पहली बार ITR फाइलिंग में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना हो सकती है परेशानी
अगर आप पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न भरने जा रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। सही टैक्स रिजीम का चुनाव और जरूरी दस्तावेजों की तैयारी करने से ITR भरने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
इस बार नहीं देनी होगी लेट फीस
इस बार ITR भरने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। अगर आपकी आय टैक्स स्लैब के दायरे में आती है और आप अपना वित्तीय रिकॉर्ड बेहतर रखना चाहते हैं तो इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना जरूरी है।
पहली बार ITR भरने वाले लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। ऐसे में रिटर्न दाखिल करने से पहले जरूरी जानकारी हासिल करना महत्वपूर्ण है।
इन लोगों के लिए ITR भरना जरूरी
सरकार ने एक तय आय सीमा तक टैक्स में छूट दी है। अगर आपकी आय इस सीमा से अधिक है तो ITR भरना जरूरी होता है। इसके अलावा कुछ परिस्थितियों में भी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य होता है।
- अगर आपके पास भारत या विदेश में कोई अचल संपत्ति है।
- आपने शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश किया है।
- बैंक खाते में तय सीमा से ज्यादा नकदी जमा है।
- सालाना बिजली बिल 1 लाख रुपए से अधिक है।
- विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपए से ज्यादा खर्च किया है तो ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है।
- अगर आपके व्यापार या प्रोफेशन का सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपए से अधिक है तो भी आपको ITR भरना पड़ सकता है।
31 अगस्त तक भरना है ITR
आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 (Assessment Year 2026-27) के लिए ITR-1 से लेकर ITR-7 तक सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन फॉर्म उपलब्ध करा दिए हैं।
इस बार टैक्सपेयर्स 31 अगस्त 2026 तक बिना किसी पेनाल्टी या लेट फीस के अपना ITR दाखिल कर सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि अंतिम समय में वेबसाइट पर बढ़ने वाले ट्रैफिक और तकनीकी परेशानियों से बचने के लिए समय रहते रिटर्न फाइल कर लेना चाहिए।
सही Tax Regime का करें चुनाव
ITR दाखिल करने से पहले सही टैक्स रिजीम चुनना बेहद जरूरी है। आपकी आय में वेतन, बैंक FD का ब्याज, डिविडेंड और मकान के किराए से होने वाली कमाई शामिल होती है।
इसके बाद आपके निवेश और उपलब्ध छूट के आधार पर तय होता है कि आपके लिए कौन सी टैक्स व्यवस्था बेहतर रहेगी।
बड़ा निवेश है तो चुनें पुरानी व्यवस्था
अगर आपने PPF, NPS, जीवन बीमा, होम लोन के ब्याज और बच्चों की ट्यूशन फीस जैसी योजनाओं में निवेश किया है और टैक्स छूट का लाभ लेना चाहते हैं तो पुरानी टैक्स व्यवस्था आपके लिए बेहतर हो सकती है।
नई टैक्स व्यवस्था
अगर आपने कोई बड़ा निवेश नहीं किया है तो कम टैक्स रेट का लाभ लेने के लिए नई टैक्स व्यवस्था चुन सकते हैं। सही विकल्प चुनने के लिए ऑनलाइन टैक्स कैलकुलेटर की मदद ली जा सकती है।
पहली बार ITR भर रहे हैं तो तैयार रखें ये दस्तावेज
पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। इससे रिटर्न फाइल करते Mistake in ITR Filing से बचा जा सकता है।
- पहचान पत्र-ITR दाखिल करने के लिए पैन कार्ड और आधार कार्ड जरूरी हैं। ध्यान रखें कि आपका पैन कार्ड आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए।
- आय के प्रमाण-वेतनभोगी कर्मचारियों को नियोक्ता की ओर से जारी फॉर्म 16 की जरूरत होती है। अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है तो पुराने और नए दोनों नियोक्ताओं से फॉर्म 16 लेना जरूरी है।
- वित्तीय विवरण-रिटर्न दाखिल करने के लिए बैंक खाते की पासबुक या स्टेटमेंट, होम लोन इंटरेस्ट सर्टिफिकेट और निवेश से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें।
AIS और Form 26AS जरूर जांचें
इनकम टैक्स पोर्टल से AIS और Form 26AS डाउनलोड करें। इसमें बैंक ब्याज, शेयर ट्रांजैक्शन और कटे हुए TDS की जानकारी होती है। इससे टैक्स से जुड़े आंकड़ों का मिलान करना आसान हो जाता है।
अपनी आय के अनुसार चुनें सही ITR फॉर्म
गलत ITR फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव घोषित हो सकता है। इसलिए अपनी आय के अनुसार सही फॉर्म चुनना जरूरी है।
ITR-1
ITR Form-1 यह वेतनभोगी लोगों के लिए होता है। इसमें वे लोग शामिल होते हैं जिनकी कुल आय वेतन, एक मकान और अन्य स्रोतों से मिलने वाले ब्याज सहित 50 लाख रुपए तक है।
ITR-2
अगर आपकी आय में शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से होने वाला कैपिटल गेन शामिल है या एक से ज्यादा मकानों से आय होती है तो ITR-2 भरना होता है।
ITR-3
बिजनेस, पार्टनरशिप फर्म या स्वतंत्र पेशे से आय करने वाले लोगों के लिए ITR-3 होता है।
ITR-4
यह छोटे व्यापारियों और पेशेवरों के लिए है, जो अनुमानित आय योजना (Presumptive Taxation Scheme) के तहत रिटर्न दाखिल करते हैं।
30 दिनों में करें ई-वेरिफिकेशन
कई टैक्सपेयर्स मानते हैं कि ITR सबमिट करने के बाद प्रक्रिया पूरी हो जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है। रिटर्न को मान्य करने के लिए 30 दिनों के अंदर ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी होता है।
ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन
आधार OTP, नेट बैंकिंग या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) के जरिए ITR को ऑनलाइन वेरीफाई किया जा सकता है।
ऑफलाइन ई-वेरिफिकेशन
अगर ऑनलाइन वेरिफिकेशन नहीं कर पा रहे हैं तो ITR-V फॉर्म का प्रिंट निकालकर उस पर हस्ताक्षर करें। इसके बाद इसे स्पीड पोस्ट के जरिए आयकर विभाग के CPC, बेंगलुरु कार्यालय भेजना होगा। यह फॉर्म भी 30 दिनों के अंदर पहुंचना जरूरी है।
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