SIR वाले फॉर्म-6 से हटा अतिरिक्त घोषणा पत्र, चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
हालांकि जिन राज्यों में अभी SIR प्रक्रिया चल रही है, वहां फॉर्म-6 में यह जानकारी देनी होगी। यह बदलाव ECINET पोर्टल पर किया गया है।
क्या जानकारी मांगी जा रही थी?
फॉर्म-6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा पत्र में आवेदक से पूछा जा रहा था कि क्या उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में दर्ज था।
अगर नाम दर्ज था तो आवेदक से EPIC नंबर, राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र, पार्ट नंबर और सीरियल नंबर जैसी जानकारी मांगी जा रही थी।
SIR पूरा होने के बाद क्यों हटाया गया?
एसआईआर के दौरान पुराने मतदाता रिकॉर्ड और मौजूदा वोटर लिस्ट की जांच की जाती है। ऐसे में जिन राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए वोटर से दोबारा यह जानकारी लेना जरूरी नहीं माना गया।
वहीं जिन राज्यों में SIR अभी जारी है, वहां पुराने रिकॉर्ड से मिलान के लिए यह जानकारी ली जा रही है।
दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी जानकारी जोड़ने पर आपत्ति जताई थी।
उनका कहना था कि फॉर्म-6 एक तय वैधानिक फॉर्म है और इसमें बदलाव के लिए नियमों में संशोधन जरूरी है।
सुखबीर सिंह संधू ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में जोड़े गए इस हिस्से को हटाने की बात कही थी।
अब SIR पूरा कर चुके राज्यों में फॉर्म-6 प्रक्रिया पहले की तरह सरल कर दी गई है।
कितने राज्यों में हो चुका है SIR?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के पहले और दूसरे चरण में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल रहे। इन राज्यों में मतदाता सूची के पुराने रिकॉर्ड और नए मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया गया।
एसआईआर के बाद हुए चुनावों में बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम में भाजपा की जीत हुई। वहीं केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में थलापति विजय की राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (Tamilaga Vettri Kazhagam) ने जीत दर्ज की। चुनाव आयोग ने असम में SIR की जगह स्पेशल रिवीजन (SR) की थी। यहां भी भाजपा की सरकार बनी।
तीसरे चरण में 16 राज्यों में शरू होगी SIR की प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने 14 मई को दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और उत्तराखंड समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कराने की घोषणा की थी। इसे SIR का तीसरा चरण बताया गया है।
इस पूरी प्रक्रिया को 30 मई से 23 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है।
तीसरे चरण में शामिल राज्यों में पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं अन्य राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव प्रस्तावित हैं।