अमेरिका का ग्रीन कार्ड अब क्यों हो रहा महंगा, EB-5 वीजा के लिए लगेंगे 12 करोड़

CHAKRESH | Jul 03, 2026, 12:33 IST
ग्रीन कार्ड की फीस उड़ाएगी धुआं
अमेरिका के DHS ने EB-5 निवेशक वीजा की सीमा 33% बढ़ाकर 14 लाख डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है। जानिए भारतीय H-1B धारकों पर क्या असर होगा और सितंबर 2026 की डेडलाइन क्यों जरूरी है।

समझें क्या है मामला

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी यानी DHS ने EB-5 वीजा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। सामान्य यानी गैर टारगेटेड इलाकों में निवेश सीमा 10.5 लाख डॉलर से बढ़कर 14 लाख डॉलर हो सकती है।



गरीब और ग्रामीण इलाकों वाली TEA श्रेणी में सीमा आठ लाख डॉलर पर ही टिकी रहेगी। 30 सितंबर 2026 से पहले जो निवेशक आवेदन कर देंगे, उन पर पुरानी शर्तें ही लागू होंगी।



अमेरिका का ग्रीन कार्ड हो रहा है महंगा


अमेरिका में ग्रीन कार्ड होगा महंगा

अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने का एक रास्ता अब जेब पर और भी भारी पड़ने वाला है। अमेरिकी सरकार के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने निवेशक वीजा की न्यूनतम रकम में सीधे 33 फीसदी बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव रखा है। कल तक जो निवेश करीब नौ करोड़ रुपए में हो जाता था, वो अब 12 करोड़ रुपए से ऊपर जा सकता है।



यह मामला आपसे क्यों जुड़ा है

अगर आपके घर में कोई अमेरिका में H-1B वीजा (H-1B वीजा धारक भारतीय) पर काम कर रहा है, तो यह खबर सीधे उसके काम की है। नौकरी आधारित ग्रीन कार्ड की लाइन इतनी लंबी हो चुकी है कि भारतीयों को कई बार दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में EB-5 एक शॉर्टकट माना जाता रहा है। लेकिन सवाल यह है, अगर शॉर्टकट ही महंगा हो जाए तो क्या करें?



पहले क्या था

साल 2019 में ट्रंप प्रशासन के दौर में यही सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 18 लाख डॉलर कर दी गई थी। इसके बाद 2022 में कांग्रेस ने EB-5 Reform and Integrity Act यानी RIA पास किया और सीमा घटाकर 10.5 लाख डॉलर और TEA प्रोजेक्ट्स के लिए आठ लाख डॉलर तय कर दी। यही आंकड़े अभी तक चल रहे हैं।



रीजनल सेंटर प्रोग्राम की कानूनी मंजूरी सितंबर 2027 तक है। लेकिन उसके आगे प्रोग्राम चलेगा या नहीं, यह अमेरिकी कांग्रेस के अगले फैसले पर टिका है। यहीं से मामला पलटता है, क्योंकि इसी अनिश्चितता ने ग्रैंडफादरिंग डेडलाइन को इतना अहम बना दिया है।



क्या हुआ और क्यों

DHS का नया प्रस्ताव सिर्फ निवेश सीमा तक सीमित नहीं है। इसमें ऑडिट पावर बढ़ाना, बायोमेट्रिक जांच अनिवार्य करना और प्रमोटरों का रजिस्ट्रेशन शामिल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक DHS troubled business वाले पुराने रास्ते को भी खत्म करना चाहता है, जिसके तहत निवेशक घाटे में चल रही कंपनियों की नौकरियां बचाकर भी वीजा पा सकते थे।



यह वैसा ही है जैसे कोई टोल प्लाजा अपनी दरें तो बढ़ाए ही, साथ में हर गाड़ी की जांच भी सख्त कर दे। DHS के मुताबिक यह नई 14 लाख डॉलर की सीमा उन प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी जो किसी ऐसे महानगरीय इलाके में आते हैं जिसे हाई एम्प्लॉयमेंट एरिया माना जाता है।



गोल्डन गेट ग्लोबल की क्रिस्टीना तबाको का कहना है कि यह प्रस्ताव लंबे समय से अटका हुआ कदम है। उनके मुताबिक इसमें भले ही कुछ खास चौंकाने वाला न हो, लेकिन अगर यह लागू हुआ तो रीजनल सेंटर किस तरह के निवेश ऑफर करते हैं, यह बदल सकता है।



कौन-कौन शामिल है

USCIS (United States Citizenship and Immigration Services) और DHS इस नियम को लागू करने वाली एजेंसियां हैं। रीजनल सेंटर वो कंपनियां हैं जो निवेशकों का पैसा जुटाकर बड़े प्रोजेक्ट्स में लगाती हैं। इमिग्रेशन वकील निवेशकों को सही रास्ता चुनने में मदद करते हैं। इसमें सबसे अहम पक्ष हैं वो भारतीय पेशेवर, खासकर H-1B धारक, जो ग्रीन कार्ड की लंबी कतार से बचना चाहते हैं।



दोनों तरफ की बात

निवेशक और इमिग्रेशन कंसल्टेंट मानते हैं कि बढ़ी हुई सीमा और सख्त निगरानी से प्रोसेस महंगा और जटिल हो जाएगा। दूसरी तरफ DHS का तर्क है कि यह कदम प्रोग्राम में धोखाधड़ी रोकने और असली नौकरियां पैदा करने के मकसद से जरूरी है। दोनों पक्षों की चिंता अपनी जगह वाजिब है, फैसला अभी सिर्फ प्रस्ताव के स्तर पर है।



आगे क्या होगा

इस प्रस्ताव पर जनता की राय 31 अगस्त 2026 तक ली जाएगी, उसके बाद DHS फाइनल नियम जारी करेगा। तब तक के लिए 30 सितंबर 2026 की ग्रैंडफादरिंग डेडलाइन सबसे बड़ा फैक्टर बनी रहेगी। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस डेडलाइन से पहले आवेदनों की बाढ़ आ सकती है, और उसके बाद अचानक सन्नाटा।



एक बात जो आप नहीं जानते थे

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि यह नियम हर EB-5 निवेशक को महंगा पड़ेगा। असल बात यह है कि भारत से जाने वाले ज्यादातर निवेशक पहले से ही कम कीमत वाली ग्रामीण या हाई अनएम्प्लॉयमेंट श्रेणी चुनते हैं, जहां सीमा आठ लाख डॉलर पर ही बनी रहेगी।



अब आप क्या करें

  • अब आप क्या करें: अगर परिवार में कोई EB-5 पर विचार कर रहा है, तो पहले TEA श्रेणी की योग्यता जरूर चेक करें।
  • क्यों अभी: 30 सितंबर 2026 की ग्रैंडफादरिंग डेडलाइन नजदीक आ रही है।
  • आगे देखें: 31 अगस्त 2026 को पब्लिक कमेंट पीरियड खत्म होगा, उसके बाद फाइनल नियम आएगा।

FAQ

  1. EB-5 निवेश सीमा में कितनी बढ़ोतरी प्रस्तावित है?
    गैर टारगेटेड इलाकों में निवेश सीमा 10.5 लाख डॉलर से बढ़ाकर 14 लाख डॉलर करने का प्रस्ताव है। यह करीब 33 फीसदी बढ़ोतरी है। TEA और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सीमा 8 लाख डॉलर पर ही रहेगी।
  2. क्या यह नियम सभी भारतीय निवेशकों पर लागू होगा?
    नहीं। ज्यादातर भारतीय निवेशक कम सीमा वाली TEA श्रेणी चुनते हैं, इसलिए वे सीधे प्रभावित नहीं होंगे। असर मुख्य रूप से गैर टारगेटेड शहरी प्रोजेक्ट्स चुनने वालों पर पड़ेगा।

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