टाटा में सत्ता संग्राम: टाटा संस की 100 साल पुरानी लीगेसी और पावर स्ट्रगल की इनसाइड स्टोरी
CHAKRESH | Sept 21, 2026, 13:10 IST
टाटा में सत्ता संग्राम
भरोसे का दूसरा नाम टाटा है। वहीं, कुछ समय से इस समूह में कुछ ठीक नहीं चल रहा। लगभग 17.37 लाख करोड़ से ज्यादा वैल्यू वाले इस समूह में 100 से अधिक कंपनियां हैं। इसी समूह के भीतर एक ऐसी दरार खुलकर सामने आई, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है।
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टाटा की कहानी शुरू से समझते हैं
दशकों बाद, 2012 में जब रतन टाटा ने चेयरमैन पद छोड़ा, तो उसी परिवार से साइरस मिस्त्री को उनका उत्तराधिकारी चुना गया। लेकिन मिस्त्री की सोच जल्द ही रतन टाटा के विजन से टकराने लगी। रतन टाटा टेटली, कोरस और जगुआर लैंड रोवर जैसे बड़े ग्लोबल अधिग्रहण करके समूह को दुनियाभर में फैलाना चाहते थे। मिस्त्री का मानना था कि अब कंसोलिडेशन का वक्त है, ज्यादा फैलाव का नहीं।
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2016 में खुलकर सामने आया टकराव
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एन चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाया गया। वे टाटा संस के इतिहास में पहले गैर-पारसी चेयरमैन बने। 2022 में एक सड़क हादसे में साइरस मिस्त्री का निधन हो गया। रतन टाटा के निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने, और चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन बने रहे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एन चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाया गया। वे टाटा संस के इतिहास में पहले गैर- पारसी चेयरमैन बने। 2022 में एक सड़क हादसे में साइरस मिस्त्री का निधन हो गया। रतन टाटा के निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने, और चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन बने रहे।
फिर यह विवाद क्या है, जो टाटा ग्रुप की नींव हिला रहा है?
टाटा संस ने इससे बचने की कोशिश की। कंपनी ने 2024 में 21 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज चुकाकर खुद को कर्जमुक्त बनाया और आरबीआई से अपना एनबीएफसी दर्जा वापस लेने की अपील की। अगर यह मंजूर हो जाता, तो कंपनी हमेशा के लिए निजी बनी रह सकती थी। लेकिन जून 2026 में आरबीआई ने नियम आसान कर दिए, अब सिर्फ एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा एसेट वाली कंपनियां सीधे इस दायरे में आ जाती हैं। टाटा संस के एसेट इससे कहीं ज्यादा हैं।
11 सितंबर 2026 को आरबीआई ने टाटा संस की अपील खारिज कर दी। इसका मतलब साफ था, लिस्टिंग अब टलेगी नहीं। इसी बीच अगस्त 2026 में चंद्रशेखरन खुद कह चुके थे कि फरवरी 2027 में उनका कार्यकाल खत्म होते ही वे हट जाएंगे। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश भी शुरू कर दी थी, टाटा स्टील के टीवी नरेंद्रन, सीएफओ सौरभ अग्रवाल और एनएसई के आशीष चौहान जैसे नाम चर्चा में थे।
लेकिन आरबीआई के फैसले के ठीक बाद बुलाई गई 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग में सब कुछ पलट गया। बोर्ड ने तय किया कि लिस्टिंग की दिशा में बढ़ेंगे भी और चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन भी बनाएंगे। नोएल टाटा ने कहा, यह प्रक्रिया पहले ही तय हो चुकी थी, अब उसे पलटना गलत है।
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टाटा ट्रस्ट्स के दो नॉमिनी डायरेक्टर
17 सितंबर को नोएल ने विरोध किया, श्रीनिवासन ने समर्थन। यानी दोनों बराबर बंट गए। ट्रस्ट्स का तर्क है, दो में बहुमत दो होता है, एक नहीं। इसे ऐसे समझिए, अगर घर के दो साझा मालिकों में एक फैसले के खिलाफ हो, तो क्या अकेले दूसरे मालिक की मर्जी से घर का बड़ा फैसला हो सकता है? ट्रस्ट्स का सवाल यही है।
टाटा संस ने चेयरमैन के कास्टिंग वोट से इस अड़चन को पार करने की कोशिश की। ट्रस्ट्स ने इसे भी खारिज करते हुए कहा, कास्टिंग वोट सिर्फ पूरे बोर्ड में बराबरी पर लागू होता है, नॉमिनी डायरेक्टर्स के अलग समूह पर नहीं। ट्रस्ट्स ने इसी दलील में सीधे मिस्त्री केस का हवाला दिया, जिसमें टाटा संस ने खुद अदालत में इन्हीं नॉमिनी वोटिंग अधिकारों का बचाव किया था।
इस विवाद में कौन-कौन शामिल (involved) है?
ट्रस्ट्स ने अब वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को अपना पक्ष रखने के लिए तैयार किया है। रिपोर्टों के मुताबिक इस मामले में दोनों पक्षों के प्रतिनिधि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले; हालांकि, सरकार की औपचारिक भूमिका अब तक साफ नहीं हुई है।
दोनों पक्षों की बात
दिलचस्प बात यह भी है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने ट्रस्ट्स को राय दी थी कि लिस्टिंग अनिवार्य नहीं है, जबकि आरबीआई का रुख इसके ठीक उलट रहा। दोनों पक्ष सही तथ्यों का हवाला दे रहे हैं, लेकिन उनकी व्याख्या अलग-अलग है।
आगे क्या हो सकता है?
इस वजह से अगस्त में होने वाली टाटा संस की एजीएम टल गई है और अब यह दिसंबर से पहले होने की उम्मीद कम है। यानी जब तक यह तकनीकी अड़चन दूर नहीं होती, चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर अंतिम मुहर भी अटकी रह सकती है।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
अब आप क्या करें?
- समझिए, अगर टाटा समूह की किसी कंपनी में निवेश है तो एजीएम की तारीख और कोर्ट की सुनवाई दोनों पर नजर रखें।
- क्यों अभी जरूरी है, क्योंकि लिस्टिंग और नेतृत्व दोनों फैसले अभी कानूनी रूप से अधूरे हैं।
- आगे देखें, महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के अगले आदेश और टाटा ट्रस्ट्स की अगली कानूनी कार्रवाई पर।
विवाद की विस्तृत टाइमलाइन (अतिरिक्त सेक्शन)
- करीब सौ साल पहले, शापूरजी पालनजी परिवार टाटा संस में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा एकल शेयरहोल्डर बना।
- 2012, रतन टाटा का चेयरमैन पद छोड़ना और साइरस मिस्त्री की नियुक्ति।
- अक्टूबर 2016, मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाया गया।
- दिसंबर 2019, एनसीएलएटी ने मिस्त्री की वापसी का आदेश दिया।
- मार्च 2021, सुप्रीम कोर्ट का फैसला टाटा संस के पक्ष में आया।
- सितंबर 2022, आरबीआई ने टाटा संस को अपर लेयर एनबीएफसी घोषित किया, तीन साल में लिस्टिंग की शर्त लगी।
- 2022, सड़क हादसे में साइरस मिस्त्री का निधन।
- मार्च 2024, टाटा संस ने कर्ज चुकाकर एनबीएफसी दर्जा हटाने की अपील की।
- जून 2026, आरबीआई ने एक लाख करोड़ रुपए एसेट की सरल सीमा तय की।
- 6 अगस्त 2026, आरबीआई ने टाटा संस को फिर अपर लेयर सूची में रखा।
- अगस्त 2026, चंद्रशेखरन ने दोबारा नियुक्ति न लेने का ऐलान किया, उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हुई।
- 11 सितंबर 2026, आरबीआई ने डीरजिस्ट्रेशन अपील खारिज की।
- 15 सितंबर 2026, आरबीआई ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल की।
- 17 सितंबर 2026, टाटा संस बोर्ड ने लिस्टिंग और चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति दोनों को मंजूरी दी; नोएल टाटा का विरोध वोट।
- 18 सितंबर 2026, टाटा समूह के शेयरों में करीब आठ प्रतिशत गिरावट।
- 20 सितंबर 2026, टाटा ट्रस्ट्स ने फैसले को कानूनी रूप से शून्य घोषित किया, सीनियर वकील की नियुक्ति की।
यह खबर क्यों जरूरी है?
FAQ
- टाटा संस विवाद की असली वजह क्या है?
आरबीआई ने टाटा संस को स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने का निर्देश दिया। इसी दौरान बोर्ड ने चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन भी बना दिया। टाटा ट्रस्ट्स ने दोनों फैसलों को चुनौती दी है। - टाटा ट्रस्ट्स का टाटा संस पर कितना नियंत्रण है?
टाटा ट्रस्ट्स और जुड़े ट्रस्टों के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसी वजह से उन्हें एक-तिहाई डायरेक्टर मनोनीत (नॉमिनेट) करने का अधिकार मिलता है। - क्या टाटा संस की एजीएम जल्द होगी?
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के आदेश के चलते टाटा ट्रस्ट्स फिलहाल एजीएम नहीं बुला सकते। इस वजह से एजीएम दिसंबर 2026 से पहले होने की उम्मीद कम है।
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