126 साल में दूसरी बार सूखा जा रहा जून: 42% कम बारिश, MP-UP में लू का कहर
समझें क्या है पूरा मामला...
- 126 साल में दूसरा सबसे सूखा जून, 42% कम बारिश।
- एमपी में लू का अलर्ट, मानसून 25 जून के बाद आएगा।
- मेघालय में 530mm बारिश, राजस्थान में ओले, MP में धूप।
- दाल-कपास की खेती पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंता।
- 2009 के बाद सबसे बुरा जून, देश प्यासा खेत सूखे।
जून ( june) 2026 भारत में पिछले 126 वर्षों का दूसरा सबसे सूखा जून बनता दिख रहा है। 21 जून तक देशभर में केवल 57.4 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य से 42.2 प्रतिशत कम है। इससे पहले 2009 में जून में 49 प्रतिशत कम बारिश हुई थी।
मध्यप्रदेश में मानसून 25 जून के बाद आने की संभावना है और अभी कई जिलों में लू का अलर्ट जारी है। दाल और कपास की बुआई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
रिकॉर्ड टूटा, बारिश नहीं आई
इस बार जून का महीना इतिहास में दर्ज होने वाला है, लेकिन खुशी के लिए नहीं। 21 जून 2026 तक देशभर में केवल 57.4 मिमी (मिलीमीटर) बारिश दर्ज हुई। यह सामान्य से 42.2 प्रतिशत कम है।
पिछले 126 वर्षों में सिर्फ एक बार जून इससे बुरा रहा था। वह था 2009, जब 49 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। किसान आसमान की तरफ देख रहे हैं। जमीन सूखी है।
MP के पांच जिलों में लू का अलर्ट
मध्यप्रदेश में मानसून की राह अभी लंबी है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून की एंट्री 25 जून के बाद होने की संभावना है। तब तक जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी जिलों में हीटवेव (Heatwave) का अलर्ट जारी किया गया है। गर्मी से राहत फिलहाल दूर है।
यूपी में 38 जिले लू की चपेट में
उत्तर प्रदेश में भी हालात गंभीर हैं। 38 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी है। प्रयागराज में तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस और वाराणसी में 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बांदा लगातार दूसरे दिन देश का सबसे गर्म शहर रहा जहां तापमान 42.6 डिग्री तक पहुँचा।
राजस्थान में ओले, मेघालय में रिकॉर्ड बारिश
देश में एक अजीब तस्वीर बनी हुई है। एक तरफ अधिकांश राज्य सूखे हैं। दूसरी तरफ मेघालय के खासी हिल्स जिले के मॉसिनराम में 24 घंटे में 530 मिमी बारिश दर्ज हुई।
यह राजस्थान के कई इलाकों में पूरे छह महीने होने वाली बारिश के बराबर है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में ओलावृष्टि भी हुई। जयपुर और चूरू में करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई।
दाल-कपास की खेती पर संकट
मानसून की देरी का सबसे बड़ा शिकार किसान हो रहे हैं। 12 जून तक खरीफ फसल (Kharif – गर्मी के मौसम में बोई जाने वाली फसलें) फसलों की बुआई 3.9 प्रतिशत घटकर 84.6 लाख हेक्टेयर रह गई।
दालों का रकबा 43.2 प्रतिशत और कपास की बुआई 28 प्रतिशत कम हुई है। हालांकि, धान की बुआई में 28.4 प्रतिशत की बढ़त रही है।
जलाशयों में अभी राहत
देश के प्रमुख जलाशयों में इस समय कुल क्षमता का 28.3 प्रतिशत पानी मौजूद है। यह पिछले 10 वर्षों के औसत से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। लेकिन अगर मानसून और देर से आया तो यह राहत भी लंबे समय तक नहीं टिकेगी।
मानसून कब आएगा?
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में एक मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है। इससे मानसून को छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्यप्रदेश और आसपास के इलाकों में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में अनुकूल परिस्थितियां बनने लगी हैं। मध्यप्रदेश और उत्तर भारत के लोगों को अभी और इंतजार करना होगा।
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