कर्नाटक कोर्ट का अनोखा आदेश, रईसजादे को सड़क पर सफाई करने की सजा
News in Short
- कर्नाटक हाईकोर्ट ने लैंबोर्गिनी मालिक को सड़क सफाई की सजा दी।
- वीडियो में लैंबोर्गिनी मालिक को लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए दिखाया गया था।
- आरोपी को ट्रैफिक शिक्षा देने से कोर्ट ने इंकार किया।
- आरोपी ने साइलेंसर बदलने के बाद याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
- सामुदायिक सेवा के तहत सड़क सफाई करने का आदेश दिया गया।
News in Detail
कर्नाटक में एक लैंबोर्गिनी (Lamborghini ) कार मालिक को लापरवाही से गाड़ी चलाने का खामियाजा भुगतना पड़ा। कर्नाटक हाईकोर्ट ने उसे सजा के रूप में सड़क पर सफाई करने का आदेश दिया है।
यह मामला तब सामने आया जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में लैंबोर्गिनी मालिक को साइलेंसर लगी गाड़ी लापरवाही से चलाते हुए दिखाया गया था।
सामुदायिक सेवा के तौर पर सड़क सफाई
जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया। हालांकि, इसके बदले उन्होंने उसे सामुदायिक सेवा के तौर पर सड़क पर सफाई करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए खुद को सुधारने का मौका मिलेगा। वह अब दूसरों को ट्रैफिक नियमों के बारे में नहीं सिखा सकता क्योंकि उसने खुद इन नियमों का उल्लंघन किया था।
ट्रैफिक शिक्षा पर सवाल
आरोपी के वकील ने सुझाव दिया था कि वह स्कूली बच्चों को ट्रैफिक संकेत सिखाएगा। लेकिन जस्टिस नागप्रसन्ना इससे सहमत नहीं थे। उन्होंने कहा कि जब आरोपी खुद ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर पाया, तो वह कैसे दूसरों को सिखाएगा। इसके बाद कोर्ट ने सामुदायिक सेवा की सजा का आदेश देते हुए मामला रद्द कर दिया।
क्यों हुआ केस दर्ज?
यह घटना दिसंबर 2025 की है, जब लैंबोर्गिनी मालिक का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में वह गाड़ी को साइलेंसर से चलाते हुए दिखा था, जिससे यह मामला सामने आया। हालांकि, आरोपी ने साइलेंसर को बदलने के बाद अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे मामूली गलती मानने से इंकार कर दिया।
कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला
कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले में सामुदायिक सेवा को सजा के तौर पर अपनाने का निर्णय लिया। सरकार के वकील ने इसे उचित कदम बताया, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि आरोपी को स्कूलों में ट्रैफिक शिक्षा देने का जिम्मा दिया जाए।
UCC पर सियासत तेज : आदिवासी पहचान को लेकर सिंघार का बड़ा सवाल, सरकार से मांगा साफ रोडमैप