होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी: दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा संकट

Sandeep Kumar | Apr 03, 2026, 18:48 IST
hormuz strait
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने पूरी दुनिया में तेल सप्लाई की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। दुनिया के पांच प्रमुख समुद्री गलियारों से हर दिन करोड़ों बैरल तेल लेकर जहाज गुजरते हैं जिस पर पूरी अर्थव्यवस्था निर्भर है।

News in Short

  • होर्मुज, बाब-अल-मंदब, मलक्का, स्वेज और तुर्की जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के प्रमुख रास्ते हैं।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य से 20-25% तेल आपूर्ति होती है, अब यह खतरे में है।
  • बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य पर यमन विद्रोहियों का प्रभाव बढ़ा है।
  • मलक्का जलडमरूमध्य में पायरेसी के कारण खतरे का सामना हो रहा है।
  • तेल आपूर्ति रुकने पर वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि और अर्थव्यवस्था पर असर हो सकता है।

News in Detail

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी ने बड़ा खतरा पैदा किया है। पूरे विश्व की तेल सप्लाई कुछ जलमार्गों पर निर्भर है। इनमें होर्मुज, बाब-अल-मंदब, मलक्का जलडमरूमध्य, स्वेज नहर और तुर्की जलडमरूमध्य प्रमुख हैं। इन पांच जलमार्गों से हर दिन 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह यूरोप और एशिया की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।



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होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण

28 फरवरी के बाद यह खतरा और बढ़ गया जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच टकराव बढ़ा। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है। यहां से 20-25 प्रतिशत समुद्री तेल सप्लाई होती है। इसकी चौड़ाई सिर्फ 33 किलोमीटर है। यहां तैनात एंटी-शिप मिसाइलें और ड्रोन किसी भी जहाज के लिए खतरा बन सकते हैं।



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बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य

बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य लाल सागर को अरब सागर से जोड़ता है। युद्ध से पहले यहां से दुनिया के 10-12 प्रतिशत तेल की सप्लाई होती थी। हालांकि, यमन के हूती विद्रोहियों के कारण यह मार्ग अब जोखिम भरा बन चुका है। यहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरे की संभावना बनी रहती है।



मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है, जहां से 22-29 प्रतिशत तेल गुजरता है। इस जलडमरूमध्य का सबसे बड़ा खतरा समुद्री लूट (पायरेसी) है। 2025 में 100 से अधिक पायरेसी की घटनाएं सामने आईं, जो 19 सालों में सबसे ज्यादा हैं।



स्वेज नहर लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है। यहां से हर दिन करीब 7.5 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। हालांकि, स्वेज नहर अस्थिरता का सामना कर रही है। 2021 में 'एवर गिवेन' जहाज के फंसने से यह नहर छह दिन तक बंद रही थी। इस कारण 400 से ज्यादा जहाजों की आवाजाही रुक गई थी और लगभग 54 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।



तुर्की जलडमरूमध्य से रोज 2-3 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 2 प्रतिशत है। यह मार्ग मुख्य रूप से रूस और कैस्पियन क्षेत्र से तेल ले जाने का प्रमुख रास्ता है।



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होर्मुज की भूमिका

होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता था। यह मार्ग चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए अहम है। इन देशों की अर्थव्यवस्था दुनिया की जीडीपी का 30 प्रतिशत हिस्सा बनाती है। यदि तेल आपूर्ति रुकती है, तो इन देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी। वैश्विक तेल कीमतों में भी भारी वृद्धि हो सकती है।



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वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि तेल और गैस आयात करने वाले देश लगातार इन समुद्री गलियारों पर निर्भर हैं। यदि इन रास्तों से तेल की आपूर्ति रुकती है, तो तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। यह संकट उन देशों के लिए गंभीर होगा, जो इन मार्गों पर निर्भर हैं।



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