भारतीयों में हार्ट अटैक क्यों नहीं पकड़ पाते सामान्य टेस्ट? स्टडी रिपोर्ट में सामने आया सच
समझें क्या है पूरा मामला
- पांच हजार से ज्यादा भारतीय मरीजों पर हुई एक बड़ी स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
- हार्ट अटैक आने से पहले 80 फीसदी मरीजों को किसी टेस्ट में हाई रिस्क नहीं माना गया था।
- पश्चिमी देशों में बने रिस्क कैलकुलेटर भारतीयों की खास शारीरिक बनावट को नहीं पहचानते।
- भारत में हार्ट अटैक औसतन 54 साल की उम्र में आता है, जो पश्चिम से काफी पहले है।
- डॉक्टरों का कहना है कि परिवार की हिस्ट्री, डायबिटीज और मानसिक तनाव को भी जांच में शामिल करना जरूरी है।
टेस्ट में पास, फिर भी आ गया हार्ट अटैक
कोई लाल निशान नहीं। कोई चेतावनी नहीं। डॉक्टर की नजर में भी वह खतरे वाला मरीज नहीं था। फिर अचानक हार्ट अटैक आ गया। यह किसी एक की कहानी नहीं है। भारत में यह अब आम हो चुका है।
एक बड़ी स्टडी में सामने आया है कि हार्ट अटैक पीड़ित 80 फीसदी भारतीयों को पहले किसी भी जांच में हाई रिस्क नहीं बताया गया था। यानी टेस्ट ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन दिल ने धोखा दे दिया।
पश्चिमी टेस्ट भारत पर क्यों फेल होते हैं
जीबी पंत हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डॉ. मोहित दयाल गुप्ता की अगुआई में पांच हजार से ज्यादा भारतीय मरीजों पर यह स्टडी हुई। डॉ. गुप्ता कहते हैं, भारतीय मरीज और आबादी पूरी तरह अलग तरह से व्यवहार करती है। हमारे जोखिम के कारण, पैटर्न और जीवनशैली पश्चिम से बिल्कुल अलग हैं। इसलिए पश्चिमी स्कोर यहां काम नहीं करते।
दरअसल, ये रिस्क कैलकुलेटर पश्चिमी देशों की आबादी के डेटा पर बने हैं। वहां हार्ट अटैक की उम्र ज्यादा है। लेकिन भारत में औसत उम्र सिर्फ 54 साल है। यानी भारतीयों को दिल की बीमारी (Heart disease) पश्चिम से करीब एक दशक पहले होती है।
भारतीयों का साउथ एशियन फिनोटाइप
शोधकर्ताओं ने पाया कि भारतीयों में एक खास साउथ एशियन फिनोटाइप होता है। इसका मतलब है कि भारतीयों में हार्ट अटैक का खतरा अलग तरह से दिखता है।
कई भारतीय दुबले-पतले दिखते हैं, लेकिन उनके पेट के अंदर चर्बी छुपी होती है। यह BMI (Body Mass Index) आधारित जांच में नहीं पकड़ में आती। इसके अलावा सामान्य वजन में भी डायबिटीज और इंसुलिन रेसिस्टेंस देखी जाती है।
कोलेस्ट्रॉल में HDL (High Density Lipoprotein यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल) कम और ट्राइग्लिसराइड्स ज्यादा होता है। ये सब मिलकर दिल के लिए खतरनाक हो जाते हैं, लेकिन पश्चिमी टेस्ट इन्हें पकड़ नहीं पाते।
इंटरमीडिएट रिस्क का जाल
स्टडी में सामने आया कि ज्यादातर भारतीय मरीज इंटरमीडिएट रिस्क यानी बीच वाली श्रेणी में आ जाते हैं। यह एक ऐसा ग्रे जोन है जहां न इलाज शुरू होता है और न ही सही निगरानी होती है। नतीजा यह होता है कि हार्ट अटैक आने के बाद ही पता चलता है कि खतरा कितना गहरा था।
कई बार लो रिस्क का टैग भी भ्रामक साबित होता है। मानसिक तनाव, धूम्रपान और डिस्लिपिडेमिया (खून में चर्बी का असंतुलन) जैसे कारण इन टेस्ट में नजरअंदाज हो जाते हैं।
डॉक्टर क्या कह रहे हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भारत के लिए अलग रिस्क कैलकुलेटर नहीं बन जाते, तब तक डॉक्टरों को टेस्ट के साथ-साथ मरीज की पारिवारिक हिस्ट्री, डायबिटीज, मानसिक तनाव और जल्दी स्क्रीनिंग को भी ध्यान में रखना होगा। सिर्फ रिपोर्ट देखकर फैसला करना खतरनाक हो सकता है। यह स्टडी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या हम सही तरीके से अपने दिल की जांच कर रहे हैं?
FAQ
- भारतीयों में हार्ट अटैक पश्चिम से पहले क्यों आता है?
स्टडी के मुताबिक भारतीयों में साउथ एशियन फिनोटाइप होता है। इसमें सामान्य वजन के बावजूद पेट में छुपी चर्बी, इंसुलिन रेसिस्टेंस, कम HDL और ज्यादा ट्राइग्लिसराइड्स होते हैं। यही कारण है कि भारत में हार्ट अटैक की औसत उम्र सिर्फ 54 साल है, जो पश्चिमी देशों से करीब एक दशक कम है। - क्या मौजूदा हार्ट टेस्ट भारतीयों के लिए सही हैं?
नहीं। मौजूदा रिस्क कैलकुलेटर पश्चिमी आबादी के डेटा पर बने हैं और भारतीयों की खास शारीरिक बनावट को नहीं पहचानते। इसीलिए 80 फीसदी भारतीय हार्ट अटैक पीड़ितों को पहले हाई रिस्क नहीं माना गया था। विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत के लिए अलग रिस्क टूल बनाने की जरूरत है। - हार्ट अटैक से बचने के लिए भारतीयों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार सिर्फ टेस्ट पर निर्भर न रहें। परिवार में हार्ट की बीमारी की हिस्ट्री, डायबिटीज, मानसिक तनाव और पेट की चर्बी जैसे कारकों की जानकारी डॉक्टर को जरूर दें। 40 साल की उम्र के बाद नियमित स्क्रीनिंग कराएं और लाइपोप्रोटीन(a) तथा ApoB जैसे खास टेस्ट भी करवाएं।
ये खबरें भी पढ़ें...
मन की बात का 132वां एपिसोड आज, पीएम मोदी तेल-गैस की समस्या पर कर सकते हैं चर्चा
एक अप्रैल से नया इनकम टैक्स कानून, फॉर्म 16 बंद, जानें नए नियम
1 अप्रैल के नए नियम: सिलेंडर से लेकर रेलवे टिकट तक कई नियमों में बदलाव! जानें किस पर पड़ेगा असर
1 अप्रैल से बदल जाएगा ऑनलाइन पेमेंट का तरीका, जानिए नया नियम