गयाजी में ऑनलाइन पिंडदान पर विवाद, पितृपक्ष पैकेज पर पुरोहितों का भारी विरोध

Manya Jain | Sept 21, 2026, 13:48 IST
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गयाजी में ऑनलाइन पिंडदान और पैकेजों को लेकर विवाद शुरू हो गया है। तीर्थ पुरोहितों ने इसे सनातन परंपरा के खिलाफ बताया है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन के नाम पर श्रद्धालुओं के साथ ठगी की जा रही है।

बिहार के गया जी में पितृपक्ष के दौरान ऑनलाइन पिंडदान और पैकेज व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गयापाल तीर्थ पुरोहितों ने इसका कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि पिंडदान सनातन परंपरा और शास्त्र-सम्मत विधान है। इसे ऑनलाइन माध्यम या होटल पैकेज के जरिए कराना उचित नहीं है। पुरोहितों ने ऑनलाइन पिंडदान के नाम पर तीर्थयात्रियों से ठगी होने का भी आरोप लगाया है।



मोक्षस्थली के रूप में मशहूर गयाजी में हर साल लाखों श्रद्धालु पितृपक्ष के दौरान पिंडदान करने पहुंचते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में कई वेबसाइटों और संस्थाओं ने ऑनलाइन पिंडदान के नाम पर पैकेज बेचना शुरू कर दिया है, जिस पर अब पुरोहितों ने कड़ी आपत्ति जताई है।



शास्त्रों में कोई प्रमाण नहीं

श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के सचिव गजाधर लाल पाठक ने कहा कि ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था का धार्मिक ग्रंथों, वेदों और शास्त्रों में कहीं कोई प्रमाण नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से इस व्यवस्था का विरोध करते आ रहे हैं।



उनका मानना है कि धार्मिक विधि को ऑनलाइन माध्यम से पूरा करना शास्त्रों की मूल भावना के खिलाफ है।



गयाजी आए बिना नहीं मिलता सुफल

नारायण सवद सेवक गयापाल पंडा दीपू जी भैया ने कहा कि पिंडदान पूरी तरह वैदिक परंपरा से जुड़ा धार्मिक विधान है। उनके अनुसार इसे ऑनलाइन माध्यम से पूरा नहीं किया जा सकता। गयाजी आने वाले पिंडदानियों के लिए यहां की प्रक्रिया में सुफल का खास महत्व होता है।



उन्होंने सवाल उठाया कि जब श्रद्धालु गयाजी आएंगे ही नहीं, तो परंपरा के अनुसार सुफल कैसे प्राप्त होगा। उनके मुताबिक किसी अन्य माध्यम से गया श्राद्ध पूरा होने की बात मानना सही नहीं है।



पीढ़ियों पुराना रिश्ता प्रभावित होने की आशंका

दीपू जी भैया ने बताया कि गयावाल तीर्थ पुरोहितों का श्रद्धालुओं से दादा-परदादा के समय से नाता रहा है। कई परिवार पीढ़ियों से उन्हीं पुरोहितों के जरिए पिंडदान करते आए हैं।



उनका कहना है कि बाहरी लोगों द्वारा गलत तरीके से पिंडदान कराने से श्रद्धालुओं में भ्रम पैदा होता है। इससे पारंपरिक गयापाल व्यवस्था की छवि को भी नुकसान पहुंचता है।



वरिष्ठ गयापाल ने जताई गहरी चिंता

वरिष्ठ गयापाल राजन सिजुआर ने कहा कि गयाजी में पिंडदान की परंपरा सनातन काल से तीर्थ पुरोहितों से जुड़ी रही है। यहां आने वाले पिंडदानी फल्गु नदी में तर्पण करने के बाद विभिन्न वेदियों पर पिंडदान की परंपरा निभाते हैं।



उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के दौरान कई वेबसाइटों पर ऑनलाइन पिंडदान के विज्ञापन और बुकिंग की पेशकश की जा रही है। कहीं कम कीमत का दावा किया जा रहा है, तो कहीं अलग-अलग राशि के पैकेज बेचे जा रहे हैं।



आंदोलन की दी चेतावनी

राजन सिजुआर ने साफ कहा कि गयाजी का पितृपक्ष में पिंडदानकोई पर्यटन पैकेज नहीं, बल्कि आस्था और धार्मिक परंपरा से जुड़ा विधान है। उन्होंने पर्यटन विभाग से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है।



गयापाल तीर्थ पुरोहितों ने चेतावनी दी है कि अगर ऑनलाइन पिंडदान की बुकिंग और पैकेज व्यवस्था बंद नहीं हुई, तो वे अपनी परंपरा की रक्षा के लिए सामूहिक आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे।



एक्सपर्ट कोट्स



  1. गजाधर लाल पाठक (सचिव, श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति) ने कहा कि ऑनलाइन पिंडदान का धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों में कोई प्रमाण नहीं मिलता।
  2. दीपू जी भैया (नारायण सवद सेवक गयापाल पंडा) ने कहा कि पिंडदान वैदिक परंपरा से जुड़ा विधान है, जिसे ऑनलाइन माध्यम से पूरा नहीं किया जा सकता।
  3. राजन सिजुआर (वरिष्ठ गयापाल) ने कहा कि गयाजी का पिंडदान पर्यटन पैकेज नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा धार्मिक विधान है।

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