IAS- IPS की सीआर से जुड़ेगी कर्मयोगी ट्रेनिंग, दक्षता बढ़ाने सरकार ने की अनिवार्य

Aman Vaishnav | Mar 27, 2026, 15:19 IST
ias ips karmayogi training apar linked 2025
भारत सरकार के DoPT (Department of Personnel and Training) ने अब IAS-IPS समेत सभी केंद्रीय कर्मचारियों को कर्मयोगी ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी है। अब हर अधिकारी की सीआर में भी इसका रिकॉर्ड दर्ज होगा।

IAS-IPS की सीआर से जुड़ी कर्मयोगी ट्रेनिंग

देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर आई है। DoPT ने फरवरी 2026 में एक बार फिर स्पष्ट किया कि iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर APAR से जुड़े कोर्स और असेसमेंट पूरा करना सभी केंद्रीय कर्मचारियों और ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों के लिए अनिवार्य है। यानी अब IAS और IPS अधिकारियों की सालाना गोपनीय रिपोर्ट यानी सीआर में यह ट्रेनिंग सीधे दर्ज होगी।



मिशन कर्मयोगी क्या है?

मिशन कर्मयोगी को आप समझें तो यह सरकारी नौकरशाही में बड़े बदलाव की कोशिश है। सितंबर 2020 में शुरू हुए इस मिशन का मकसद भारत के करीब 30 लाख सिविल सेवकों को नागरिक-केंद्रित और भविष्य के लिए तैयार करना है।



इसे एनपीसीएससीबी (National Programme for Civil Services Capacity Building) भी कहते हैं। इस कार्यक्रम पर 2020-21 से 2024-25 तक पांच साल में 510 करोड़ 86 लाख रुपए खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था। इससे करीब 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाना था।



APAR से जुड़ाव क्यों जरूरी?

पहले ट्रेनिंग थी पर उसका कोई असर कर्मचारी की रिपोर्ट पर नहीं पड़ता था, लेकिन अब यह बदल गया है। DoPT के 4 जुलाई 2025 के आदेश के तहत हर स्तर पर कम से कम 6 कोर्स चुने जाने हैं।



यह कोर्स - MTS, SO/ASO, US, DS/Director और JS हैं। बता दें कि इन कोर्स को पूरा करने पर APAR के पार्ट-1 में यह जानकारी दर्ज होगी।



पोर्टल पर एक गेमिफाइड सिस्टम भी है। इसमें हर मॉड्यूल पूरा करने पर कर्मा पॉइंट्स मिलते हैं। ये पॉइंट्स सिर्फ दिखावे के लिए नहीं हैं। प्रमोशन और अहम तैनाती में भी इनकी भूमिका बढ़ाई जा रही है।



iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म कैसे काम करता है?

iGOT Karmayogi पोर्टल igotkarmayogi.gov.in पर कर्मचारी अपने मोबाइल या कंप्यूटर से कहीं से भी कोर्स कर सकते हैं। इस पोर्टल पर 16 भाषाओं में दो हजार 400 से ज्यादा कोर्स उपलब्ध हैं। इनमें साइबर सिक्योरिटी से लेकर गवर्नेंस में नैतिकता तक के विषय शामिल हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए सरकारी ईमेल आईडी (@nic.in या @gov.in) जरूरी है।



यह प्लेटफॉर्म रूल-बेस्ड यानी नियम पर आधारित सरकारी काम की जगह रोल-बेस्ड यानी भूमिका पर आधारित काम को बढ़ावा देता है। हर पद के अनुसार अलग-अलग कोर्स तैयार किए गए हैं।



अब असेसमेंट और डेडलाइन का क्या?

DoPT ने तय किया था कि कोर्स की पहचान और ट्रेनिंग प्लान 31 अगस्त 2025 तक अपलोड हों। साथ ही सवालों का बैंक 15 अक्टूबर 2025 तक बने। असेसमेंट 15 नवंबर 2025 तक लाइव हो। कर्मचारियों को कोर्स व असेसमेंट 31 मार्च 2026 तक पूरा करना था।



बजट 2025-26 में मिशन कर्मयोगी के लिए 110 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे साफ है कि सरकार इस योजना को लेकर गंभीर है और इसे लगातार मजबूत करती जा रही है।



कितना बड़ा है यह बदलाव?

यह बदलाव छोटा नहीं है। पहले IAS और IPS अधिकारियों (IAS-IPS अधिकारी) की APAR में सिर्फ उनके काम का मूल्यांकन होता था। अब ट्रेनिंग भी उसका हिस्सा बन गई है। DoPT ने यह भी स्पष्ट किया है कि मिशन कर्मयोगी में सभी सिविल सेवक, सिविल पदों पर नियुक्त लोग और अस्थायी कर्मचारी भी आते हैं, जो केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के लिए काम करते हैं।



इसके साथ ही जो मंत्रालय और विभाग चाहें, वे अपने अधीन आने वाली स्वायत्त संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों (Public Sector Enterprises) के कर्मचारियों के लिए भी यही नियम लागू कर सकते हैं।



कर्मचारियों के लिए यह मायने क्यों रखता है?

सरल शब्दों में कहें तो अब ट्रेनिंग और प्रदर्शन को अलग नहीं देखा जाएगा। जो अधिकारी ट्रेनिंग नहीं करेगा उसकी APAR अधूरी रहेगी। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने हाल ही में प्रशिक्षित कर्मचारियों का मूल्यांकन किया था। पाया था कि उनकी डेटा एनालिटिक्स व ई-गवर्नेंस टूल्स में दक्षता बढ़ी है। यह एक सकारात्मक संकेत है।



संदर्भ स्रोत



DoPT Office Memorandum, 4 जुलाई 2025, T-28/27/2025-iGOT (dot.gov.in)


DoPT Office Memorandum, 5 फरवरी 2026 (staffnews.in / govtstaff.com)



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