मानसून आने में देरी क्यों, कब आएगी राहत? जानिए वो सब जो आप जानना चाहते हैं

Pawan Modiya | Jun 02, 2026, 22:01 IST
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IMD (India Meteorological Department) ने 2026 मानसून की केरल आगमन तारीख कई बार बदली। पहले 26 मई, फिर 28 मई, फिर 1 जून और अब 4 जून का अनुमान है। एल-नीनो का खतरा और कमजोर पश्चिमी हवाएं इस देरी की मुख्य वजह हैं।

    5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

    1. IMD ने पहले केरल में मानसून 26 मई को आने का अनुमान लगाया था।
    2. तारीख बदलते-बदलते अब 4 जून तक पहुंच गई है।
    3. कमजोर पश्चिमी हवाएं और बंगाल की खाड़ी का चक्रवात मुख्य वजह हैं।
    4. IMD ने पूरे सीजन की बारिश का अनुमान भी 92% से घटाकर 90% किया।
    5. एल-नीनो (El Nino) का खतरा बाद के महीनों में बारिश को प्रभावित कर सकता है।

    मानसून क्यों हो रहा लेट?

    इस साल IMD (India Meteorological Department) ने शुरुआत में कहा था कि मानसून केरल में 26 मई को आएगा। लेकिन तय तारीख पर मानसून नहीं पहुंचा। इसके बाद विभाग ने तारीख बदलकर 28 मई की, फिर 1 जून की और अब ताजा अनुमान 4 जून का है।



    दरअसल, मानसून की घोषणा करने के लिए IMD को तीन शर्तें एक साथ पूरी होती देखनी होती हैं। पहली शर्त, केरल के तय मौसम केंद्रों में से कम से कम 60 फीसद जगहों पर लगातार बारिश हो। दूसरी शर्त, अरब सागर के ऊपर पश्चिमी हवाएं तय रफ्तार से चलें। तीसरी शर्त, इलाके में पर्याप्त बादल हों।



    इस वक्त केरल में बारिश हो रही है और बादल भी काफी हैं। लेकिन पश्चिमी हवाएं अभी जरूरी रफ्तार से नहीं चल रहीं। इसीलिए IMD ने अभी तक मानसून की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।



    बारिश हो रही है तो मानसून क्यों नहीं?

    मई में देश के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। दिल्ली समेत उत्तर भारत में लोगों को लगा कि मानसून आ गया। लेकिन यह मानसून की बारिश नहीं थी। मई में भयंकर गर्मी की वजह से "हीट डोम" (Heat Dome) बना। इससे जमीन की सतह से बड़े पैमाने पर पानी भाप बनकर उड़ा। इस नमी से बादल बने और बारिश हुई। यह राहत की बारिश थी, मानसून नहीं।



    दक्षिण-पश्चिम मानसून तब आता है जब अरब सागर से नमी भरी हवाएं भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ती हैं। यह बारिश का मौसम करीब चार महीने चलता है। इसकी शुरुआत केरल से होती है और फिर पूरे देश में फैलता है।



    चक्रवात ने भी बिगाड़ा खेल

    बंगाल की खाड़ी में बने एक चक्रवात की वजह से पूर्वी भारत और उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में तेज हवाएं और बारिश हुई। लेकिन इसी चक्रवात ने पश्चिमी हवाओं को और कमजोर कर दिया। नतीजा यह हुआ कि मानसून की रफ्तार और धीमी हो गई।



    IMD ने 2 जून को कहा कि 4 जून तक अरब सागर, लक्षद्वीप द्वीप समूह और केरल के कुछ हिस्सों में मानसून के बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। यानी इंतजार अब बस कुछ दिनों का और है।



    बारिश का अनुमान भी घटा

    IMD ने पूरे मानसून सीजन की बारिश का अनुमान पहले एलपीए (LPA) (Long Period Average) यानी दीर्घकालीन औसत का 92 फीसद बताया था। अब इसे घटाकर 90 फीसद कर दिया गया है।



    एलपीए देश के किसी खास इलाके में किसी महीने या सीजन में लंबे समय में दर्ज की गई बारिश का औसत होता है। 1971 से 2020 के आंकड़ों पर आधारित देश का औसत 87 सेंटीमीटर है। अगर बारिश एलपीए के 90 फीसद से कम हो तो IMD इसे "कमी वाला मानसून" कहता है।



    एल-नीनो का बड़ा खतरा

    मौसम विशेषज्ञ जुलाई से एल-नीनो (El Nino) की स्थिति विकसित होने की संभावना पर करीबी नजर रखे हुए हैं। एल-नीनो आमतौर पर भारत में मानसून की बारिश को कमजोर करता है।



    एल-नीनो तब होता है जब प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे भारत में मानसून के दौरान, खासकर अगस्त, सितंबर और नवंबर में, सामान्य से कम बारिश होती है। अनुमान है कि एल-नीनो की स्थिति सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच बन सकती है। इससे मानसून के दूसरे हिस्से पर असर पड़ सकता है।



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    देरी है, पर घबराने की जरूरत नहीं

    मानसून आमतौर पर 1 जून तक केरल पहुंचता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, केरल में 8 जून तक मानसून आना भी सामान्य दायरे में माना जाता है। ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि IMD के मानसून अनुमान आमतौर पर सटीक होते हैं। असली तारीख और अनुमानित तारीख के बीच का फर्क ज्यादातर चंद दिनों का ही होता है। 2025 में IMD का अनुमान 27 मई था और मानसून 24 मई को आ गया। 2024 में 31 मई का अनुमान था और मानसून 30 मई को आया।



    यह खबर क्यों जरूरी है?

    दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की खेती, पानी की जरूरत और आर्थिक ताकत की बुनियाद है। देश की करीब 60 फीसद खेती सिंचाई से नहीं, बारिश के पानी पर निर्भर है। करोड़ों किसान अपनी खरीफ फसल की बुवाई मानसून की चाल देखकर तय करते हैं। देरी या कम बारिश का सीधा असर खाद्य उत्पादन, महंगाई और ग्रामीण आमदनी पर पड़ता है। इसके अलावा देश के जलाशय और भूजल भी मानसून पर निर्भर हैं, जो पीने का पानी और बिजली उत्पादन का आधार हैं। एल-नीनो की आशंका और IMD की घटती बारिश की भविष्यवाणी यह बताती है कि नीति निर्माताओं, किसानों और आम नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है। यह खबर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में दर्ज जीवन के अधिकार, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी से भी जुड़ी है। सूचना का यह प्रसार नागरिकों को समय रहते तैयार होने में मदद करता है।



    जरूरी FAQ

    2026 में केरल में मानसून कब आएगा?



    IMD के ताजा अनुमान के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून 2026 के आसपास केरल पहुंच सकता है। विभाग ने पहले 26 मई का अनुमान दिया था, जिसे बाद में बदलकर 28 मई, फिर 1 जून और अब 4 जून किया गया है। मानसून की सामान्य तारीख 1 जून होती है, और 8 जून तक का आना भी सामान्य माना जाता है। मानसून की घोषणा तभी होती है जब अरब सागर की पश्चिमी हवाएं तेज हों, बादल पर्याप्त हों और केरल के ज्यादातर मौसम केंद्रों पर लगातार बारिश हो।



    मानसून 2026 में देरी क्यों हो रही है?



    इस साल मानसून में देरी की मुख्य वजह अरब सागर के ऊपर पश्चिमी हवाओं का कमजोर होना है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात ने भी इन हवाओं को और धीमा कर दिया। IMD के मुताबिक, जब तक ये हवाएं जरूरी रफ्तार नहीं पकड़तीं, मानसून की आधिकारिक घोषणा नहीं की जा सकती। उत्तर भारत में हो रही बारिश मानसून की नहीं, बल्कि "हीट डोम" प्रभाव और स्थानीय बादलों से हो रही है।



    एल-नीनो का इस साल मानसून पर क्या असर पड़ेगा?



    मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच एल-नीनो की स्थिति बन सकती है। एल-नीनो तब होता है जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर भारत में मानसून के दूसरे दौर यानी अगस्त-सितंबर में कम बारिश के रूप में दिख सकता है। इसी वजह से IMD ने पूरे सीजन की बारिश का अनुमान 92 फीसद एलपीए से घटाकर 90 फीसद कर दिया है।



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