बीजेपी पर कांग्रेस का तंज, पवन खेड़ा बोले- ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण नहीं पीएम पद मिलना चाहिए
समझें क्या है पूरा मामला
- ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है।
- बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने पद्म भूषण की बात कही।
- कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बयान पर तंज कसा।
- उन्होंने पद्म भूषण को छोटी चीज बताया है।
- मामला SIR प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस से जुड़ा है।
बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की बात कही थी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस बयान पर तंज कसा। खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री बना देना चाहिए। विपक्ष के कई नेताओं ने भी भट्टाचार्य के बयान पर पलटवार किया। इसी बीच ममता बनर्जी और एमए बेबी के बीच 30 साल बाद बातचीत हुई।
भट्टाचार्य का बड़ा बयान
बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शुक्रवार को पानीहाटी में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल में लंबे समय बाद डर मुक्त चुनाव हुआ। लोगों ने बिना डर के वोट डाला। भट्टाचार्य के मुताबिक, इस दौरान हत्या जैसी कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने इसका श्रेय मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC – Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार को दिया। उनका कहना था कि वोटर लिस्ट से बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाए गए।
भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि इस काम के लिए ज्ञानेश कुमार कम से कम पद्म भूषण के हकदार हैं। बंगाल की जनता उनके काम से खुश है, ऐसा उन्होंने दावा किया।
खेड़ा का तीखा पलटवार
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने शनिवार को इस बयान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म भूषण बहुत छोटी चीज है। उन्हें प्रधानमंत्री बना देना चाहिए। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि जो दूसरों को पीएम बना सकता है, उसे खुद पीएम बनना चाहिए। इस बयान से साफ है कि कांग्रेस चुनाव आयोग पर हमलावर बनी हुई है।
विपक्ष के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी भट्टाचार्य के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने परिपक्व नेता से ऐसी टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी। उनके मुताबिक, यह बंगाल में भाजपा की जीत के बाद धन्यवाद जताने जैसा लग रहा है। RJD (Rashtriya Janata Dal) सांसद मनोज झा ने भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि चोरी-डकैती के आरोपों के बीच ऐसी सोच के लिए भट्टाचार्य को पहले भारत रत्न मिलना चाहिए।
ममता और बेबी के बीच 30 साल बाद बातचीत
इसी विवाद के बीच एक बड़ी सियासी घटना भी सामने आई। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और CPI(M) (Communist Party of India Marxist) महासचिव एमए बेबी के बीच फोन पर बात हुई। सूत्रों के मुताबिक, यह तीन दशक में दोनों की पहली सीधी बातचीत है।
दरअसल, एमए बेबी ने 23 सितंबर को गैर-NDA दलों को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने चुनाव आयोग और SIR (Special Intensive Revision) के मुद्दे पर विपक्षी बैठक बुलाने की अपील की। इस पत्र में DMK, TVK, BRS, BJD और AAP (Aam Aadmi Party) जैसे दल भी शामिल थे।
ममता ने पहले इस पत्र का जवाब दिया, फिर फोन पर बात की। उन्होंने राहुल गांधी से हुई अपनी बातचीत का भी जिक्र किया। साथ ही उन्होंने I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक जल्द बुलाने की जरूरत बताई।
CPI(M) और TMC (Trinamool Congress) बंगाल में लंबे समय से एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं। दोनों दल गठबंधन में साथ हैं, लेकिन राज्य की राजनीति के चलते सीधे संपर्क से बचते रहे हैं। इसीलिए यह बातचीत खास मानी जा रही है।
विपक्षी गठबंधन में हलचल
विपक्ष का एक बड़ा वर्ग अब जल्द बैठक बुलाने के पक्ष में है। हालांकि, अब तक कोई साझा एक्शन प्लान सामने नहीं आया है। CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी राहुल गांधी से बैठक बुलाने की मांग कर चुके हैं। वहीं एमए बेबी 27 सितंबर को AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करेंगे।
SIR को लेकर विवाद की जड़
यह पूरा मामला चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति जताई। लेकिन इन पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
कांग्रेस का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में मनमानी कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि वे दूसरे आयुक्तों की बात नहीं सुन रहे। इसी मांग को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन किया। कुछ चुनावी आदेशों और कथित सॉफ्टवेयर बदलावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल हुई है।
दो आयुक्तों ने उठाए चार बड़े सवाल
पहला सवाल फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर था। इसमें नए वोटरों से पुरानी SIR लिस्ट की जानकारी मांगी जा रही थी। एक आयुक्त संधू ने इसे गैरकानूनी बताया। दूसरा सवाल वोटर डेटा के कंट्रोल पर था।
आयुक्तों ने पूछा कि दिल्ली का नियंत्रण क्यों बढ़ रहा है और राज्यों की पहुंच क्यों घट रही है। तीसरा सवाल बंगाल की 16 लाख अपीलों से जुड़ा था। संधू ने पूछा कि इन्हें किसकी अनुमति से दायर किया गया।
चौथा मुद्दा गोवा के 97 वोटरों का था। जांच में योग्य पाए जाने के बावजूद सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी के कारण उनके नाम अंतिम लिस्ट में नहीं जुड़ पाए।
FAQ
- पवन खेड़ा ने ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या कहा?
पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म भूषण छोटी चीज है। उन्हें प्रधानमंत्री बना देना चाहिए। यह बयान समिक भट्टाचार्य के बयान के जवाब में आया। - SIR विवाद क्या है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। दो चुनाव आयुक्तों ने इसके कुछ फैसलों पर सवाल उठाए हैं। इसे लेकर कांग्रेस समेत विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है। - ममता बनर्जी और एमए बेबी के बीच बातचीत क्यों खास है?
दोनों नेताओं के बीच यह तीन दशक में पहली सीधी बातचीत बताई जा रही है। CPI(M) और TMC लंबे समय से बंगाल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। यह बातचीत विपक्षी एकजुटता के प्रयासों से जुड़ी मानी जा रही है।
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