ITR रिफंड के नाम पर ३५७ करोड़ का चूना, आयकर विभाग की गिरफ्त में नैंसी अग्रवाल

Manya Jain | Jul 19, 2026, 18:56 IST
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मेरठ में 357 करोड़ रुपए के बड़े टैक्स रिफंड फ्रॉड का खुलासा। मुख्य आरोपी नैन्सी अग्रवाल पर आरोप। देशभर के 3 हजार से ज्यादा लोग इस फर्जी नेटवर्क से जुड़े हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मेरठ में आयकर विभाग ने बड़े टैक्स रिफंड फ्रॉड का खुलासा किया।
  • नैन्सी अग्रवाल पर 357 करोड़ रुपये टैक्स फ्रॉड आरोप है।
  • आरोप है कि रैकेट ने हजारों क्लाइंट्स को जोड़ा था।
  • देशभर के 3 हजार से ज्यादा लोगों से जुड़ा मामला।
  • छापेमारी के बाद फर्जी टैक्स रिफंड नेटवर्क सामने आया है।

मेरठ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आयकर विभाग की जांच में एक ऐसे रैकेट का खुलासा हुआ है, जो एक छोटी सी झुग्गी से चलाया जा रहा था। आरोपी का नाम नैन्सी अग्रवाल बताया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस रैकेट के जरिए देश भर के हजारों लोगों को फर्जी टैक्स रिफंड दिलाया गया।



इतनी बड़ी रकम का कथित फ्रॉड एक छोटे से घर से चलने की बात सामने आने के बाद जांच एजेंसियां भी हैरान हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि टैक्स सिस्टम की खामियों का किस हद तक फायदा उठाया जा सकता है। यही वजह है कि अब पूरे रैकेट की गहराई से जांच की जा रही है।



कैसे हुआ खुलासा

मंगलवार को मेरठ इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने कई ठिकानों पर छापेमारी की। इसी छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये के इस कथित रैकेट का खुलासा हुआ। अधिकारियों ने आरोपी से जुड़ी चार जगहों पर तलाशी ली। इस दौरान उसके दो बैंक लॉकर भी खोले गए।



तलाशी में अधिकारियों को 5 लाख रुपये नकद और 4 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट मिली। इसके अलावा हाथ से लिखे लेजर, कंप्यूटर और लैपटॉप भी बरामद हुए। इन दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों में आरोपी के पूरे क्लाइंट नेटवर्क की जानकारी मिलने का दावा किया गया है।



अधिकारियों के मुताबिक बरामद दस्तावेजों से जांच एजेंसियों को आरोपी के पूरे कारोबार का ढांचा समझने में मदद मिली है। हाथ से लिखे लेजर में क्लाइंट्स के नाम, रकम और डोनेशन की फर्जी एंट्री होने की बात कही जा रही है। डिजिटल डिवाइस से मिले डेटा की अब तकनीकी टीम जांच कर रही है।



कौन हैं नैंसी अग्रवाल?

पूछताछ और जांच में एक नया खुलासा हुआ है। नैंसी अग्रवाल ने साल 2014 में अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। उसने ब्रह्मपुरी के चावली देवी कन्या इंटर कॉलेज से पढ़ाई की थी।



इसके बाद उसने डीएन डिग्री कॉलेज से बीकॉम की डिग्री ली। फिर नैंसी ने एक छोटी फर्म में अकाउंटेंट का काम संभाला। साल 2023-24 में उसने गुप्ता ब्रदर्स के यहां ट्रेनिंग शुरू की। वहां उसने आईटीआर (ITR) फाइल करने की बारीकियां सीखीं। अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है।



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गुप्ता ब्रदर्स के प्रियम गुप्ता ने सारा दोष नैंसी पर डाल दिया है। दूसरी तरफ नैंसी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। नैंसी का कहना है कि सर्वे की हकीकत सबके सामने है।



वह अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर इसका कानूनी जवाब देगी। उसके पिता संजीव गुप्ता, मां रचना और भाई विशाल उसके साथ हैं। वे सभी मिलकर विभाग के आरोपों का डटकर सामना करेंगे।





225 स्क्वायर फीट के घर से चला खेल

जांचकर्ताओं के मुताबिक आरोपी सिर्फ 225 स्क्वायर फीट के छोटे से घर से यह पूरा कथित फर्जीवाड़ा चला रही थी। उसके परिवार में माता-पिता और एक छोटा भाई है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पिछले तीन साल से एक छोटी फर्म में अकाउंटेंट के तौर पर काम कर चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार उसने इसी अनुभव का इस्तेमाल कर सिस्टम की खामियों का फायदा उठाया।



धारा 80GGC का कथित गलत इस्तेमाल

जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी ने पिछले तीन सालों में इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80GGC का व्यवस्थित तरीके से गलत इस्तेमाल किया। यह धारा लोगों को राजनीतिक दलों को दिए गए डोनेशन पर टैक्स छूट का दावा करने की अनुमति देती है। आरोप है कि आरोपी ने क्लाइंट्स की तरफ से गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को भारी डोनेशन दिखाकर बड़े रिफंड हासिल किए।



इस पूरे मामले की जांच कर रहे इनकम टैक्स ऑफिसर माखन मीना ने कहा कि आरोपी ने रेफरल डिस्काउंट के जरिए देश भर में क्लाइंट नेटवर्क बनाया। आरोप है कि उसने लोगों को गलत टैक्स कटौती का दावा करने के लिए लुभाया। अपना कारोबार बढ़ाने के लिए आरोपी ने क्लाइंट्स को प्रमोशनल डिस्काउंट का ऑफर भी दिया, अगर वे ऐसे नए ग्राहक लाते जो गलत आईटीआर फाइल करने को तैयार हों।



अब आगे क्या होगा

आयकर विभाग ने अब आरोपी पर मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही फर्जी दावों की रकम वसूलने के लिए फायदा उठाने वाले टैक्सपेयर्स को नोटिस भेजने की तैयारी भी शुरू हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक ज्यादातर क्लाइंट सैलरी पाने वाले सामान्य लोग हैं।



अधिकारियों का कहना है कि ये क्लाइंट या तो जानबूझकर या फिर अनजाने में ज्यादा रिफंड के वादों से लुभाए गए थे। यह मामला दिखाता है कि टैक्स रिफंड से जुड़े लालच भरे ऑफर पर भरोसा करने से पहले सावधानी बरतना कितना जरूरी है। फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और आरोपों की पुष्टि अदालत में ही हो पाएगी।जानकारी न रही हो। मेरठ न्यूज



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