देश में नॉर्मल डिलीवरी की जगह बढ़ रहा सिजेरियन का चलन, जानें चौंकाने वाले आंकड़े

Kaushiki | Jun 30, 2026, 11:30 IST
NFHS-6 Cesarean Delivery Report
स्वास्थ्य सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में सिजेरियन केस तेजी से बढ़े हैं। निजी अस्पतालों में हर 10 में से 6 डिलीवरी ऑपरेशन से हो रही है। शहरों में गांवों के मुकाबले तीन गुना अधिक ऑपरेशन हो रहे हैं, जो कि बेहद डराने वाला आंकड़ा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • तीन साल के भीतर सिजेरियन मामलों में चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
  • निजी अस्पतालों में होने वाली 10 में से 6 डिलीवरी अब ऑपरेशन से हो रही है।
  • शहरों में हर तीन में से एक महिला का प्रसव सिजेरियन के जरिए हो रहा है।
  • ग्रामीण इलाकों में सिजेरियन का आंकड़ा शहरों के मुकाबले काफी कम, सिर्फ 11% है।
  • सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा टूटने से निजी सेंटर्स पर भीड़ बढ़ रही है।

निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी

आजकल नॉर्मल डिलीवरी गुजरे जमाने की बात होती जा रही है। हर तरफ ऑपरेशन से चाइल्डबर्थ ट्रेंड्स बढ़ रहा है। हाल ही में आए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। इन आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है।



रिपोर्ट बताती है कि बीते तीन सालों में देश में सिजेरियन केस बहुत तेजी से ऊपर गए हैं। ये ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पूरे राज्य में सिजेरियन चाइल्डबर्थ की दर 12.1% से बढ़कर अब 16% हो गई है। इसका मतलब साफ है कि वॉम्ब (Womb) पर कैंची चल रही है।



Cesarean Delivery Report


निजी अस्पतालों की हैरान करने वाली तस्वीर

सबसे ज्यादा खराब स्थिति प्राइवेट या निजी अस्पतालों में देखने को मिल रही है। वहां का हाल सबसे ज्यादा चिंताजनक है। निजी अस्पतालों में अब 10 में से 6 से ज्यादा डिलीवरी ऑपरेशन से हो रही हैं। यह आंकड़ा करीब 61.7% तक पहुंच गया है।



दिलचस्प बात यह है कि तीन साल पहले तक यह आंकड़ा सिर्फ 52.3% हुआ करता था। तीन सालों में इसमें भारी उछाल आया है। सरकारी अस्पताल भी अब इस मामले में पीछे नहीं छूटे हैं। वहां भी सिजेरियन केस 8.2% से बढ़कर 10.4% हो चुके हैं।



शहरों और गांवों में जमीन आसमान का अंतर

इस रिपोर्ट में शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई दिया है। शहरों में ऑपरेशन का क्रेज ज्यादा है। शहरी इलाकों में हर तीन में से एक महिला का प्रसव ऑपरेशन से हो रहा है। शहरों में ये दर 33.9% है।



इसके उलट ग्रामीण इलाकों में स्थिति अभी भी काफी बेहतर बनी हुई है। गांवों में यह आंकड़ा केवल 11% ही दर्ज हुआ है। यानी शहरी महिलाओं में ऑपरेशन की संभावना ग्रामीण महिलाओं से तीन गुना से भी अधिक है। यह अंतर जीवनशैली को दर्शाता है।



आखिर क्यों बढ़ रहे हैं सिजेरियन केस

अब बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर मध्यप्रदेश में सिजेरियन केस इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं? इसके कई मुख्य कारण हैं। पहला बड़ा कारण प्रसव के दौरान होने वाले तेज दर्द का डर है। दर्द से बचने के लिए महिलाएं खुद इसे चुनती हैं।



दूसरा कारण देर से शादी होना और उम्र बढ़ने पर गर्भधारण करना है। इससे मेडिकल जटिलताएं या परेशानियां बहुत बढ़ जाती हैं। इसके अलावा कुछ अंधविश्वास भी इसके पीछे काम कर रहे हैं। लोग खास मुहूर्त और समय पर बच्चे का जन्म चाहते हैं।



अस्पतालों का मुनाफा और डॉक्टरों का डर

कुछ मामलों में अस्पतालों का मुनाफा कमाने का लालच भी इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है। कम समय में अधिक फीस मिलती है। ऑपरेशन करने से अस्पतालों का टर्नओवर बहुत आसानी से और जल्दी बढ़ जाता है। इसलिए वे इसे बढ़ावा देते हैं।



डॉक्टरों में कानूनी विवादों और डिलीवरी के रिस्क को लेकर एक डर रहता है। वे किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते। शहरी महिलाओं की खराब लाइफस्टाइल और शारीरिक मेहनत की कमी भी इसकी एक बड़ी वजह है। वे पैदल चलने से बचती हैं।



Cesarean Delivery Report


सरकारी अस्पतालों से क्यों टूट रहा है भरोसा

एक और चिंताजनक बात ये है कि लोग अब सरकारी अस्पतालों में जाने से कतरा रहे हैं। उनका भरोसा कम हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, अब केवल 76.8% डिलीवरी ही सरकारी अस्पतालों में हो रहे हैं। पहले ये संख्या 80.2% हुआ करती थी।



लोग अब बेहतर सुविधाओं की चाहत में निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। वहां उन्हें आरामदायक माहौल और तुरंत इलाज मिलता है। चूंकि निजी सेंटर्स (private hospital) में भीड़ बढ़ रही है, इसलिए वहां ऑपरेशन के मामलों में भी लगातार तेजी आ रही है।



डिलीवरी को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े

अगर हम तीन साल के बदलावों को एक साथ देखें, तो तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाती है। ये बदलाव काफी बड़ा है।



  • इंस्टीटूशनल कुल डिलीवरी की दर पहले 90.7% थी, जो अब घटकर 89.8% रह गई है।
  • सरकारी केंद्रों में डिलीवरी पहले 80.2% था, जो अब कम होकर 76.8% पर आ गया है।
  • निजी केंद्रों में सिजेरियन ऑपरेशन पहले 52.3% था, जो अब बढ़कर 61.7% हो गया है।
  • सरकारी केंद्रों में सिजेरियन डिलीवरी पहले 8.2% था, जो अब बढ़कर 10.4% पहुंच गया है।

घर पर डिलीवरी की चिंता अभी भी बरकरार

टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट के बाद भी करीब 12% डिलीवरी आज भी अस्पतालों के बाहर हो रहे हैं। ये एक गंभीर समस्या बनी हुई है। रूरल एरियाज में स्थिति और भी खराब है, जहां इंस्टीटूशनल डिलीवरी की दर मात्र 87.9% देखी गई है।



वहां अभी जागरूकता की कमी है। अस्पताल के बजाय घर पर डिलीवरी होने से जच्चा और बच्चा दोनों की जान को बड़ा खतरा रहता है। इस पर ध्यान देना जरूरी है। सरकार को निजी अस्पतालों की मनमानी रोकने और सरकारी व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।



FAQ

  1. निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी का प्रतिशत कितना बढ़ गया है?
    नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के अनुसार निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी की दर अब बढ़कर 61.7% हो गई है। इसका मतलब है कि वहां हर 10 में से 6 से अधिक प्रसव ऑपरेशन के जरिए किए जा रहे हैं।
  2. शहरों और गांवों में सिजेरियन प्रसव के आंकड़ों में क्या अंतर है?
    शहरों में सिजेरियन प्रसव का चलन गांवों के मुकाबले तीन गुना अधिक है। शहरों में जहां 33.9% यानी हर तीन में से एक प्रसव ऑपरेशन से होता है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा केवल 11% ही है।
  3. महिलाओं में सिजेरियन डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
    इसके मुख्य कारणों में प्रसव पीड़ा का डर, देर से प्रेगनेंसी होना, शहरी महिलाओं की निष्क्रिय लाइफस्टाइल, खास मुहूर्त पर बच्चे को जन्म देने का क्रेज और डॉक्टरों द्वारा रिस्क से बचने की कोशिश शामिल है।

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