निजी कर्मचारियों को झटका, सरकार ने पीएफ की लिमिट 15 से बढ़ाकर की 25 हजार
केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को EPF और EPS के लिए अनिवार्य बेसिक सैलरी लिमिट बढ़ाकर 25 हजार रुपए प्रति महीना कर दी है।
अब कंपनियों को 25 हजार रुपए तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को PF के दायरे में शामिल करना ही होगा। पहले यह लिमिट 15 हजार रुपए प्रति महीना थी। यह बदलाव करीब 12 साल बाद हुआ है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि इससे 51 लाख कर्मचारियों को PF बचत और पेंशन का सीधा फायदा मिलेगा।
पहले क्या नियम था, अब क्या बदला
पहले 15 हजार रुपए से ज्यादा बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों का PF कटना या न कटना उनकी मर्जी पर निर्भर करता था। नए आदेश के बाद 25 हजार रुपए की लिमिट होने से PF कटने से कर्मचारी की बचत बढ़ेगी और रिटायरमेंट के समय उन्हें बड़ा फंड मिल सकेगा।
आसान भाषा में समझें नया नियम
EPF में 25 हजार रुपए की अनिवार्य कवरेज सैलरी लिमिट का मतलब यह है कि अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता यानी DA को मिलाकर 25 हजार रुपए या उससे कम है, तो कंपनी को उस कर्मचारी को EPF में शामिल करना अनिवार्य होगा। पहले यह सीमा 15 हजार रुपए थी, और इससे ज्यादा बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए यह वैकल्पिक था।
वहीं अगर बेसिक सैलरी और DA मिलाकर 25 हजार रुपए से ज्यादा है, तो नई जॉइनिंग पर EPF अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन यह छूट तभी मिलेगी जब कर्मचारी पहले से EPF का सदस्य न हो। यह लिमिट मुख्य रूप से बेसिक सैलरी और DA पर लागू होती है, न कि पूरे CTC या ग्रॉस सैलरी पर।
उदाहरणों से समझें पूरा गणित
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA मिलाकर 12 हजार रुपए है, तो कंपनी को उसे EPF में शामिल करना अनिवार्य है। इसमें कर्मचारी का योगदान 12 प्रतिशत के हिसाब से 1,440 रुपए होगा और कंपनी भी करीब इतना ही योगदान देगी।
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA ठीक 25 हजार रुपए है, तो भी EPF अनिवार्य रहेगा। इसमें कर्मचारी का योगदान 12 प्रतिशत के हिसाब से 3 हजार रुपए होगा और कंपनी भी इसी राशि पर योगदान देगी।
अगर कोई कर्मचारी पहली बार नौकरी जॉइन कर रहा है और उसकी बेसिक सैलरी व DA 40 हजार रुपए है, और पहले उसका कभी EPF खाता नहीं रहा है, तो उसे EPF में शामिल करना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि अगर कंपनी और कर्मचारी दोनों सहमत हों, तो वे इसमें शामिल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में अनिवार्य योगदान सिर्फ 25 हजार रुपए पर ही होगा, यानी कर्मचारी से सिर्फ 3 हजार रुपए ही कटेंगे। अगर दोनों पक्ष चाहें, तो पूरी 40 हजार रुपए की राशि पर 12 प्रतिशत यानी 4,800 रुपए भी कटवाए जा सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा।
वहीं अगर कोई कर्मचारी पहले से EPF सदस्य है और उसकी सैलरी पहले 12 हजार रुपए थी, लेकिन प्रमोशन के बाद बेसिक सैलरी और DA मिलाकर 50 हजार रुपए हो गई है, तो उसका EPF खाता पहले की तरह जारी रहेगा। हालांकि उसका अनिवार्य योगदान अब भी सिर्फ 25 हजार रुपए तक यानी 3 हजार रुपए ही रहेगा। इससे ऊपर के योगदान का फैसला कंपनी की नीति और आपसी सहमति पर निर्भर करेगा।
एक्सपर्ट कोट्स
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि EPF और EPS की सैलरी लिमिट बढ़ाए जाने से 51 लाख कर्मचारियों को PF बचत और पेंशन का सीधा फायदा मिलेगा।
FAQ
- EPF की नई सैलरी लिमिट क्या है?
केंद्रीय कैबिनेट ने EPF और EPS के लिए अनिवार्य बेसिक सैलरी लिमिट 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दी है। यानी अब 25 हजार रुपए तक बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों का PF कटना अनिवार्य होगा। - इस बदलाव से कितने कर्मचारियों को फायदा होगा?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक इस बदलाव से देशभर के करीब 51 लाख कर्मचारियों को PF बचत और पेंशन का सीधा फायदा मिलेगा। - अगर सैलरी 25 हजार रुपए से ज्यादा है तो क्या होगा?
अगर कोई कर्मचारी नई जॉइनिंग पर है और उसकी बेसिक सैलरी व DA 25 हजार रुपए से ज्यादा है, तो उसके लिए EPF अनिवार्य नहीं है, बशर्ते वह पहले से EPF सदस्य न हो। हालांकि कंपनी और कर्मचारी आपसी सहमति से इसमें शामिल हो सकते हैं।
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