भारत के कलपक्कम फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के ‘क्रिटिकल’ होने का क्या मतलब है और यह क्यों ऐतिहासिक है?

Pawan Modiya | Apr 07, 2026, 19:10 IST
Photograph: (the sootr)
कलपक्कम का PFBR क्रिटिकल हुआ। यह उपलब्धि वास्तव में क्या है? फास्ट ब्रीडर रिएक्टर होता क्या है... ‘क्रिटिकल’ होने का मतलब क्या है... और इससे भारत को क्या फायदा होगा? आइए इसे विस्तार से समझते हैं...

    भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम (Kalpakkam) में स्थापित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (Prototype Fast Breeder Reactor – PFBR) ने हाल ही में “क्रिटिकलिटी” (criticality) हासिल कर ली है। यह भारत के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए एक बड़ा माइलस्टोन माना जा रहा है और इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा तथा परमाणु तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम बताया जा रहा है।



    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे भारत की परमाणु यात्रा में “डिफाइनिंग स्टेप” यानी एक निर्णायक उपलब्धि बताया और वैज्ञानिकों-इंजीनियरों को बधाई दी।



    लेकिन यह उपलब्धि वास्तव में क्या है? फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (Kalpakkam Fast Breeder Reactor) क्या होता है, ‘क्रिटिकल’ होने का मतलब क्या है और इससे भारत को क्या फायदा होगा? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।



    ‘क्रिटिकल’ होने का मतलब क्या है?

    न्यूक्लियर रिएक्टर के संदर्भ में “क्रिटिकलिटी” का मतलब होता है कि रिएक्टर के भीतर नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया (controlled nuclear chain reaction) शुरू हो गई है।



    जब रिएक्टर “क्रिटिकल” हो जाता है, तब:



    • परमाणु ईंधन के परमाणु टूटते हैं (fission)
    • ऊर्जा के रूप में गर्मी उत्पन्न होती है
    • यह प्रक्रिया लगातार और नियंत्रित तरीके से चलती रहती है

    यही गर्मी बाद में भाप बनाकर टर्बाइन घुमाने और बिजली पैदा करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसलिए “क्रिटिकलिटी” किसी भी परमाणु रिएक्टर के संचालन का सबसे अहम शुरुआती चरण माना जाता है।



    कलपक्कम का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्या है?

    कलपक्कम में बना PFBR भारत का पहला प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है।



    इसकी मुख्य विशेषताएं

    • क्षमता: 500 मेगावाट बिजली उत्पादन
    • स्थान: कलपक्कम, तमिलनाडु
    • ईंधन: यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX)
    • कूलिंग सिस्टम: सोडियम-कूल्ड फास्ट रिएक्टर

    यह रिएक्टर भारत के तीन चरण वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमIndia Nuclear Energy Programme का दूसरा चरण माना जाता है। इसका डिजाइन इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च (IGCAR) ने तैयार किया है और इसे BHAVINI नामक सरकारी कंपनी संचालित करती है।



    07-11

    फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कैसे काम करता है?

    सामान्य परमाणु रिएक्टर और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में एक बड़ा फर्क होता है।



    सामान्य परमाणु रिएक्टर

    • जितना परमाणु ईंधन इस्तेमाल करता है
    • उतना ही खत्म कर देता है

    फास्ट ब्रीडर रिएक्टर

    • जितना ईंधन इस्तेमाल करता है
    • उससे ज्यादा नया ईंधन पैदा करता है

    इसी वजह से इसे “ब्रीडर” (Breeder) कहा जाता है।



    यह रिएक्टर यूरेनियम-238 से प्लूटोनियम पैदा कर सकता है और भविष्य में थोरियम से यूरेनियम-233 भी तैयार किया जा सकता है। यानी यह तकनीक न्यूक्लियर ईंधन को बढ़ाने की क्षमता रखती है।



    भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम में PFBR की भूमिका

    भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (India Nuclear Technology)तीन चरणों में बनाया गया है।



    चरण 1 – PHWR रिएक्टर

    • ईंधन: प्राकृतिक यूरेनियम
    • उद्देश्य: प्लूटोनियम उत्पादन

    चरण 2 – फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR)

    • ईंधन: प्लूटोनियम
    • उद्देश्य: और ज्यादा परमाणु ईंधन तैयार करना

    चरण 3 – थोरियम आधारित रिएक्टर

    • ईंधन: थोरियम
    • लक्ष्य: दीर्घकालिक ऊर्जा उत्पादन

    PFBR इस पूरी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पुल (bridge) माना जाता है क्योंकि यह प्लूटोनियम और यूरेनियम-233 पैदा करने में मदद करेगा।



    भारत के लिए यह उपलब्धि इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

    1. ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी

    भारत की बिजली मांग लगातार बढ़ रही है।



    फास्ट ब्रीडर रिएक्टर:



    • ज्यादा ईंधन पैदा कर सकता है
    • लंबे समय तक ऊर्जा उत्पादन कर सकता है

    इससे भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।



    2. थोरियम संसाधनों का उपयोग

    भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है।



    लेकिन थोरियम को सीधे रिएक्टर में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।



    PFBR:



    • थोरियम से यूरेनियम-233 पैदा करने में मदद करेगा
    • जिससे तीसरे चरण के रिएक्टर चलेंगे

    इससे भारत को हजारों वर्षों तक ऊर्जा मिल सकती है।



    3. परमाणु तकनीक में आत्मनिर्भरता

    कलपक्कम का यह रिएक्टर स्वदेशी डिजाइन और तकनीक से बना है।



    यह दिखाता है कि भारत:



    • जटिल परमाणु तकनीक विकसित कर सकता है
    • बड़े स्तर पर न्यूक्लियर प्रोजेक्ट बना सकता है

    इससे आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) मिशन को भी मजबूती मिलती है।



    4. स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा स्रोत

    परमाणु ऊर्जा:



    • कार्बन उत्सर्जन कम करती है
    • जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करती है

    भारत के लिए यह क्लीन एनर्जी का महत्वपूर्ण विकल्प है।



    इस परियोजना का लंबा सफर

    PFBR का विचार नया नहीं है।



    • डिजाइन की शुरुआत: 1980 के दशक
    • निर्माण शुरू: 2004
    • कई तकनीकी चुनौतियां और देरी
    • अंततः अब जाकर क्रिटिकलिटी हासिल

    इस परियोजना पर हजारों वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने दशकों तक काम किया।



    क्या इससे परमाणु हथियार भी बन सकते हैं?

    कुछ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर से प्लूटोनियम उत्पादन संभव है, जिसका उपयोग हथियारों में भी हो सकता है।



    हालांकि भारत ने हमेशा कहा है कि यह रिएक्टर ऊर्जा उत्पादन और नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए है।



    दुनिया में कितने देश चला रहे हैं फास्ट ब्रीडर रिएक्टर?

    फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बहुत उन्नत तकनीक है और दुनिया के बहुत कम देशों के पास है।



    इनमें प्रमुख हैं:



    • रूस
    • फ्रांस
    • जापान
    • भारत (अब इस सूची में प्रमुख स्थान)

    इसलिए कलपक्कम की सफलता भारत को एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी क्लब में मजबूत स्थिति देती है।



    आगे क्या होगा?

    PFBR के “क्रिटिकल” होने के बाद अभी कुछ और चरण पूरे होने हैं।



    आगे की प्रक्रिया:



    1. कम शक्ति पर परीक्षण
    2. सुरक्षा परीक्षण
    3. धीरे-धीरे पूर्ण क्षमता पर संचालन

    अनुमान है कि यह रिएक्टर पूरी तरह व्यावसायिक संचालन के लिए अगले चरणों में जाएगा। इसके बाद भारत और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बनाने की योजना भी बना सकता है।



    कलपक्कम का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसका “क्रिटिकल” होना सिर्फ एक तकनीकी घटना नहीं बल्कि:



    • ऊर्जा आत्मनिर्भरता
    • स्वदेशी विज्ञान
    • थोरियम आधारित भविष्य
    • स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन

    इन सभी दिशाओं में भारत के लिए बड़ा कदम है। अगर यह परियोजना सफलतापूर्वक पूरी क्षमता से चलती है, तो आने वाले दशकों में भारत न्यूक्लियर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ सकता है।



    FAQs

    1. PFBR क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

    PFBR (Prototype Fast Breeder Reactor) एक उन्नत परमाणु रिएक्टर है जो बिजली उत्पादन के साथ नया परमाणु ईंधन भी पैदा करता है। यह भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण का हिस्सा है।



    2. रिएक्टर के ‘क्रिटिकल’ होने का क्या मतलब होता है?

    जब किसी परमाणु रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हो जाती है, तो उसे “क्रिटिकल” कहा जाता है। यह रिएक्टर संचालन का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है।



    3. कलपक्कम फास्ट ब्रीडर रिएक्टर से भारत को क्या फायदा होगा?

    कलपक्कम फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करेगा, थोरियम संसाधनों के उपयोग का रास्ता खोलेगा और स्वच्छ परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगा।



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