सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: एफिडेविट में झूठ पर अब कोई भी शख्स कर सकता है आपराधिक शिकायत, इसके लिए चुनाव आयोग का इंतजार जरूरी नहीं

Kaushiki | Oct 20, 2026, 10:37 IST
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में गलत जानकारी पर कोई भी शिकायत कर सकता है
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने या अहम तथ्य छिपाने पर कोई भी शख्स आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए चुनाव आयोग की शिकायत जरूरी नहीं है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कर्नाटक हाई कोर्ट की व्याख्या को गलत ठहराया। हालांकि हर शिकायत पर आपराधिक कार्रवाई जारी रखना जरूरी नहीं है।

चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक, चुनाव लड़ने वाला कैंडिडेट नॉमिनेशन के साथ हलफनामा (Affidavit) देता है। हलफनामा यानी शपथ के साथ लिखा गया बयान। Election affidavit में उम्मीदवार अपने बारे में जानकारी देता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें गलत जानकारी देने पर शिकायत हो सकती है।



अहम तथ्य छिपाने के आरोप में भी यही बात लागू है। ऐसे में शिकायत का दायरा साफ हुआ है। बता दें कि यह फैसला कर्नाटक के राजकुमार मड़की की अपील पर आया। उन्होंने कर्नाटक के बीदर से 2023 में विधायक चुने गए डॉ. शैलेंद्र बेलदाले के खिलाफ शिकायत की थी।



कोई भी शख्स कर सकता है शिकायत

सवाल यह था कि शिकायत कौन कर सकता है। कर्नाटक हाई कोर्ट की राय अलग थी। उसके मुताबिक सिर्फ चुनाव आयोग या संबंधित सरकारी अधिकारी शिकायत कर सकते हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट की राय अलग रही।



सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति Criminal complaint दर्ज करा सकता है। आपराधिक शिकायत यानी किसी अपराध की औपचारिक शिकायत। इसके लिए चुनाव आयोग की शिकायत जरूरी नहीं है। यानी आम नागरिक भी शिकायत कर सकता है।



सुप्रीम कोर्ट में यह फैसला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने दिया। बेंच ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125ए पर बात की। यह धारा Representation of the People Act, 1951 का हिस्सा है।



सीआरपीसी की धारा 195(1) का पेच

बेंच ने कहा कि धारा 125ए के अपराध धारा 195(1) में शामिल नहीं हैं। यह धारा सीआरपीसी (CrPC - Code of Criminal Procedure) यानी दंड प्रक्रिया संहिता की है।



कर्नाटक हाई कोर्ट की एक्सप्लनेशन गलत

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट की कानूनी व्याख्या को गलत ठहराया। कोर्ट ने एक तर्क भी रखा। मान लीजिए शिकायत का हक सिर्फ सरकारी अधिकारी के पास होता। तब विधायिका धारा 195 में संशोधन कर सकती थी। विधायिका (Legislature) यानी कानून बनाने वाली संस्था। वह ऐसा प्रावधान साफ शब्दों में लिख सकती थी। अब जरा मामले की जड़ में चलते हैं।



क्या था पूरा मामला

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजकुमार मड़की की अपील पर आया। मड़की ने बीदर विधायक शैलेंद्र बेलदाले के खिलाफ शिकायत की थी। डॉ. बेलदाले 2023 में कर्नाटक के बीदर से विधायक चुने गए। मड़की का आरोप है कि विधायक ने घर के पते की गलत घोषणा की।



यह घोषणा नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में थी। यानी False affidavit का आरोप घर के पते पर टिका है। ये मड़की के आरोप हैं। कर्नाटक हाई कोर्ट ने शिकायत खारिज कर दी थी। उसका तर्क था कि शिकायत सिर्फ चुनाव आयोग या सरकारी अधिकारी कर सकते हैं।



हर शिकायत पर कार्रवाई जरूरी नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एक बात और साफ की। हर शिकायत पर आपराधिक कार्रवाई जारी रखना जरूरी नहीं है। यानी हर शिकायत आगे नहीं बढ़ेगी। इस मामले में भी कोर्ट ने विधायक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही बहाल नहीं की। हाई कोर्ट में खारिज हुई शिकायत को फिर चालू नहीं किया गया।



अगर कोई उम्मीदवार हलफनामे में सच छिपाए, तो शिकायत कौन कर सकता है? अब जवाब साफ है कि कोई भी शख्स। क्या इससे हलफनामों की सच्चाई पर नजर बढ़ेगी? फिलहाल कोर्ट ने शिकायत का अधिकार साफ किया है। कार्रवाई की गारंटी नहीं दी है।



यह खबर क्यों जरूरी है

चुनाव में उम्मीदवार का हलफनामा मतदाता के लिए जानकारी का बड़ा जरिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक उसमें गलत जानकारी या छिपाए गए तथ्य पर अब कोई भी शख्स आपराधिक शिकायत कर सकता है।



इसके लिए चुनाव आयोग की शिकायत जरूरी नहीं है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि हर शिकायत पर कार्रवाई जारी रखना जरूरी नहीं। पारदर्शी चुनाव और जवाबदेह जनप्रतिनिधि लोकतंत्र (Representative Democracy) के ओरिजिनल वैल्यू हैं। इस फैसले से आम नागरिक की भूमिका साफ हुई है।



FAQs:



  1. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने पर कौन शिकायत कर सकता है?
    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, कोई भी व्यक्ति चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने पर शिकायत कर सकता है।
  2. कर्नाटक हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बीच चुनावी हलफनामे से संबंधित शिकायतों को लेकर क्या अंतर है?
    कर्नाटक हाई कोर्ट के मुताबिक, केवल चुनाव आयोग या सरकारी अधिकारी शिकायत कर सकते थे। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी नागरिक आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है।
  3. क्या हर शिकायत पर कार्रवाई जरूरी है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा?
    नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हर शिकायत पर आपराधिक कार्रवाई जारी रखना जरूरी नहीं है।
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