रील्स की लत ने बदला भारत का स्क्रीन टाइम: रोज ऑनलाइन वीडियो में 141 करोड़ घंटे खर्च कर रहे भारतीय, ओरमैक्स रिपोर्ट में खुलासा
141 करोड़ घंटे का हिसाब कैसे बना
66.49 करोड़ दर्शक और 14.9 घंटे का गणित सीधा है। दोनों को गुणा करें, तो हफ्ते में करीब 990 करोड़ घंटे बनते हैं। इसे सात दिन में बांटने पर रोज करीब 141 करोड़ घंटे निकलते हैं। यानी हर दर्शक का स्क्रीन टाइम रोज दो घंटे से ज्यादा है।
सोचिए एक बार, क्या आपके दिन के दो घंटे भी इसी में जाते हैं?
141 करोड़ घंटे को 8 घंटे के कामकाजी दिन में बदलें। नतीजा करीब 17.6 करोड़ वर्किंग डे रोज का निकलता है। यानी रोज 17.6 करोड़ लोग पूरे दिन काम करें, तो इतना समय बनेगा।
रील्स की लत कितनी गहरी हुई
रिपोर्ट के मुताबिक रील्स और शॉर्ट्स का स्क्रॉल लोगों को जकड़ रहा है। एक वीडियो खत्म होता है और अगला सामने आ जाता है। रील्स की लत(reels addiction) की चिंता अब शोध में दिख रही है।
शॉर्ट वीडियो से घटते ध्यान पर 42 अध्ययन
2026 की एक समीक्षा में 42 अध्ययनों को परखा गया। इनमें 46 हजार 912 युवाओं के आंकड़े शामिल थे। भारी शॉर्ट वीडियो इस्तेमाल का संबंध कम ध्यान और कम आत्म-नियंत्रण से मिला। एडिक्शन जैसे लक्षणों से भी यह जुड़ा पाया गया।
एल्गोरिदम कैसे पकड़ता है आपका ध्यान
यहां असली खेल एल्गोरिदम (कंप्यूटर का नियम) का है। यह नियम तय करता है कि आपको अगला वीडियो कौन सा दिखे। यूजर जितनी देर रुकता है, विज्ञापन और कमाई के मौके उतने बढते हैं।
आखिर अगली रील पर आपकी उंगली क्यों रुक जाती है?
टीवी और स्ट्रीमिंग पर भी बढ़ा समय
कनेक्टेड टीवी (इंटरनेट से जुड़ टीवी) की ऑडियंस एक साल में 60 प्रतिशत बढी। अब यह आंकड़ा 20.69 करोड़ पर पहुंच गया है। पेड OTT subscription भी 17.26 करोड़ तक पहुंच चुके हैं।
ओटीटी (Over The Top) सब्सक्रिप्शन का मतलब है पैसे देकर इंटरनेट वीडियो सेवा लेना। यानी वीडियो अब सिर्फ मोबाइल तक सीमित नहीं है।
जीडब्ल्यूआई और कनेक्टिंग द डॉट्स 2026 के आंकड़े दुनिया का हाल बताते हैं। दुनिया में लोग हर हफ्ते औसतन 11 घंटे 30 मिनट ऑनलाइन वीडियो देखते हैं। शॉर्ट वीडियो पर औसतन 6 घंटे 39 मिनट जाते हैं।
ध्यान की कारोबारी कीमत कितनी बड़ी है
यूजर जितनी देर स्क्रीन पर रहता है, उसके ध्यान की कीमत उतनी बढ़ती है। दुनिया में सोशल मीडिया विज्ञापन बाजार 2025 में 117.7 अरब डॉलर तक पहुंचा। एक साल में इसमें 32.6 प्रतिशत की बढत हुई। यह करीब 10.6 लाख करोड़ रुपए है।
डिजिटल वीडियो विज्ञापन भी 25.4 प्रतिशत बढकर 78 अरब डॉलर का हो गया। यह करीब 7 लाख करोड़ रुपए है। मेटा ने 2025 में 196.2 अरब डॉलर का विज्ञापन राजस्व दर्ज किया। रुपए में यह करीब 17.7 लाख करोड़ बैठता है।
आपका ध्यान अब प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी पूंजी है।
क्या कहता है 29.1 लाख करोड़ रुपए का अनुमान
भारत में रोजाना की कमाई 453 रुपए मानी गई है। इस आधार पर घंटों की संभावित कीमत करीब सात हजार 984 करोड़ रुपए रोज बैठती है। सालभर में यह करीब 29.1 लाख करोड़ रुपए होती है। यह असली आर्थिक नुकसान नहीं, संभावित कीमत का अनुमान है।
नींद, पढाई और परिवार पर असर
शोध के मुताबिक लगातार छोटे वीडियो देखने से काम में एकाग्रता नहीं रहती। एक और रील देखने का सिलसिला स्क्रीन से हटना मुश्किल बनाता है। देर रात की स्क्रॉलिंग नींद और परिवार के समय पर असर डाल रही है।
युवाओं पर यह असर ज्यादा है। समस्या बन चुके इस्तेमाल का संबंध तनाव और ध्यान की दिक्कतों से मिला। अगली बार रील पर अंगूठा रुके, तो घड़ी देख लीजिए। क्या आपका समय आपके हाथ में है?
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर हर उस घर की है, जहां मोबाइल या स्मार्ट टीवी चलता है। रोज 141 करोड़ घंटे सिर्फ आंकड़ा नहीं, करोड़ों लोगों का समय और ध्यान है। युवाओं पर असर ज्यादा है, इसलिए पढाई और मानसिक सेहत का सवाल अहम है। ओरमैक्स रिपोर्ट के आंकड़े भारत को वीडियो का बड़ा बाजार दिखाते हैं। सरकार, स्कूल और परिवार, तीनों के लिए यह बातचीत का विषय है। समाज को पूछना चाहिए कि समय का फैसला हम लेते हैं या एल्गोरिदम।
FAQ
- भारत में रोज कितने घंटे ऑनलाइन वीडियो देखे जाते हैं?
रोज करीब 141 करोड़ घंटे। ओरमैक्स रिपोर्ट के मुताबिक 66.49 करोड़ दर्शक हर हफ्ते औसतन 14.9 घंटे वीडियो देखते हैं। इसी आधार पर सालभर में करीब 517 अरब घंटे बनते हैं। - क्या शॉर्ट वीडियो से ध्यान घटता है?
2026 की एक समीक्षा में भारी शॉर्ट वीडियो इस्तेमाल का संबंध कम ध्यान और कम आत्म-नियंत्रण से मिला। इसमें 42 अध्ययन और 46,912 युवाओं के आंकड़े परखे गए। एडिक्शन जैसे लक्षण भी इससे जुडे पाए गए। - 29.1 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा क्या है?
यह समय की संभावित आर्थिक कीमत का अनुमान है। भारत में 453 रुपए की दैनिक कमाई मानकर 141 करोड़ घंटे की सालाना कीमत निकाली गई है। यह असली आर्थिक नुकसान नहीं है।