मानसून 2026: 11 साल में सबसे कम मानसूनी बारिश दर्ज, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में सूखा बढ़ा
Monsoon 2026: आसमान में काले बादल छाए रहे। लेकिन पानी उम्मीद के मुताबिक बिल्कुल नहीं बरसा। मानसून का यह सीजन अब खत्म होने जा रहा है। मगर इसके आंकड़े डराने वाले हैं। इस साल पूरे देश में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई है। आंकड़ों को देखें तो यह 13वां सबसे सूखा साल साबित हुआ है।
करीब 11 साल बाद ऐसा सूखा मानसून देखने को मिला है। देश के करीब 43 फीसदी जिलों में बारिश की भारी कमी रही है। कई राज्यों में तो फसलें पानी के बिना सूखने लगी हैं। किसानों के चेहरे पर उदासी साफ दिखाई दे रही है।
मध्य प्रदेश की स्थिति भी कोई बहुत अच्छी नहीं है। राज्य के करीब 10 जिलों में पानी की काफी कमी है। इन जिलों में बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया। हालांकि कुछ शहरों में देर से सही पर पानी बरसा। लेकिन बड़े इलाके में पानी की किल्लत बनी हुई है।
मानसून की इस बेवफाई ने सबको हैरान कर दिया है। पंजाब और बिहार में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। बारिश की यह कमी आगे बड़ा संकट ला सकती है। भूजल स्तर नीचे जाने का खतरा भी बढ़ गया है। आइए जानें इस साल मानसून ने कहां कैसा खेल दिखाया।
देश में मानसूनी बारिश का हाल
इस साल मानसून का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। देशभर में औसत से बहुत कम पानी गिरा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, यह 11 वर्षों में सबसे सूखा सीजन रहा। साल 2001 के बाद यह चौथी कम बारिश है।
देश के 38 फीसदी हिस्सों में बारिश घटी है। कुल 282 जिलों में पानी की किल्लत बढ़ी है। कई राज्यों में खेती पर बुरा असर पड़ा है।
घट रही बारिश: 2001 के बाद चौथी कम बारिश
| वर्ष | बारिश में कमी |
| 1972 | 22.3% |
| 2002 | 20.9% |
| 1965 | 18.6% |
| 2009 | 18.3% |
| 1905 | 16.8% |
| 1979 | 16.7% |
| 1987 | 14.3% |
| 1911 | 13.8% |
| 1901 | 13.8% |
| 1951 | 13.2% |
| 1918 | 13.0% |
| 2015 | 12.7% |
| 2026 | 12.6% |
पंजाब और बिहार में सूखा संकट
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पानी कम बरसा। पंजाब में सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश हुई।
बिहार में भी स्थिति बहुत अधिक चिंताजनक है। वहां बारिश में 32 फीसदी की कमी आई।
हरियाणा और राजस्थान में भी बादल कम बरसे। सब्जियों और अनाज की पैदावार पर असर पड़ेगा। किसानों की लागत अब काफी बढ़ सकती है।
मध्य प्रदेश के 10 जिले परेशान
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 36.4 इंच बारिश दर्ज हुई। यह सामान्य बारिश से करीब च प्रतिशत कम है।
प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में पानी बहुत कम गिरा। आलीराजपुर जिले में 51 फीसदी कम बारिश हुई।
छिंदवाड़ा और धार में भी पानी की कमी रही। पांढुर्णा, बैतूल और हरदा में सूखा गहरा गया। रतलाम, मंदसौर और झाबुआ भी इससे प्रभावित हुए।
भोपाल का मौसम और बांधों का जलस्तर
राजधानी भोपाल में मानसून की शुरुआत अच्छी रही। पूरे सीजन में भोपाल में 45.18 इंच पानी गिरा। यह सामान्य से 9.1 प्रतिशत अधिक बारिश है। हालांकि सितंबर महीने में यहां बहुत कम पानी गिरा।
यह पिछले आठ सालों का सबसे कमजोर सितंबर रहा। लेकिन अच्छी बारिश से बड़े तालाब भर गए। प्रदेश के कई प्रमुख बांध भी लबालब हो गए।
अल नीनो का असर
पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश लगातार घट रही है। मेघालय में सामान्य से 60 फीसदी कम बारिश हुई। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अल नीनो का असर दिखा।
हालांकि इंडियन ओशन डिपोल अब पॉजिटिव जोन में है।
इससे अल नीनो का असर थोड़ा कम हो सकता है। आने वाले दिनों में मानसून पूरी तरह लौट जाएगा। राजस्थान और यूपी से भी बादल अब वापस जाएंगे।
Source Credit:
- India Meteorological Department (IMD) Daily Rainfall Data
- इस साल मानसून में बारिश की स्थिति क्या रही है?
इस साल पूरे देश में मानसून का प्रदर्शन कमजोर रहा है, औसत से बहुत कम बारिश हुई है। इससे यह 11 वर्षों में सबसे सूखा सीजन साबित हुआ है। - किस राज्यों में बारिश की कमी का सबसे अधिक असर पड़ा है?
पंजाब और बिहार में बारिश की कमी से सबसे अधिक नुकसान हुआ है। यहां क्रमशः 41 प्रतिशत और 32 प्रतिशत कम बारिश हुई। - मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति कैसी रही है?
मध्य प्रदेश में इस साल कुल 36.4 इंच बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से लगभग 20 प्रतिशत कम है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में बारिश की कमी अधिक रही है।