अमेरिका-ईरान वार्ता फेल होने के बाद मोदी और ट्रंप के बीच 40 मिनट बातचीत
News In Short
- मोदी-ट्रंप में 40 मिनट फोन पर बातचीत हुई।
- होर्मुज को खुला रखने पर जोर दिया गया।
- अमेरिका-ईरान 21 घंटे की वार्ता विफल हुई।
- पश्चिम एशिया संकट पर दोनों ने चर्चा की।
- वैश्विक रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर सहमति।
News In Detail
अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे की वार्ता विफल होने के बाद दुनिया की नजरें भारत और अमेरिका पर टिक गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच 40 मिनट की फोन वार्ता हुई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को खुला और सुरक्षित रखना इस बातचीत का केंद्रबिंदु रहा। यह बैठक दोनों देशों की बढ़ती वैश्विक साझेदारी का अहम संकेत है।
मोदी-ट्रंप की अहम बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। यह वार्ता करीब 40 मिनट तक चली। ट्रंप ने खुद मोदी को फोन किया। इस दौरान पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) पर विस्तार से चर्चा की गई। सीजफायर के बाद यह दोनों नेताओं की पहली बातचीत थी।
होर्मुज को खुला रखना जरूरी
पीएम मोदी ने बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इसे खुला और सुरक्षित रखने की जरूरत पर बल दिया। होर्मुज से दुनिया का करीब 20 फीसद तेल गुजरता है। इसकी नाकाबंदी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकती है। इसीलिए भारत इस मुद्दे पर खासतौर पर सतर्क है।
द्विपक्षीय सहयोग पर समीक्षा
दोनों नेताओं ने भारत अमेरिका संबंध (India-US Relations) की भी समीक्षा की। विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष जताया गया। दोनों ने वैश्विक रणनीतिक साझेदारी (Global Strategic Partnership) को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह बातचीत दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
अमेरिका-ईरान वार्ता विफल हुई
इस बातचीत की पृष्ठभूमि में एक बड़ी विफलता भी है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच करीब 21 घंटे तक वार्ता (US-Iran Talks) चली। कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद यह वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। इससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया।
24 मार्च को भी हुई थी बात
यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेताओं ने होर्मुज पर बात की। इससे पहले 24 मार्च को भी मोदी और ट्रंप के बीच फोन वार्ता हुई थी। उस बातचीत में भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को खोलने पर चर्चा हुई थी। हालांकि, तब भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था। अब एक बार फिर दोनों देश मिलकर रास्ता निकालने की कोशिश में हैं।
भारत की भूमिका अहम होगी
पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। भारत न तो अमेरिका और न ही ईरान के खिलाफ खड़ा है। वह शांति और स्थिरता का पक्षधर देश है। होर्मुज विवाद में भारत का सक्रिय रुख इसी नीति को दर्शाता है। आने वाले दिनों में भारत की कूटनीतिक भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।
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