21 साल की सर्विस में 24वां ट्रांसफर, जानें कौन हैं आईएएस तुकाराम मुंढे
News In Short
- महाराष्ट्र सरकार ने आईएएस तुकाराम मुंढे का एक बार फिर तबादला किया है।
- 21 साल की सरकारी सेवा में यह उनका 24वां ट्रांसफर है।
- उन्हें दिव्यांग कल्याण विभाग से आपदा प्रबंधन विभाग में भेजा गया है।
- मुंढे महाराष्ट्र के बीड़ जिले के एक किसान परिवार से आते हैं।
- 2005 में यूपीएससी (UPSC - Union Public Service Commission) पास कर वे IAS बने थे।
News In Detail
21 साल के करियर में 24 ट्रांसफर
महाराष्ट्र में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वह नाम है आईएएस अफसर तुकाराम मुंढे का। मंगलवार, 31 मार्च को महाराष्ट्र सरकार ने जब प्रशासनिक फेरबदल किया तो मुंढे का नाम फिर सामने आया। 21 साल की सरकारी सेवा में यह उनका 24वां तबादला है। इसी कारण उन्हें महाराष्ट्र का अशोक खेमका कहा जाने लगा है।
अशोक खेमका हरियाणा के वे आईएएस हैं जो ईमानदारी के चलते दशकों से बार-बार ट्रांसफर झेल रहे हैं। मुंढे की कहानी भी उनसे मिलती-जुलती है।
किसान परिवार से आते हैं मुंढे
आईएएस तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र के बीड़ जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान थे। परिवार ओबीसी (OBC - Other Backward Class) की वंजारी जाति से आता है। शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद के सरकारी स्कूल में हुई।
10वीं के बाद वे औरंगाबाद में अपने रिश्तेदारों के पास आ गए। यहां रहकर उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। साल 2005 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बन गए। यह सफर आसान नहीं था लेकिन उन्होंने इसे संभव कर दिखाया।
पहली पोस्टिंग से ही बनाई अलग पहचान
मुंढे की पहली पोस्टिंग सोलापुर में सब-कलेक्टर के रूप में हुई थी। शुरुआत से ही उनकी छवि एक सख्त और निडर अफसर की रही। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी कार्रवाई हमेशा चर्चा में रहती है। उन्होंने कई मामलों में अवैध गतिविधियों पर भारी जुर्माना ठोका।
पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (PMPML - Pune Mahanagar Parivahan Mahamandal Limited) में भी वे काम कर चुके हैं। नवी मुंबई के कमिश्नर की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली। उनके प्रशासनिक करियर में उन्हें कई महत्वपूर्ण पुरस्कार भी मिले हैं।
इस बार कहां से कहां हुआ तबादला
ताजा आदेश के मुताबिक मुंढे को मुंबई मंत्रालय में दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव पद से हटाया गया है। अब उन्हें राज्य सचिवालय में राजस्व और वन विभाग के तहत आपदा प्रबंधन, पुनर्वास और पुनर्स्थापन सचिव बनाया गया है। यह तबादला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अगस्त 2025 में उन्हें दिव्यांग कल्याण विभाग में नियुक्त किया गया था। उस पद पर अभी एक साल भी नहीं हुआ था।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक दक्षता और रिक्त पदों को भरने के लिए किया गया है। लेकिन मुंढे जैसे अफसर का इतनी बार ट्रांसफर होना कई सवाल जरूर खड़े करता है।
ईमानदारी का यही है रिकॉर्ड?
तुकाराम मुंढे की पहचान कभी सत्ता की परवाह न करने वाले अफसर की रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सख्ती किसी को नहीं बख्शती। यही उनकी ताकत है और शायद यही उनके बार-बार ट्रांसफर की वजह भी। देश में ऐसे अफसरों की कहानियां एक बड़ा सवाल उठाती हैं कि क्या व्यवस्था ईमानदारी को बर्दाश्त कर पाती है?
सरकार ने इस बार भी उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी दी है। आपदा प्रबंधन और पुनर्वास जैसे संवेदनशील विभाग में उनकी सख्त कार्यशैली काम आ सकती है।
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