मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस विजय सिंह ने छोड़ा रतन टाटा ट्रस्ट का पद

Amresh Kushwaha | Aug 12, 2026, 11:35 IST
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मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस विजय सिंह
मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस विजय सिंह

टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है। मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी विजय सिंह पहले रक्षा सचिव भी रह चुके हैं। जानें ट्रस्टी पद छोड़ने की वजह...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने इस्तीफा दे दिया है।
  • उन्होंने सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है।
  • उनका कार्यकाल 14 अगस्त को खत्म होने वाला था।
  • विजय सिंह मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी रहे हैं।
  • वे पहले भारत सरकार में रक्षा सचिव भी रह चुके हैं।
टाटा ट्रस्ट्स में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT (Sir Ratan Tata Trust) के ट्रस्टी पद से खुद को अलग किया है। उनका कार्यकाल वैसे भी 14 अगस्त को खत्म हो रहा था, लेकिन उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया।

78 साल के विजय सिंह दिवंगत रतन टाटा के करीबी माने जाते थे। उन्होंने खुद दोबारा नियुक्ति पर विचार न करने की इच्छा जताई है। हालांकि वे सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT (Sir Dorabji Tata Trust) में एक साल और ट्रस्टी बने रहेंगे।

कौन हैं विजय सिंह

विजय सिंह मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस यानी IAS (Indian Administrative Service) अधिकारी हैं। उनका जन्म 13 जुलाई 1948 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की थी। साल 1970 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए थे। उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला था।

शुरुआती सालों में उन्होंने मध्य प्रदेश में कई अहम पद संभाले। वे ग्वालियर और भोपाल के जिला मजिस्ट्रेट भी रहे। बाद में उन्होंने केंद्र सरकार में भी कई जिम्मेदारियां निभाईं। वे मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं। सबसे अहम बात यह है कि वे भारत सरकार में रक्षा सचिव भी रहे। दशकों तक प्रशासन और रक्षा नीति से जुड़े रहने के बाद वे टाटा समूह से जुड़े थे।

क्यों दिया इस्तीफा

रिपोर्ट के मुताबिक रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट के भीतर माहौल बदल गया है। इस बदले माहौल ने विजय सिंह को असहज किया। यही असहजता उनके इस्तीफे की एक बड़ी वजह बताई जा रही है। हालांकि विजय सिंह का ट्रस्ट से बाहर होना कोई अकेली घटना नहीं है।

इससे पहले मई में एक और वाइस चेयरमैन ने भी इस्तीफा दिया था। वेणु श्रीनिवासन ने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट से खुद को अलग कर लिया था। दोनों की दोबारा नियुक्ति का विरोध ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने किया था। उनका तर्क था कि 1923 के ट्रस्ट डीड के हिसाब से ट्रस्टी का पारसी होना जरूरी है। साथ ही ट्रस्टी का मुंबई का स्थायी निवासी होना भी जरूरी बताया गया।

नोएल टाटा से मतभेद

रिपोर्ट में एक और बड़ी वजह भी सामने आई है। पूर्व आईएएस विजय सिंह टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने के पक्ष में थे। उनकी यह राय टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के रुख से अलग थी। नोएल टाटा नहीं चाहते कि होल्डिंग कंपनी टाटा संस शेयर बाजार में लिस्ट हो। माना जा रहा है कि यही मतभेद उनकी सर्वसम्मति से दोबारा नियुक्ति में बाधा बना।

ट्रस्ट में उठापटक

यह इस्तीफा ऐसे समय पर हुआ है जब ट्रस्ट पहले से मुश्किल दौर से गुजर रहा है। सर रतन टाटा ट्रस्ट ने बैठक बुलाने की अनुमति के लिए महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से अपील की है। टाटा संस के शेयरों के कथित ट्रांसफर से जुड़ी एक शिकायत सामने आई है। स्थायी ट्रस्टियों की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठे हैं।

इस शिकायत पर फैसला होने तक कमिश्नर ने ट्रस्ट की बैठकों पर रोक लगा रखी है। जानकारों के मुताबिक टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर ट्रस्ट के भीतर मतभेद काफी गहरे हैं। इसलिए इसका असर समूह के बड़े फैसलों पर भी पड़ सकता है।

रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट्स में यह उठापटक लगातार सामने आ रही है। ट्रस्टियों की पात्रता और नियुक्ति को लेकर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। साथ ही टाटा संस की भावी दिशा को लेकर भी राय अलग अलग है।

करियर पर एक नजर

विजय सिंह का प्रशासनिक करियर काफी लंबा और विविध रहा है। साल 1982 से 1987 के बीच वे विदेशों में भारतीय उत्सवों के समन्वयक रहे। उन्होंने अमेरिका, फ्रांस, सोवियत संघ और जापान में यह जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद 1987 से 1996 तक वे मध्य प्रदेश सरकार में आयुक्त और गृह सचिव रहे।

साल 1996 से 2004 तक उन्होंने केंद्र सरकार में कई मंत्रालयों में काम किया। वे स्वास्थ्य मंत्रालय में वित्तीय सलाहकार रहे। साथ ही रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव भी रहे। अक्टूबर 2004 से जनवरी 2006 तक वे मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव रहे। रक्षा सचिव बनने से पहले वे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव भी रहे। इतने लंबे प्रशासनिक अनुभव के बाद वे टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े थे।

आगे क्या होगा

विजय सिंह के इस्तीफे के बाद टाटा ट्रस्ट्स में नई हलचल शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि सर रतन टाटा ट्रस्ट में उनकी जगह कौन लेगा। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के फैसले पर भी सबकी नजर रहेगी। टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर मतभेद जल्द सुलझेंगे या नहीं, यह भी अहम सवाल है। आने वाले दिनों में टाटा ट्रस्ट्स के भीतर और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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