RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, किताबों में हो हिंदू देवी-देवताओं की जानकारी
समझें क्या है पूरा मामला...
- भागवत बोले, किताबों में हो देवी-देवताओं की जानकारी।
- बच्चों के सवालों का जवाब दें माता-पिता, भागवत की सलाह।
- मोबाइल ने छीनी घर की बातचीत, भागवत की बड़ी चिंता।
- निर्देश नहीं संवाद जरूरी, RSS प्रमुख की नई सीख।
- पाठ्यपुस्तकों में देवी-देवता, भागवत का बड़ा बयान।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पाठ्यपुस्तकों में हिंदू देवी-देवताओं की जानकारी शामिल करने की वकालत की। उनका कहना है कि माता-पिता को बच्चों के सवालों का जवाब देना आना चाहिए। भागवत ने परिवारों में घटती बातचीत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन ने घर की बातचीत की जगह ले ली है।
क्या बोले RSS प्रमुख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS – Rashtriya Swayamsevak Sangh) के प्रमुख मोहन भागवत शुक्रवार को एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम का विषय था युगानुकूल मातृत्व। उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर देवी-देवताओं के बारे में सवाल पूछते हैं। लेकिन कई बार माता-पिता उनका जवाब नहीं दे पाते।
बच्चों के सवालों का हो जवाब
भागवत ने बताया कि बच्चे अक्सर पूछते हैं कि किसी देवता का मुख वानर जैसा क्यों है। कुछ पूछते हैं कि किसी देवता का मुख हाथी जैसा क्यों है। उनके अनुसार न पिता को इसका जवाब पता होता है, न मां को।
पाठ्यपुस्तकों में हो जानकारी
भागवत ने कहा कि देवी-देवता की जानकारी शुरू से ही पाठ्यपुस्तकों में होनी चाहिए। उनके अनुसार यह आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को जो सिखाया जाएगा, वे वही सीखेंगे। उनके मुताबिक शुरुआती 12 साल बच्चों का पालन-पोषण माता-पिता के हाथ में होता है।
संवाद पर दें ज्यादा जोर
भागवत ने कहा कि आज के बच्चों के लिए पालन-पोषण का तरीका बदलना होगा। उनके अनुसार निर्देश देने की बजाय संवाद पर जोर देना चाहिए। उन्होंने बताया कि पहले बच्चे बिना सवाल किए माता-पिता की बात मान लेते थे। लेकिन आज ऐसा नहीं है, हर बात समझानी होगी।
बच्चों को चाहिए स्नेह और समय
भागवत ने कहा कि बच्चे भौतिक प्रभावों और लगातार प्रचार वाले माहौल में बड़े हो रहे हैं। उनके अनुसार बच्चों को इस भूलभुलैया से बाहर निकालने में मदद चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्नेह, समय और संवाद चाहिए। उनके मुताबिक निर्देश नहीं चर्चा होनी चाहिए, आदेश नहीं सहमति होनी चाहिए।
मोबाइल ने छीनी बातचीत
भागवत ने परिवारों में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज परिवार का हर सदस्य मोबाइल में व्यस्त रहता है। उनके अनुसार पति-पत्नी काम से और बच्चे स्कूल से लौटते हैं, फिर सब खाना खाकर मोबाइल में लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि लोग घर आते तो हैं, लेकिन असल में एक-दूसरे से मिलते नहीं हैं।
बातचीत से खुलेंगे बच्चे
भागवत के अनुसार समय निकालने पर ही परिवार में बातचीत हो पाएगी। उन्होंने कहा कि बातचीत होने पर बच्चे खुलकर अपनी बात कहेंगे। उनके मुताबिक बच्चे माता-पिता के व्यवहार पर बारीकी से नजर रखते हैं। उन्होंने कहा कि सीख और घर के आचरण में अंतर बच्चे तुरंत पहचान लेते हैं।
मजबूत आधार से मिलेगी मदद
भागवत ने कहा कि जो बात बच्चों को सिखाई जाती है, वह माता-पिता के जीवन में भी दिखनी चाहिए। उनके अनुसार संस्कार स्नेह, संवाद और खुद के उदाहरण से मिलते हैं।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यह आधार मजबूत होने पर बच्चों के लिए तकनीक के जाल से निकलना आसान होगा। उनके मुताबिक कुछ समय फंसने पर भी बच्चे वापस लौटने का रास्ता खोज लेंगे।
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