क्या LPG की जगह लेगा एथेनॉल? गडकरी के नए स्टोव पर चर्चा

Pawan Modiya | May 28, 2026, 24:43 IST
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल आधारित नए स्टोव की तकनीक पेश की है। दावा है कि यह LPG से सस्ता पड़ेगा। सरकार इसे स्वच्छ और सस्ता विकल्प बता रही है। लेकिन विशेषज्ञ इसकी व्यवहारिकता और सप्लाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • नितिन गडकरी ने नया एथेनॉल स्टोव पेश किया।
  • दावा है कि यह LPG से सस्ता पड़ेगा।
  • स्टोव एथेनॉल और पानी के मिश्रण से चलेगा।
  • सरकार इसे स्वच्छ ईंधन विकल्प बता रही है।
  • विशेषज्ञ इसकी सफलता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

एथेनॉल स्टोव को लेकर अचानक चर्चा क्यों बढ़ी?

देश में LPG कीमत और सप्लाई चिंता बढ़ा रही है। इसी बीच नई तकनीक चर्चा में आ गई। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नया स्टोव पेश किया।


यह स्टोव एथेनॉल आधारित तकनीक पर काम करेगा। गडकरी ने नागपुर कार्यक्रम में इसका प्रदर्शन किया। उन्होंने इसे सस्ता और स्वच्छ विकल्प बताया। सरकार अब बायोफ्यूल पर ज्यादा जोर दे रही है। एथेनॉल उसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा।



एथेनॉल स्टोव कैसे काम करेगा?

यह स्टोव सीधे शुद्ध एथेनॉल से नहीं चलेगा। इसमें एथेनॉल और पानी का मिश्रण उपयोग होगा। दावे के अनुसार इससे साफ लौ पैदा होगी। धुआं और प्रदूषण कम करने की बात कही गई। सरकार इसे सुरक्षित विकल्प भी बता रही है। किरासन और कोयले से बेहतर विकल्प माना जा रहा।



सरकार एथेनॉल को इतना बढ़ावा क्यों दे रही?

भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। इससे सरकार पर भारी खर्च बढ़ता है। गडकरी कई बार आयात निर्भरता घटाने की बात कह चुके। एथेनॉल उसी दिशा का बड़ा कदम माना जा रहा। सरकार पहले पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ा चुकी है। अब रसोई तक इसका उपयोग बढ़ाने की तैयारी दिख रही। 2014 में मिश्रण बहुत कम बताया जाता था। अब यह करीब 20 फीसदी तक पहुंच चुका है।



क्या एथेनॉल स्टोव सच में LPG से सस्ता होगा?

गडकरी ने दावा किया कि खर्च कम होगा। खासकर व्यावसायिक सिलेंडर से तुलना की गई। लेकिन विशेषज्ञ अभी पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि बड़े स्तर पर परीक्षण जरूरी होगा। सफलता सप्लाई और कीमत पर निर्भर करेगी। ग्रामीण और शहरी नेटवर्क भी मजबूत होना चाहिए। भारत में LPG सिस्टम पहले से मजबूत है। ऐसे में बदलाव आसान नहीं माना जा रहा।



किसानों और बाजार को इससे क्या फायदा हो सकता?

एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और अनाज से बनता है। इससे किसानों को नया बाजार मिल सकता है। सरकार मानती है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। बायोफ्यूल उद्योग में निवेश भी बढ़ सकता है। लेकिन कुछ विशेषज्ञ दूसरी चिंता भी जता रहे हैं।


उनका कहना है कि पानी खपत बढ़ सकती है। गन्ना पहले से ज्यादा पानी मांगने वाली फसल है। इसलिए संतुलन जरूरी माना जा रहा है।



सोशल मीडिया पर लोग क्या सवाल उठा रहे?

सोशल मीडिया पर इस तकनीक को लेकर बहस तेज है। कुछ लोग इसे बड़ा बदलाव बता रहे हैं। वहीं कई लोग व्यवहारिकता पर सवाल उठा रहे। कुछ विशेषज्ञ लागत और सुरक्षा पर चर्चा कर रहे। ऑनलाइन चर्चाओं में सप्लाई सबसे बड़ा मुद्दा दिखा। लोग पूछ रहे हैं कि ईंधन उपलब्ध कैसे होगा।



सरकार स्वच्छ ऊर्जा पर तेजी से काम कर रही है। एथेनॉल स्टोव उसी दिशा की नई कोशिश माना जा रहा। लेकिन अभी यह शुरुआती चरण में दिख रहा है। बड़े स्तर पर सफलता बाकी है। अगर तकनीक सस्ती और सुरक्षित साबित हुई तो बदलाव संभव। फिलहाल लोग इसके अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।



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