जाता है। एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों के लिए इको-फ्रेंडली (Eco-Friendly) फ्यूल के रूप में उपयोग किया जाता है।



एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है। इसके अलावा मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी इसे बनाया जा सकता है। एथेनॉल से कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) बेहद कम होता है, जिससे पर्यावरण को लाभ मिलता है।



फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल (First Generation Ethanol) गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठे ज्वार और मक्का से बनाया जाता है। सेकेंड जनरेशन एथेनॉल (Second Generation Ethanol) सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब, बांस और वुडी बायोमास (Woody Biomass) से बनाया जाता है। थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल (Third Generation Biofuel) एलगी (Algae) से बनाया जाएगा, जिस पर अभी शोध जारी है।



कौन सी गाड़ियां चला सकती हैं E85

E85 फ्यूल को साधारण पेट्रोल गाड़ियों में नहीं डाला जा सकता। इसके लिए गाड़ी का इंजन विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) तकनीक पर बना होना चाहिए।



मारुति सुजुकी वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल (Maruti Suzuki WagonR Flex-Fuel) भारत की पहली पैसेंजर कार है जो E100 तक के ब्लेंड पर चल सकती है। यह E85 फ्यूल के लिए पूरी तरह अनुकूल है।



हीरो स्प्लेंडर+ (Hero Splendor+) और HF डीलक्स (HF Deluxe) देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलें हैं। ये E20 से लेकर E85 तक के फ्यूल पर चल सकती हैं।



दिल्ली और महाराष्ट्र में जुलाई 2026 से इनकी बिक्री शुरू होगी। सुजुकी जिक्सर SF (Suzuki Gixxer SF) भी हाई-एथेनॉल फ्यूल को सपोर्ट करने वाली बाइक की सूची में शामिल है।



क्रूड इम्पोर्ट घटाना है सरकार का लक्ष्य

भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल विदेश से आयात करता है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। हालांकि. वित्त वर्ष 2026 में आयात बिल $137 बिलियन से घटकर $123 बिलियन हुआ है। लेकिन सरकार इसे और कम करना चाहती है।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर जोर दिया है। एथेनॉल को घरेलू कृषि उत्पादों से बनाया जाता है, इसलिए इसकी लागत कम रहती है। इससे किसानों को भी फायदा होगा।



E85 फ्यूल की दिशा में यह कदम भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) की ओर एक मजबूत पहल है।



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