33 फीसदी महिला आरक्षण के बाद MP, CG और राजस्थान कितना फायदा, जानिए परिसीमन का पूरा गणित

Pawan Modiya | Mar 27, 2026, 17:35 IST
Photograph: (the sootr)
महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा सीटें 543 से 816 होने का प्रस्ताव है। नए फॉर्मूले से MP में 29 से 44, राजस्थान में 25 से 38 और CG में 11 से 17 सीटें हो सकती हैं। 2011 जनगणना इसका आधार होगी।

केंद्र सरकार महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी में है।प्रस्ताव के मुताबिक हर राज्य की सीटें 50 फीसदी बढ़ाई जाएंगी, ताकि किसी राज्य का हिस्सा कम न हो। इस फॉर्मूले से मध्य प्रदेश में 29 की जगह 44, राजस्थान में 25 की जगह 38 और छत्तीसगढ़ में 11 की जगह 17 सीटें हो सकती हैं। परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) 2011 की जनगणना के आधार पर नई सीमाएं तय करेगा। 273 नई सीटें सीधे महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और यह व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होने की उम्मीद है। आइए, इस मामले को विस्तार से समझते हैं…



महिला आरक्षण और सीटों का गणित

केंद्र सरकार संसद में दो संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। इनसे मिलकर लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी और कुल सीटों का एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। सरकार के प्रस्ताव में हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश की लोकसभा सीटें 50 फीसदी तक बढ़ाई जाएंगी। जिन राज्यों में सीटें विषम संख्या में हैं, वहां परिसीमन आयोग अनुपात के हिसाब से फैसला करेगा। यही वजह है कि मध्य प्रदेश की 29 सीटें 44 और तमिलनाडु की 39 सीटें 59 बनने का अनुमान है। इस प्रस्ताव की सबसे अहम बात यह है कि 273 आरक्षित सीटें पुरानी सीटों में से नहीं ली जाएंगी, बल्कि नई सीटों से बनाई जाएंगी। इससे किसी मौजूदा सांसद को अपनी सीट महिला कोटा में नहीं देनी पड़ेगी। नई व्यवस्था के तहत आरक्षण ऊर्ध्वाधर आधार (Vertical Basis) पर होगा। यानी एससी (SC-Scheduled Caste) और एसटी (ST-Scheduled Tribe) की सीटों में भी महिला कोटा लागू होगा।



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MP, राजस्थान और CG में क्या बदलेगा?

मध्य प्रदेश में सीटें 29 से बढ़कर 44 हो जाएंगी, जिनमें 15 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। राजस्थान में 25 सीटों की जगह 38 सीटें हो जाएंगी। इसी अनुपात में छत्तीसगढ़ की 11 सीटें बढ़कर करीब 17 होने का अनुमान है। यह बढ़ोतरी इन राज्यों के लिए बड़ी बात है। बता दें कि 2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश की आबादी देश की कुल जनसंख्या का 6 फीसदी हो गई है। अभी राज्य में एक लोकसभा सांसद औसतन 25 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। नई व्यवस्था में यह बोझ कम होगा।



एक नजर में समझें वर्तमान स्थिति

  • स्टेट: मध्यप्रदेश
  • अभी लोकसभा सीटें: 29
  • जनसंख्या (2011) : 7,26,26,809
  • औसत सांसद का प्रतिनिधित्व : 25 लाख

नए परिसीमन के बाद स्थिति

  • स्टेट: मध्यप्रदेश
  • अभी लोकसभा सीटें: 44
  • जनसंख्या (2011) : 7,26,26,809
  • औसत सांसद का प्रतिनिधित्व : 16 लाख

एक नजर में समझें वर्तमान स्थिति

  • स्टेट: राजस्थान
  • अभी लोकसभा सीटें: 25
  • जनसंख्या (2011): 6,85,48,437
  • औसत सांसद का प्रतिनिधित्व : 27 लाख

नए परिसीमन के बाद स्थिति

  • स्टेट: राजस्थान
  • अभी लोकसभा सीटें: 38
  • जनसंख्या (2011) : 6,85,48,437
  • औसत सांसद का प्रतिनिधित्व : 18 लाख

एक नजर में समझें वर्तमान स्थिति

  • स्टेट: छत्तीसगढ़
  • अभी लोकसभा सीटें: 11
  • जनसंख्या (2011) : 2,55,45,198
  • औसत सांसद का प्रतिनिधित्व : 23 लाख

नए परिसीमन के बाद स्थिति

  • स्टेट: छत्तीसगढ़
  • अभी लोकसभा सीटें: 38
  • जनसंख्या (2011) : 2,55,45,198
  • औसत सांसद का प्रतिनिधित्व : 15 लाख

शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, 2011 की जनगणना के आधार पर सीटें बांटी जाएं तो उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान को मिलाकर 22 सीटें ज्यादा मिलतीं। वहीं आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को 17 सीटें गंवानी पड़तीं। लेकिन अब 50 फीसदी वृद्धि के फॉर्मूले से यह टकराव टाला जा रहा है।





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नई सीटें बनेंगी कैसे?

यह सवाल सबसे जरूरी है और इसका जवाब साफ है। अभी कोई भी नहीं जानता कि MP, राजस्थान या छत्तीसगढ़ में कौन सी पुरानी सीट टूटकर नई सीटें बनेगी। दरअसल, परिसीमन आयोग का गठन होने के बाद वह 2011 की जनगणना के आधार पर हर राज्य में सीटों की सीमाएं तय करेगा। नई सीटें कहां से बनाई जाएंगी, यह पूरी तरह आयोग के हाथ में होगा। 2022 में गठित परिसीमन आयोग ने 2001 की जनगणना के आधार पर अपना काम पूरा करने में पांच साल लगाए थे। इसलिए अगले आयोग के काम में भी समय लगेगा।



परिसीमन का जनसंख्या आनुपातिक नियम

संविधान के अनुसार, हर राज्य को लोकसभा में जो सीटें मिलती हैं, वह उसकी जनसंख्या पर निर्भर होती है। संविधान में हर जनगणना के बाद सीटों के पुनर्निर्धारण का प्रावधान है। यही "एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य" का सिद्धांत है। 1976 में 42वें संविधान संशोधन से परिसीमन की प्रक्रिया को रोक दिया गया। इसके बाद 2002 में 84वें संशोधन से यह रोक 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ा दी गई। 87वें संशोधन ने 2001 की जनगणना के आधार पर राज्यों के भीतर सीमाएं तय करने की अनुमति दी, लेकिन राज्यवार सीटों की संख्या नहीं बदली। राजस्थान में एक सांसद औसतन करीब 27 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा करीब 18.5 लाख है। यही असंतुलन दशकों से चला आ रहा है।



2029 में लागू होगी नई व्यवस्था?

सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर 2029 तक महिला आरक्षण लागू करना चाहती है। दोनों विधेयकों के पास होने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और अगले लोकसभा चुनाव में 816 सीटों पर मुकाबला होगा।



FAQ


सवाल: मध्य प्रदेश में लोकसभा सीटें 29 से 44 कैसे होंगी?


जवाब: केंद्र सरकार के प्रस्ताव में हर राज्य की सीटें करीब 50 फीसदी बढ़ाने का फॉर्मूला है। मध्य प्रदेश में मौजूदा 29 सीटों पर 50 फीसदी जोड़ने पर 43.5 बनता है, जिसे परिसीमन आयोग 44 कर सकता है। इनमें से 15 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह बदलाव 2011 की जनगणना के आधार पर होगा और 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होने की उम्मीद है।



सवाल: परिसीमन (Delimitation) क्या होता है और नई सीटें कहां से बनेंगी?


जवाब: परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसमें एक स्वतंत्र आयोग जनसंख्या के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय करता है। भारत में यह काम परिसीमन आयोग करता है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश करते हैं। नई सीटें कहां से बनेंगी, यानी कौन सी पुरानी सीट टूटकर नई सीट बनेगी, यह आयोग ही तय करेगा। अभी तक इसका कोई अधिकारिक खाका सार्वजनिक नहीं हुआ है।



सवाल: क्या दक्षिण भारत के राज्यों को इस परिसीमन से नुकसान होगा?


जवाब: 50 फीसदी वृद्धि के इस फॉर्मूले को खासतौर पर इसीलिए बनाया गया है कि दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान न हो। अगर सिर्फ जनसंख्या के आधार पर 543 सीटें बांटी जाती तो तमिलनाडु और केरल जैसे राज्य, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई, उन्हें 16 से 26 सीटें गंवानी पड़तीं। लेकिन नए प्रस्ताव में हर राज्य की मौजूदा सीटें बनी रहेंगी और केवल नई सीटें जुड़ेंगी।



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