ईरान ने होर्मुज में दागी मिसाइल, बोला- अमेरिका को दी चेतावनी, चीन ने कहा, जंगल कानून नहीं चलेगा
News In Short
- ईरान ने होर्मुज में मिसाइल वीडियो शेयर किया।
- अमेरिका ने 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए।
- चीन ने जंगल कानून का विरोध किया।
- ईरान को 270 अरब डॉलर नुकसान का दावा।
- मोदी-ट्रम्प में 40 मिनट फोन पर बात हुई।
News In Detail
ईरान अमेरिका जंग: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) इन दिनों दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री मोर्चा बन गया है। ईरान ने मिसाइल दागने का वीडियो शेयर कर अमेरिका को साफ संदेश दे दिया है कि यह सिर्फ ट्रेलर है। अमेरिका की नाकाबंदी और ईरान की जवाबी चेतावनी के बीच चीन ने भी मोर्चा संभाल लिया है। यह टकराव अब सिर्फ दो देशों का नहीं, पूरी दुनिया की चिंता बन चुका है।
होर्मुज में बढ़ा तनाव
होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) दुनिया का सबसे अहम जलमार्ग है। दुनिया के करीब 20 फीसद तेल की आपूर्ति यहीं से होती है। अमेरिका ने यहां उन जहाजों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। ये वो जहाज हैं जो ईरान को टोल दे रहे थे। इस कदम के बाद तनाव अचानक कई गुना बढ़ गया है।
ईरान का मिसाइल वीडियो
ईरानी कॉन्सुलेट ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में होर्मुज में जहाजों पर मिसाइल (Missile Attack) दागी जा रही है। कैप्शन में लिखा था- अभी तो सिर्फ ट्रेलर है। पिक्चर अभी बाकी है। साथ ही ईरान ने अपनी मिसाइल बोट्स (Missile Boats) की ताकत भी दिखाई। यह संदेश सीधे अमेरिका को दिया गया था।
अमेरिका के 15 युद्धपोत तैनात
अमेरिका ने नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू करने के लिए बड़ी तैयारी की है। 15 से ज्यादा युद्धपोत होर्मुज क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। इनमें USS अब्राहम लिंकन भी शामिल बताया गया है। कई डिस्ट्रॉयर भी इस बेड़े का हिस्सा हैं। यह अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी नौसैनिक तैनाती मानी जा रही है।
चीन की शांति अपील
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने मिडिल ईस्ट संकट पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया को जंगल के कानून (Jungle Law) से नहीं चलाया जाना चाहिए। ताकतवर देश अपनी मनमानी नहीं कर सकते। उन्होंने चार सूत्रीय शांति प्रस्ताव भी पेश किया। इसमें सभी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा को सम्मान देने की बात कही।
ईरान को भारी नुकसान का दावा
ईरान ने दावा किया है कि उसे भारी आर्थिक नुकसान (Economic Loss) झेलना पड़ा है। अमेरिका और इजराइल के हमलों से करीब 270 अरब डॉलर की क्षति हुई है। ईरान ने यह भी कहा कि अमेरिका शुरू से ही भरोसे के काबिल नहीं रहा। बातचीत की जगह वह अपनी शर्तें थोपता आया है। इसी वजह से ईरान की ओर से कोई नरमी नहीं दिखाई जा रही।
सीजफायर वार्ता की संभावना
इन सब के बीच एक उम्मीद की किरण भी है। अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते शांति वार्ता (Peace Talks) हो सकती है। इस्लामाबाद और जेनेवा को संभावित जगह माना जा रहा है। वहीं ईरान और पाकिस्तान के बीच भी संवाद जारी है। दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है।
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