पीएम मोदी का महिलाओं के नाम पत्र: नारी वंदन अधिनियम पर कहा- बेटियों को हक के लिए इंतजार नहीं करा सकते
Amresh Kushwaha | Apr 14, 2026, 13:24 IST
pm modi letter women nari shakti vandan adhiniyam 2029
पीएम नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में जल्द संविधान संशोधन की बात कही है। साथ ही, 2029 चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने की उम्मीद जताई है।
News In Short
- PM मोदी ने 14 अप्रैल को महिलाओं के नाम खुला पत्र लिखा है।
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर संसद में 18 सितंबर से चर्चा होगी।
- पीएम ने 2029 के चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने की बात कही है।
- PM ने महिलाओं से सांसदों को पत्र लिखने का आग्रह किया है।
- तीन दशकों की कोशिशों के बाद भी यह कानून अधूरा रहा है।
News In Detail
PM मोदी का महिलाओं के नाम पत्र
पीएम मोदी ने लिखा कि संवैधानिक मूल्यों की इसी भावना के साथ संसद में 18 सितंबर से नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) पर चर्चा शुरू होने जा रही है। उन्होंने महिलाओं से इस ऐतिहासिक कदम के लिए आशीर्वाद मांगा है।
देशभर की हमारी माताएं-बहनें और बेटियां, साल 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव से महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्णय की सराहना कर रही हैं।
भारत की नारी शक्ति को समर्पित अपने इस पत्र में मैंने दशकों से लंबित इस संकल्प को जल्द साकार करने के विषय में देशवासियों के साथ अपनी भावनाएं… pic.twitter.com/ybUGJj8Vtk
— Narendra Modi (@narendramodi) April 14, 2026
2029 चुनाव और महिला आरक्षण
उन्होंने लिखा कि इस विधेयक के पारित होने में किसी भी तरह की देरी दुर्भाग्यपूर्ण होगी। उनके शब्द थे कि देश की बेटियों को उनके हक के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं कराया जा सकता।
तीन दशकों की अधूरी कोशिश
पीएम ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले तीन से चार दशकों में विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिशें हुईं, लेकिन वे सफल नहीं हो सकीं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
हर क्षेत्र में आगे हैं महिलाएं
खेल के मैदान पर भारतीय महिला खिलाड़ी अधिक मेडल जीत रही हैं। वे नए रिकॉर्ड बना रही हैं और पुरानी सोच को बदल रही हैं। जमीनी स्तर पर काम करने वाले सेल्फ हेल्प ग्रुप और लखपति दीदियों ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है।
महिलाओं से खास अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि इस संविधान संशोधन को सदियों तक याद किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि पूरा सदन मिलकर इस बदलाव को पारित करेगा।
विकसित भारत और नारी शक्ति
2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ था। अब जो संविधान संशोधन आने वाला है, वह उसी कानून को जमीन पर उतारने की दिशा में अगला कदम है।
महिला आरक्षण से जुड़ी खास बात...
संसद में बार-बार अटका महिला आरक्षण
1. पहली बार: एच. डी. देवेगौड़ा सरकार (1996)
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12 सितंबर 1996 को महिला आरक्षण विधेयक पहली बार लोकसभा में पेश हुआ था। इसे 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में लाया गया। यह वह समय था, जब देश गठबंधन राजनीति के दौर में प्रवेश कर चुका था और हर बड़े फैसले के लिए व्यापक सहमति जरूरी हो गई थी।
जैसे ही यह विधेयक सदन में आया, वैसे ही इसका विरोध भी तेज हो गया। कई दलों ने इसे सामाजिक संतुलन के नजरिए से अधूरा बताया तो कुछ ने इसमें पिछड़े वर्गों के लिए अलग कोटे की मांग उठाई। स्थिति इतनी जटिल हो गई कि सरकार को इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजना पड़ा।
यहीं से साफ हो गया कि यह मुद्दा महिला सशक्तिकरण का नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बन चुका है। यह वह बिंदु था, जहाँ से महिला आरक्षण की लंबी और उलझी हुई यात्रा शुरू हुई।
2. दूसरी बार: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार (1998–2003)
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1998 से 2003 के बीच का दौर महिला आरक्षण के लिए सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल वाला रहा। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई बार इस विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन हर बार यह सियासी असहमति की भेंट चढ़ गया।
- 1998: 12वीं लोकसभा में इसे 84वें संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया गया, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता के कारण सदन भंग हो गया और विधेयक स्वतः निरस्त हो गया।
- 1999: 13वीं लोकसभा में इसे फिर पेश किया गया। बहस भी हुई, लेकिन सर्वसम्मति नहीं बन सकी।
- 2002 और 2003: सरकार ने एक बार फिर प्रयास किए, लेकिन हर बार विरोध और हंगामे ने रास्ता रोक दिया।
3. तीसरी बार: मनमोहन सिंह सरकार (2008–2010)
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यूपीए सरकार के दौर में महिला आरक्षण को लेकर ठोस प्रगति देखने को मिली। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सरकार ने रणनीति बदली और विधेयक को राज्यसभा में पेश किया। मई 2008 में 108वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में इसे राज्यसभा में पेश किया गया। इस कदम के पीछे सोच यह थी कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसलिए लोकसभा भंग होने पर भी विधेयक समाप्त नहीं होगा।
इसके बाद 9 मार्च 2010 को राज्यसभा ने ऐतिहासिक मतदान के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया। यह महिला आरक्षण के इतिहास का सबसे बड़ा क्षण था। ऐसा पहली बार हुआ जब यह विधेयक संसद के किसी सदन से पास हुआ, लेकिन इसके बाद भी रास्ता आसान नहीं हुआ। लोकसभा में इसे पेश करने से पहले ही राजनीतिक माहौल बिगड़ गया।
कई दलों का विरोध जारी रहा और सरकार को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका। आखिरकार यह विधेयक लोकसभा में पेश ही नहीं हो पाया। जब 2014 में लोकसभा भंग हुई, तो यह विधेयक एक बार फिर लैप्स हो गया। यह वह मोड़ था, जहां उम्मीदें सबसे ज्यादा थीं, लेकिन परिणाम फिर अधूरा रह गया।
4. आखिरकार मंजिल: नरेंद्र मोदी सरकार (2023)
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करीब 27 साल तक चली राजनीतिक खींचतान, बहस और असहमति के बाद 2023 में महिला आरक्षण विधेयक को उसका मुकाम मिला। नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे नए संसद भवन में विशेष सत्र के दौरान पेश किया, जो अपने आप में एक प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक कदम था।
- 19 सितंबर 2023: 128वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश।
- 20 सितंबर 2023: लोकसभा में भारी बहुमत (454 पक्ष में, 2 विरोध में) से पारित।
- 21 सितंबर 2023: राज्यसभा ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
- 29 सितंबर 2023: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद यह 106वां संविधान संशोधन अधिनियम बन गया।
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