पानी खींचने से धरती की धुरी 31.5 इंच खिसकी, करोड़ों लोगों पर मंडरा रहा खतरा!
Jitendra Shrivastava | Jun 06, 2026, 18:47 IST
Photograph: (THESOOTR)
INTERNATIONAL DESK. भूजल निकासी से पृथ्वी की धुरी 31.5 इंच खिसक गई है। नासा-सियोल रिसर्च के मुताबिक 2150 गीगाटन पानी निकालने के कारण महाप्रलय का खतरा बढ़ गया है।
ऐसे समझें पूरा मामला...
- पृथ्वी की धुरी 31.5 इंच खिसकी: नासा रिसर्च।
- 2150 गीगाटन भूजल निकालने से असंतुलन हुआ।
- समुद्र का जलस्तर 6.24 मिमी तक बढ़ा है।
- 40 नदी डेल्टा तेजी से धंस रहे हैं।
- एक्विफर्स दोबारा भरे जा सकते हैं: वैज्ञानिक।
धरती की धुरी 31.5 इंच खिसकी
यह पानी इतनी भारी मात्रा में था कि इससे समुद्र का जलस्तर (Sea Level Rise) करीब 6.24 मिलीमीटर तक बढ़ गया। पानी का यह विशाल वजन जब जमीन के नीचे से निकलकर समुद्र में जा मिला, तो पृथ्वी का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। इसकी वजह से पृथ्वी का रोटेशनल पोल (Rotational Pole) रिकॉर्ड 31.5 इंच तक खिसक गया। यह डगमगाना बिल्कुल एक घूमते हुए लट्टू जैसा है।
2150 गीगाटन पानी और लट्टू जैसी धरती
ठीक यही पृथ्वी के साथ हुआ है। वैज्ञानिकों ने बताया कि पृथ्वी तब सबसे ज्यादा डगमगाती है जब मध्य अक्षांश (Mid-Latitude) वाले देशों से पानी खींचा जाए। इसका सीधा और घातक असर पृथ्वी के घूमने की रफ्तार और उसके संतुलन पर पड़ता है।
महाप्रलय की दस्तक: भूकंप और बाढ़
'नेचर वॉटर' की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 21 फीसदी तटीय इलाकों में भूजल स्तर (Groundwater Level) डराने वाली तेजी से नीचे गिरा है। तटीय इलाकों में अब समुद्र का खारा और जहरीला पानी घुसने लगा है।
करोड़ों लोगों का पानी खतरे में
earth axis shifted
वैज्ञानिकों की नई तकनीक और शोध
नासा के वैज्ञानिक सुरेंद्र अधिकारी ने माना कि बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव, ग्रीनलैंड की बर्फ का पिघलना और पृथ्वी की आंतरिक हलचलें भी बड़ी भूमिका निभा रही है।
क्या होता है Aquifer
- कार्यप्रणाली: एक्वीफर जमीन के अंदर स्पंज की तरह काम करता है। इसमें छोटे-छोटे छिद्र और दरारें होती हैं, जो पानी को जमा रखती हैं।
- उपयोग: हम जो पानी हैंडपंप, ट्यूबवेल या कुओं से निकालते हैं, वह इसी जलभृत से आता है।
- जल स्तर: एक्वीफर का ऊपरी हिस्सा जल तालिका कहलाता है। यह बताता है कि जमीन के भीतर पानी कितना ऊंचाई तक भरा है।
क्या है इस तबाही का हल?
नतीजा यह हुआ कि सूखे एक्विफर्स (Aquifers) यानी जलदायी स्तर दोबारा पानी से भर गए और जमीन का धंसना रुक गया, लेकिन अगर इंसानों ने तुरंत अपनी आदतें नहीं बदलीं। पानी की बर्बादी नहीं रोकी और पाताल को खोखला करना बंद नहीं किया, तो पृथ्वी का यह झुकाव मानव सभ्यता के विनाश का अंतिम अध्याय लिख देगा।
FAQ
- पृथ्वी की धुरी खिसकने का मतलब क्या होता है और इसका जनजीवन पर क्या असर पड़ेगा?
पृथ्वी की धुरी खिसकने का मतलब है उसके रोटेशनल पोल (Rotational Pole) का अपनी पुरानी स्थिति से हट जाना। जब जमीन के नीचे से अंधाधुंध भूजल निकासी (Groundwater Extraction) की जाती है तो पृथ्वी के भार का वितरण बदल जाता है। नासा की रिसर्च के मुताबिक, 1993 से 2010 के बीच 2150 गीगाटन भूजल निकालने से धुरी 31.5 इंच तक खिसक गई। इसके परिणामस्वरूप मौसम के पैटर्न बदलेंगे, भयंकर बाढ़, भूकंप और अभूतपूर्व गर्मी जैसी महाप्रलय की संभावना बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर करोड़ों लोगों के जनजीवन पर पड़ेगा। - भूजल संकट और समुद्र के जलस्तर में वृद्धि आपस में कैसे जुड़े हैं?
भूजल संकट (Groundwater Crisis) और समुद्र जलस्तर वृद्धि (Sea Level Rise) एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। जब जमीन के नीचे के एक्विफर्स (Aquifers) से पानी निकालकर खेतों और शहरों में उपयोग किया जाता है, तो वह पानी अंत में नदियों और बारिश के जरिए समुद्र में पहुंच जाता है। सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी की रिसर्च के मुताबिक इसी कारण समुद्र का जलस्तर 6.24 मिलीमीटर बढ़ा है। इससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ता है और खारा समुद्री पानी तटीय भूजल स्रोतों को भी प्रदूषित कर देता है, जिससे पीने के पानी की भारी किल्लत होती है। - क्या भूजल निकासी की इस समस्या का कोई समाधान संभव है?
हां, समाधान संभव है लेकिन इसके लिए तत्काल और कठोर कदम उठाने होंगे। 'साइंस' मैगजीन की समीक्षा में 67 ऐसे मामलों का उल्लेख है जहां कृत्रिम तरीके से एक्विफर्स (Aquifers) को दोबारा भरा गया और सफलता मिली। इसके लिए वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), सिंचाई के वैकल्पिक तरीकों को अपनाना और पानी की बर्बादी रोकना जरूरी है। साथ ही सरकारों को भूजल दोहन पर सख्त नीतियां बनानी होंगी। अगर समय रहते ये कदम नहीं उठाए गए तो पृथ्वी की धुरी का खिसकाव और भूजल संकट मिलकर मानव सभ्यता के लिए अपूरणीय क्षति का कारण बन सकते हैं।
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