टाटा संस चेयरमैन के पद से एन चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा, जानिए वजह
Manya Jain | Aug 12, 2026, 11:57 IST
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टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस्तीफा दे दिया है। उनका करीब एक दशक लंबा कार्यकाल अचानक खत्म हुआ है। वह फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे। टाटा ट्रस्ट्स में वोटिंग को लेकर अनिश्चितता के बीच यह फैसला आया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- एन चंद्रशेखरन नेटाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा देदिया है।
- उनका करीब एक दशक लंबा कार्यकालअचानक खत्म हो गया है।
- वह फरवरी 2027 तकअपना कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बनेरहेंगे।
- यह फैसला टाटा ट्रस्ट्स मेंवोटिंग को लेकर बनीअनिश्चितता के बीच आया है।
- चंद्रशेखरन केकार्यकाल में टाटा ग्रुप का रेवेन्यूदोगुना से ज्यादा बढ़ा है।
अचानक आया इस्तीफे का फैसला
उन्हें 2017 में पहली बार टाटा संस काचेयरमैन बनाया गया था। 2022 में उन्हेंदूसरा कार्यकाल भी मिला था। वह टाटाकंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स औरटाटाकंज्यूमर प्रोडक्ट्स सहित कई टाटाकंपनियों के चेयरमैन भी हैं।
टाटा ट्रस्ट्स में अनिश्चितता की वजह
टाटाट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा कोचंद्रशेखरन के बने रहने का विरोधी मानाजाता है। इसी वजह से यह सवाल भीउठ रहा था कि बैठक हो पाएगी या नहीं।
टाटा संस के मुख्य शेयरधारकों में से एक सररतन टाटा ट्रस्ट कोमहाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने जांच पूरीहोने तक अहम फैसले लेने से रोक रखा है।इस वजह सेभी स्थिति उलझी हुई थी।
ट्रस्टियों के बीच मतभेद भी सामने आए
सर रतन टाटा ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों नेबैठक में शामिल होने के लिए चैरिटीकमिश्नर सेअनुमति मांगी है। इनमें नोएल टाटा,डेरियस खंबाटा और जहांगीर जहांगीर के नामशामिल हैं।
हालांकि विजय सिंह और वेणुश्रीनिवासन ने इस अनुरोध पर हस्ताक्षरनहीं किए। इससे ट्रस्टियों के बीच मतभेदकीस्थिति भी सामने आई है।
विवाद से पहले ही उठाया कदम
इस पूरीप्रक्रिया के आगे बढ़ने से पहले हीचंद्रशेखरन ने खुद पदछोड़ने का फैसला ले लिया। इसे उनकी तरफसे एक सोची-समझीरणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
एक्सपर्ट मान रहे हैं कि चंद्रशेखरन के इसतरह अचानक हटने से देश के सबसे बड़ेऔद्योगिक घराने पर असर पड़ सकता है।
कार्यकाल में ग्रुप की बड़ी ग्रोथ
यह रेवेन्यू FY26 में बढ़कर16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसीदौरान ग्रुप का नेट प्रॉफिट पांच गुना सेज्यादा बढ़ा है।
FY20 में नेट प्रॉफिटकरीब 32,000 करोड़ रुपये था, जो FY26में बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गया।यह आंकड़े चंद्रशेखरन के नेतृत्व की बड़ीउपलब्धि माने जा रहे हैं।
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