जमीन केस जीतने के लिए बुजुर्ग महिला ने कोर्ट में किया टोटका, पहुंच गई जेल
समझें क्या है पूरा मामला
- चिकबल्लापुर में महिला ने कोर्ट में टोटका किया।
- महिला ने जज की कुर्सी पर सरसों डाली।
- मामला जमीन विवाद की सुनवाई से जुड़ा है।
- सीसीटीवी में महिला की हरकत रिकॉर्ड हुई।
- पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
कर्नाटक के चिकबल्लापुर में अंधविश्वास से जुड़ा मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला को जेल भेजा गया है। महिला ने कोर्ट का फैसला बदलने के लिए टोटका किया था। आरोप है कि महिला ने जज की कुर्सी और मेज पर सरसों छिड़की थी। वह अपने पक्ष में फैसला आने की उम्मीद कर रही थी।
यह घटना चिकबल्लापुर शहर के प्रथम अतिरिक्त सिविल और जेएमएफसी (Judicial Magistrate First Class) कोर्ट में हुई। घटना 9 जुलाई की सुबह करीब 9:30 बजे की बताई गई है। पुलिस के अनुसार महिला की पहचान मंजुला के रूप में हुई है। मंजुला की उम्र 65 साल है। वह चिकबल्लापुर शहर की रहने वाली है।
जमीन विवाद से जुड़ा मामला
पुलिस जांच में सामने आया कि महिला का एक जमीन विवाद कोर्ट में चल रहा था। उसी मामले की सुनवाई घटना वाले दिन होनी थी। आरोप है कि महिला ने कोर्ट परिसर में पहुंचकर जज की कुर्सी पर सरसों डाल दी। उसने जज के बैठने वाली जगह और डायस पर भी सरसों छिड़की।
कोर्ट कर्मचारियों ने जब कुर्सी पर सरसों देखी तो उन्हें शक हुआ। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की। सीसीटीवी फुटेज में महिला सरसों डालती हुई दिखाई दी। इसके बाद कोर्ट प्रशासन ने पुलिस को इसकी जानकारी दी। कोर्ट प्रशासन की शिकायत के आधार पर चिकबल्लापुर थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
कोर्ट स्टाफ की शिकायत पर कार्रवाई
चिकबल्लापुर के पुलिस अधीक्षक कुशल चौकसे ने मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोर्ट स्टाफ की शिकायत पर कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक के अनुसार पूछताछ में महिला ने अपनी गलती स्वीकार की। महिला ने बताया कि वह जमीन विवाद में जीत चाहती थी। फैसला अपने पक्ष में कराने के लिए उसने यह टोटका किया था। पुलिस ने इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी महिला को कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
काला जादू कानून में केस दर्ज
पुलिस ने महिला के खिलाफ कर्नाटक अमानवीय दुराचार और अंधविश्वास निवारण एवं उन्मूलन अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। यह कानून अंधविश्वास के नाम पर होने वाली गलत प्रथाओं को रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत लोगों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई की जाती है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में जांच जारी है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर अंधविश्वास से जुड़े मामलों पर चर्चा शुरू कर दी है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अदालत में किसी भी तरह की बाधा पैदा करना गंभीर मामला हो सकता है।
कोर्ट सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। अदालतों में बड़ी संख्या में लोग रोजाना पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखना जरूरी माना जाता है। सीसीटीवी कैमरों की वजह से यह मामला सामने आ सका। अदालतों में लोग अपने विवादों के समाधान के लिए जाते हैं। वहां कानून और प्रक्रिया के अनुसार ही फैसले होते हैं। किसी भी तरह के टोटके या अंधविश्वास से न्याय प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती है। विशेषज्ञ भी लोगों से कानून पर भरोसा रखने की अपील करते हैं।
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