यूजर्स को बड़ा झटका: टेलीकॉम कंपनियों ने सस्ते रिचार्ज प्लान को किया खारिज
देश केतीनों बड़े टेलीकॉम ऑपरेटरजियो, एयरटेल औरवोडाफोन आइडिया ने सस्तेवॉइस और SMS प्लानदेने से साफइनकार कर दिया है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण(TRAI)ने एक प्रस्तावदिया था किकंपनियां ऐसे प्लानबनाएं जिनमेंडेटा न हो और वेसस्ते हों।
15 जून2026 को हुईखुली बैठक में तीनोंकंपनियों ने मिलकर इसप्रस्ताव का विरोधकिया। उपभोक्तासंगठनों ने इसेदेश के 25 से 30करोड़ गरीब,बुजुर्ग और ग्रामीणयूजर्स के साथ अन्यायबताया। ट्राई काअंतिम फैसला अभी आना बाकीहै।
ट्राई ने क्या प्रस्ताव दिया था?
TRAI (Telecom Regulatory Authority Of India)ने अप्रैल2026 में एकमसौदा नियम जारीकिया था। इसकानाम ड्राफ्टटेलीकॉम कंज्यूमरप्रोटेक्शन (13वांसंशोधन) रेगुलेशन2026 था।
इसमें कहागया था कि सभीकंपनियां हर वैलिडिटीअवधि के लिए वॉइसऔर SMS का अलग STV(Special Tariff Voucher) बनाएं। यह प्लान बंडल प्लान से सस्ता होना चाहिए और हर जगह दिखना चाहिए।मतलब साफ था। जो यूजर डेटा नहीं चाहते, उन्हें डेटा के लिए पैसे न देने पड़ें।
तीनों कंपनियों ने क्यों किया विरोध?
- जियो का तर्क:जियो ने कहा कि 4G और 5G नेटवर्क पूरी तरह इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) आधारित हैं। इन नेटवर्क में वॉइस कॉलभी डेटा के ऊपर ही चलती है। इसे वॉयस ओवरएलटीई (VoLTE – Voice over Long-TermEvolution) कहते हैं। इसलिए वॉइस को डेटासे अलग करना तकनीकी रूप से व्यावहारिकनहीं है।जियो ने यह भी कहा कि उसकेसबसे सस्ते प्लान में 88 फीसदी यूजर डेटाइस्तेमाल करते हैं। इसलिए मांग नहीं है।
- एयरटेल का तर्क:एयरटेल ने कहा किभारत की डिजिटल नीति डेटा आधारित है। UPI(Unified PaymentsInterface) से लेकर सरकारी सेवाएं सबडेटा पर निर्भर हैं। वॉइस-ओनली प्लानयूजर्स को डिजिटल दुनिया से काट देगा।
- वीआई का तर्क:वोडाफोन आइडिया ने कहाकि डेटा हटाने से यूजर को अचानक ज्यादाबिल आ सकता है। ऐप अपडेट, ओटीपीसेवाएं और बैकग्राउंडडेटा बिना रुके चलते रहते हैं।
उपभोक्ता संगठनों ने क्या कहा?
उपभोक्ता अधिकार समूहों और एनजीनेकंपनियों के तर्कों को सिरे से खारिजकर दिया है।उन्होंने कहा कि देश में 25 से 30करोड़ यूजर फीचर फोन इस्तेमाल करते हैं।ये लोग डेटा का उपयोग नहीं करते, फिर भीउन्हें डेटा बंडल वाले महंगे प्लानखरीदने पड़ते हैं। यह करोड़ों रुपए कीजबरदस्ती है।
उन्होंने एक और अहम बातकही। आदिवासी, पहाड़ी और दूरदराज केइलाकों में नेटवर्क टॉवर ठीक से डेटासेवा नहीं दे पाते। फिर भी उन्हीं यूजर्सको डेटा के पैसे देने पड़ते हैं।
डेटाकी दर को लेकर भी सवाल उठाए गए।एंट्री-लेवल प्लान में यूजर को लगभग 94से 99 रुपए प्रति GB (Gigabyte)देना पड़ता है। यह बड़े प्लान के मुकाबलेकाफी महंगा पड़ता है।
2024 में भी यही विरोध हुआ था
यह विवाद नया नहीं है। साल2024 में भी ट्राई ने इसी तरह काप्रस्ताव दिया था। तब भी कंपनियों ने यहीतर्क दिए थे। तब ट्राई ने कंपनियों को एकवॉइस-ओनली प्लान देने का निर्देश दियाथा।कंपनियों ने वह प्लान तो दिया,लेकिन उसे बढ़ावा नहीं दिया। अब ट्राईचाहता है कि ऐसे प्लान हर वैलिडिटी अवधिके लिए हों और यूजर को साफ दिखाई दें।
अब आगे क्या होगा?
ट्राई अब सभीपक्षों की बात सुनने के बाद अंतिम फैसलाकरेगा। अगर ट्राई ने प्रस्ताव को मंजूरीदी तो कंपनियों को सस्ते वॉइस-SMS प्लानदेने होंगे। अगर नहीं दिया तो करोड़ोंगरीब यूजर पहले की तरह महंगे बंडल प्लानखरीदते रहेंगे।
FAQ
- ट्राई ने सस्ते वॉइस-SMS प्लान का प्रस्ताव क्यों दिया?
ट्राई ने यह प्रस्ताव उन करोड़ों यूजर्स के लिए दिया जो डेटा इस्तेमाल नहीं करते। इनमें बुजुर्ग, ग्रामीण और कम आय वाले लोग शामिल हैं जो फीचर फोन इस्तेमाल करते हैं। ये लोग सिर्फ कॉल और SMS के लिए महंगे डेटा बंडल खरीदने पर मजबूर हैं। - टेलीकॉम कंपनियों ने इस प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
कंपनियों का कहना है कि 4जी और 5जी नेटवर्क में वॉइस कॉल भी डेटा के जरिए चलती है, इसलिए दोनों को अलग करना तकनीकी रूप से मुश्किल है। साथ ही उनका तर्क है कि यूपीआई, ओटीपी और सरकारी सेवाएं डेटा पर निर्भर हैं, इसलिए वॉइस-ओनली प्लान यूजर के हित में नहीं है। - अभी सस्ते वॉइस-SMS प्लान कब तक मिल सकते हैं?
ट्राई ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। सोमवार 15 जून 2026 की खुली बैठक के बाद ट्राई सभी पक्षों की राय का अध्ययन करेगा। उसके बाद ही संशोधित नियम अधिसूचित होंगे, जिसमें कुछ और समय लग सकता है।
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